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    शबे कद्र की आखिरी ताक रात आज:गोरखपुर में रोजेदार इबादत में जुटे, गुनाहों की माफी मांगी

    2 hours ago

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    गोरखपुर में रमजान के पाक महीने में मंगलवार को 27वां रोजा मुकम्मल होने के साथ शहर में इबादत का सिलसिला तेज हो गया। मस्जिदों और घरों में रोजेदारों ने नमाज अदा कर, कुरआन-ए-पाक की तिलावत की और गुनाहों की माफी मांगी। उलेमा ने बताया कि शबे कद्र की आखिरी ताक रात (29वीं) बुधवार 18 मार्च को है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की अपील की गई है। मुफ्ती मुहम्मद शुएब रजा निजामी ने बताया कि हदीस के अनुसार ईद-उल-फित्र की रात को लैलतुल जाइजा यानी ईनाम की रात कहा जाता है। इस रात और ईद-उल-अजहा की रात में इबादत का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि ईद उन लोगों के लिए इनाम का दिन है जिन्होंने रमजान रोजा, नमाज और इबादत में गुजारा। ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फित्र अदा करना जरूरी है और नमाज के बाद मुबारकबाद देना, हाथ मिलाना व गले मिलना भाईचारा बढ़ाता है। ईद की रात बाजारों में समय न गंवाएं, इबादत करें शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि ईद की रात को बाजारों में समय बिताने के बजाय इबादत में गुजारना चाहिए। उन्होंने नमाज की पाबंदी, कुरआन की तिलावत और झूठ, फरेब व रिश्वतखोरी जैसी बुराइयों से दूर रहने की नसीहत दी। मौलाना जहांगीर अहमद ने कहा कि ईद केवल मजहबी त्योहार नहीं बल्कि इंसानियत का भी त्योहार है। जकात और सदका-ए-फित्र का मकसद जरूरतमंदों की मदद और समाज में संतुलन बनाए रखना है। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील मौलाना महमूद रजा कादरी ने लोगों से अपील की कि वे गरीबों, यतीमों और फकीरों की जकात व फित्रा से मदद करें और ईद की रात को इबादत में बिताएं। उन्होंने कहा कि जिंदगी को कुरआन और हदीस के मुताबिक ढालना जरूरी है। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर के सदर अलाउद्दीन निजामी ने बताया कि रमजान के आखिरी अशरे की 21, 23, 25, 27 और 29वीं रातों को शबे कद्र माना गया है। यह रात हजारों महीनों से अफजल है, जिसमें फरिश्ते जमीन पर उतरकर इबादत करने वालों के लिए दुआ करते हैं और पूरी रात रहमत बरसती है। भूलकर खाने से रोजा नहीं टूटता रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर सवाल-जवाब जारी है। उलेमा ने स्पष्ट किया कि भूलकर खाने से रोजा नहीं टूटता, लेकिन याद आते ही तुरंत रुक जाना चाहिए और मुंह में मौजूद निवाला भी निकाल देना चाहिए।
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