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    शाहजहांपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक की मांग:उत्तराखंड मेडिकल एसोसिएशन ने 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

    16 hours ago

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    शाहजहांपुर में उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों (SPEs) से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार को 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन का आरोप है कि कर्मचारियों का अवैध रूप से तबादला किया जा रहा है, उन्हें जबरन काम से रोका जा रहा है और फर्जी आरोपों के आधार पर नौकरी से निकाला जा रहा है। इसके अलावा, वेतन और यात्रा भत्ते का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। संगठन ने बताया कि कई नियोक्ता बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 सहित विभिन्न श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। कर्मचारियों को धमकाने, अपमानित करने और यूनियन गतिविधियों को दबाने के लिए झूठी पुलिस शिकायतें दर्ज कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इससे श्रमिकों के कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। एसोसिएशन की 20 सूत्रीय मांगों में चार श्रम संहिताओं को निरस्त कर मौजूदा श्रम कानूनों को जारी रखने की मांग प्रमुख है। उन्होंने फिक्स्ड टर्म रोजगार व्यवस्था का विरोध करते हुए कर्मचारियों की छंटनी, स्थानांतरण और बर्खास्तगी पर रोक लगाने की बात कही है। संगठन ने समय पर पूरा वेतन, न्यूनतम मासिक वेतन 26,910 रुपये और ईपीएस पेंशनभोगियों के लिए कम से कम 9,000 रुपये पेंशन सुनिश्चित करने की भी मांग की है। अन्य मांगों में 8 घंटे का निश्चित कार्यदिवस लागू करना, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के जरिए निगरानी पर रोक लगाना और ईंधन व महंगाई को देखते हुए दैनिक व यात्रा भत्ते में वृद्धि के निर्देश जारी करना शामिल है। संगठन ने सरकार से इन मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की है। संगठन ने यह भी कहा कि अस्पतालों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के काम पर लगे प्रतिबंध को वापस लिया जाए और उनके कार्य को आपराधिक कृत्य न माना जाए। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी मांगों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी शून्य करने, सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने, आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने तथा कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार रोकने के लिए वैधानिक मार्केटिंग कोड बनाने की बात शामिल है। एसोसिएशन ने श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाकर सजा दिलाने की मांग की है और कहा है कि उनकी सभी गतिविधियां कानून के दायरे में हैं। संगठन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को राहत प्रदान करने की अपील की है।
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