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    'सिविल सर्विस के लिए इनर मोटिवेशन जरूरी':लखनऊ में अंबेडकर नगर की पूजा तिवारी और बहराइच की निशु शुक्ला ने दिए सक्सेस टिप्स

    2 hours ago

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    लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में UPPCS टॉपर पूजा तिवारी ने अपनी शैक्षणिक यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से अंबेडकर नगर की रहने वाली हैं, लेकिन कक्षा 10 तक की पढ़ाई बहराइच से पूरी की। इसके बाद 11वीं और 12वीं की शिक्षा लखनऊ पब्लिक स्कूल, लखनऊ से प्राप्त की। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन नेशनल पीजी कॉलेज, लखनऊ से किया, फिर जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी से भूगोल विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। वर्तमान में वह डीडीयू गोरखपुर से भूगोल में पीएचडी कर रही हैं। दैनिक भास्कर ने कार्यक्रम के दौरान उनसे खास बातचीत की और उनकी सफलता की पूरी जर्नी को जाना। पढ़िए उनसे हुई पूरी बातचीत। सवाल: घर में क्या और भी कोई प्रशासनिक सेवा से जुड़ा हुआ है? जवाब: मेरे परिवार में कुछ लोग प्रशासनिक सेवाओं में हैं। मेरे एक कजिन एडीओ पंचायत हैं, एक सप्लाई इंस्पेक्टर हैं और मेरी भाभी रिव्यू ऑफिसर हैं। मेरे पिता भी यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं। वे मुझे अपने अनुभव और कहानियां सुनाते थे, जिससे मुझे काफी प्रेरणा मिली। उनका अधिकारियों से सीधा संपर्क भी रहता था, जिससे मुझे समझ विकसित करने में मदद मिली। सवाल - यूपी पीसीएस की तैयारी और चयन तक पहुंचने में आपको कितना समय लगा? जवाब - इसमें काफी समय लगा। मैंने 2019 में ग्रेजुएशन के बाद तैयारी शुरू की थी। शुरुआत UPSC से की और दो प्रयास दिए, लेकिन प्रीलिम्स क्लियर नहीं हो पाया। दूसरे प्रयास में काफी मेहनत की, लेकिन फिर लगा कि अन्य विकल्प भी देखने चाहिए। इसके बाद मैंने UPPCS की तैयारी शुरू की और इस बार मुझे सफलता मिली, साथ ही अच्छी रैंक भी प्राप्त हुई। सवाल - क्या कभी परिवार की ओर से शादी को लेकर दबाव बना? जवाब - नहीं, ऐसा कभी नहीं हुआ। मेरे माता-पिता ने हमेशा पूरा सहयोग दिया। अगर उन्हें कहीं से ऐसी बातें सुनने को भी मिलती थीं, तो वे हमें नहीं बताते थे। वे हमेशा कहते थे कि जब तक मन हो, तैयारी करो। उन्होंने कभी किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला और पूरी स्वतंत्रता दी। मेरा मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भीड़ को देखकर परेशान नहीं होना चाहिए। जरूरी है कि आप अपनी मेहनत पर ध्यान दें। भीड़ में बहुत कम लोग होते हैं जो गंभीरता से पढ़ाई करते हैं। कई लोग एक-दो प्रयास के बाद छोड़ देते हैं। इसलिए लगातार मेहनत करते रहना और अपनी गलतियों से सीखना बेहद जरूरी है। सवाल - आप किस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देना चाहेंगी? जवाब - मेरी प्राथमिकता शिक्षा क्षेत्र में काम करने की है। आज भी कई बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं जा पाते। मैंने अपने गांव में चाइल्ड लेबर के कई मामले देखे हैं, जबकि आसपास स्कूल मौजूद हैं। यह स्थिति दुखद है। मेरा मानना है कि बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास होने चाहिए। सवाल - ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लड़कियां पीछे हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब - पूरी तरह ऐसा नहीं कहा जा सकता, लेकिन कुछ हद तक यह सही है। गांवों में अभी भी जागरूकता की कमी है। कई अभिभावक सोचते हैं कि शिक्षा पर खर्च करने के बाद दहेज भी देना पड़ेगा। इसके अलावा अच्छे उदाहरणों की कमी भी एक कारण है। जब लड़कियां आगे बढ़ती हैं, तो दूसरे परिवार भी प्रेरित होते हैं। अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है। सवाल - आपकी सफलता का मंत्र क्या है? जवाब - मेरे अनुसार सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है—अनुशासन और कम से कम विचलन। मैंने हमेशा यह सोचा कि इस समय मेरे लिए क्या सबसे जरूरी है। पढ़ाई को प्राथमिकता दी और तात्कालिक खुशियों को टाल दिया। अगर आप कुछ वर्षों तक पूरी लगन और फोकस के साथ मेहनत करते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है। सवाल - आप पीएचडी कर रही हैं, आप प्रोफेसर भी बन सकती थीं, फिर पीसीएस क्यों चुना? जवाब - मैं पीएचडी कर रही हूं, जो एक अच्छा और स्थिर करियर विकल्प है, लेकिन मेरा झुकाव हमेशा जमीनी स्तर पर काम करने की ओर रहा है। मैंने गांवों में शिक्षा की कमी, सरकारी व्यवस्थाओं की कमजोरियां और लोगों में जागरूकता की कमी को करीब से देखा है। मुझे लगा कि प्रशासनिक सेवा एक बेहतर मंच है, जहां से मैं सीधे लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकती हूं और नीतियों को जमीन पर लागू कर सकती हूं। अब पढ़िए निशु शुक्ला (रैंक 34, कमर्शियल टैक्स ऑफिसर) की बातचीत सवाल - आपकी तैयारी की जर्नी कहां से शुरू हुई? जवाब - मैंने बीटेक (आईटी) किया है। इसके बाद 2020 से सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। इस दौरान कई असफलताएं मिलीं। यह मेरा चौथा प्रयास था, जिसमें मुझे सफलता मिली। पहली बार प्रीलिम्स निकला और पहली बार ही फाइनल लिस्ट में नाम आया। सवाल - घर में सबसे ज्यादा सपोर्ट किसका रहा? जवाब - सबसे बड़ा सपोर्ट मेरे माता-पिता रहे हैं। मेरी मां आज भी मेरे साथ हैं और पापा का हमेशा सहयोग मिला। उनके बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती। सवाल - क्या आपके परिवार में कोई प्रशासनिक सेवा में है? जवाब - मेरे पापा रिटायर्ड एडीएम हैं। उन्हें देखकर ही मुझे सिविल सर्विसेज में आने की प्रेरणा मिली। बचपन से ही मेरा लक्ष्य यही था। सवाल - छात्रों के लिए क्या ज्यादा जरूरी है—पढ़ना या कॉन्सेप्ट क्लियर करना? जवाब - दोनों जरूरी हैं। पढ़ने से ही कॉन्सेप्ट क्लियर होते हैं और कॉन्सेप्ट क्लियर होने पर ही अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है। यह परीक्षा रट्टा मारने की नहीं, बल्कि समझ विकसित करने की है। सवाल - आगे UPSC का लक्ष्य है? जवाब - मैं मई से तैयारी शुरू करूंगी और 2027 का प्रयास दूंगी। मेरी जर्नी अभी जारी है और आगे भी बहुत कुछ हासिल करना है। इस परीक्षा में समय लगता है, लेकिन इनर मोटिवेशन बहुत जरूरी है। आप सिविल सर्वेंट क्यों बनना चाहते हैं, यह हमेशा याद रखना चाहिए। असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। जब आपका नाम फाइनल लिस्ट में आता है, तो यह मायने नहीं रखता कि आपने 2 साल लगाए या 10 साल। सवाल - गांवों में शिक्षा की कमी को लेकर आपका क्या मानना है? जवाब - लड़कियों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है। पढ़ाई सिर्फ डिग्री के लिए नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए होनी चाहिए। समाज में लड़कियों पर कई तरह के दबाव होते हैं, जैसे शादी का दबाव, लेकिन उनसे डरने के बजाय माता-पिता को समझाना चाहिए। महिलाओं का सशक्त होना पूरे समाज और देश के विकास के लिए जरूरी है।
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