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    सऊदी अरब में सुन्नी धर्मगुरु मुफ्ती असजद रजा की गिरफ्तारी:भारत सरकार को मौलाना शहाबुद्दीन की चेतावनी, बोले-अगर सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो होगा बड़ा प्रदर्शन

    1 hour ago

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    ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सऊदी अरब में भारतीय सुन्नी बरेलवी धर्मगुरु मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की गिरफ्तारी पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने इस संबंध में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। मौलाना रजवी ने कहा कि यह गिरफ्तारी न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि इससे भारत के करोड़ों मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो दिल्ली में सऊदी एंबेसी पर बड़ा प्रदर्शन होगा। बिना किसी अपराध के रियाद से हिरासत में लिए गए मुफ्ती असजद रजा विश्व प्रसिद्ध आला हजरत के परपोते और ताजुश्शरिया के उत्तराधिकारी मुफ्ती असजद रजा खां कादरी को सऊदी अरब की राजधानी रियाद से बीती रात करीब 12 बजे गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि वह एक धार्मिक महफिल (मिलाद-ए-मुस्तफा) में शिरकत कर रहे थे, तभी सऊदी पुलिस ने उन्हें और उनके साथियों को हिरासत में ले लिया। बरेली स्थित दरगाह आला हजरत से जुड़े उलेमाओं का कहना है कि मुफ्ती साहब वहां केवल मजहबी रस्मों के लिए गए थे और उन पर कोई भी कानूनी जुर्म साबित नहीं होता। सऊदी हुकूमत की दमनकारी नीति पर उठाए सवाल, 1972 और 1986 की घटनाओं का दिया हवाला मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सऊदी अरब सरकार के इस कदम को 'दमनकारी' करार दिया है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि यह पहली बार नहीं है जब सऊदी प्रशासन ने बरेलवी उलेमाओं को निशाना बनाया हो। इससे पहले 1972 में मुजाहिद-ए-मिल्लत मौलाना हबीबुर्रहमान कादरी और 1986 में हजरत ताजुश्शरिया को भी वहां गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शांतिपूर्ण तरीके से मिलाद की महफिल सजाना या इस्लाम के उसूलों पर चलना कोई जुर्म है? उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी हुकूमत इस्लाम के नाम पर अपना निजाम चलाती है, लेकिन खुद ही इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है। विदेश मंत्रालय से फौरन रिहाई के लिए दबाव बनाने की गुजारिश पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि भारत सरकार सऊदी अरब की सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाए ताकि मुफ्ती असजद रजा खां और उनके साथियों को बिना शर्त तुरंत रिहा किया जा सके। बरेली के काशाना-ए-नूरी और दरगाह आला हजरत से जुड़े अन्य प्रमुख उलेमाओं ने भी इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से गंभीरता पूर्वक विचार करने की अपील की है। समर्थकों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ सकता है।
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