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    शंकराचार्य पर यौन उत्पीड़न के आरोपों में कितना दम?:वकील ने पूछा- 1 ही बटुक क्यों पेश हुआ; मार्कशीट में बालिग होने का दावा

    2 hours ago

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    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी टल गई है। उनके खिलाफ 2 बटुकों के यौन उत्पीड़न का केस 7 दिन पहले दर्ज किया गया था। केस दर्ज कराने वाले महंत आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है। 27 फरवरी को शंकराचार्य के वकील ने हाईकोर्ट में कहा- 'यह केस एक धर्मगुरु का है, न कि किसी अपराधी का।' उन्होंने आशुतोष महाराज की क्रिमिनल हिस्ट्री भी रखी। कोर्ट में साबित करने का प्रयास किया गया कि ये एक साजिश है। इसके बाद कोर्ट ने शंकराचार्य को अरेस्ट स्टे दे दिया। ये राहत सिर्फ मार्च के तीसरे सप्ताह तक ही दी गई है। कोर्ट ने 2 टिप्पणी कीं। पहली- मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनवाई करेंगे, तब तक शंकराचार्य को अरेस्ट नहीं किया जाएगा। दूसरी- शंकराचार्य पुलिस जांच में सहयोग करेंगे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पुलिस जांच में कितना घिर चुके हैं? आरोपों में कितना दम है? पाक्सो कोर्ट में बटुकों के बयान कितने अहम होंगे? इन सवालों के जवाब दैनिक भास्कर ने प्रयागराज के सीनियर अधिवक्ता से समझा। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानिए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या-कुछ हुआ… दोपहर के 3.45 बजे का वक्त था। कोर्ट रूम के बाहर वकीलों ओर लोगों की भारी भीड़ जमा थी। सभी शंकराचार्य के अरेस्ट स्टे की सुनवाई को सुनने पहुंचे थे। जज जितेंद्र कुमार सिन्हा कोर्ट रूम में दाखिल हुए। भीड़ के हालात को देखने के बाद उन्होंने कहा- इस केस की सुनवाई कोर्ट रूम में नहीं, हमारे चैम्बर में होगी। इसके बाद वादी पक्ष और आरोपी पक्ष के लोग और वकील कोर्ट रूम के बगल में बने उनके चैम्बर में चले गए। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा और सीनियर वकील दिलीप गुप्ता, उनके बेटे राजश्री गुप्ता ने बहस की। जबकि बटुकों के यौन उत्पीड़न को साबित करने के लिए यूपी के अपर महाअधिवक्ता मनीष गोयल ने जिरह देना शुरू किया। उन्होंने दलीलें दीं- शंकराचार्य की तरफ से वकील की दलील भी जानिए… इन जिरह को सुनने के बाद जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में की जाएगी। तब तक शंकराचार्य को पुलिस अरेस्ट नहीं करेगी। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अरेस्ट स्टे दिए जाने का विरोध करते हुए पॉक्सो एक्ट का हवाला दिया, मगर जज ने इसको अनसुना कर दिया। (जज के चैम्बर के अंदर हुई जिरह को वकील पीके मिश्रा ने दैनिक भास्कर के साथ साझा किया। ) शंकराचार्य के केस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील का व्यू सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शाश्वत आनंद से दैनिक भास्कर ने समझा कि शंकराचार्य पर लगे आरोप कोर्ट में कितना मजबूत रहेंगे, इसको लेकर सवाल किए गए। पढ़िए अधिवक्ता इस पर क्या सोचते हैं? सवाल. कोर्ट ने FIR का आदेश क्यों दिया, क्या कोर्ट ने माना कि ऐसा कुछ हुआ था? अधिवक्ता. FIR के आदेश से ये साबित नहीं होता कि शंकराचार्य पर लगे सभी आरोप सही हैं। ये आरोप की सूचना मानी जाएगी। किसी को लगा कि ये अपराध हुआ है, तो उसने पुलिस और कोर्ट तक ये जानकारी पहुंचा दी। अपराध की जानकारी के बाद जांच और सबूत इकट्‌ठा करना अहम है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, जबकि कोर्ट भी दोनों पक्षों को सुन रही है। सवाल. पॉक्सो एक्ट में क्या बच्चों के बयान पर्याप्त माने जाते हैं? अधिवक्ता. पॉक्सो एक्ट में नाबालिग लड़कों का बयान बहुत अहमियत रखता है, लेकिन वह बयान मजिस्ट्रेट लें या फिर कोर्ट में ऑन रिकॉर्ड कैमरे के सामने हो, मगर प्रभावित हो सकते हैं। इससे साफ है कि अपराध की जांच जरूरी है। यानि कि जो प्राथमिक आरोप हैं, उसकी प्राथमिक जांच होनी चाहिए। सवाल. आशुतोष महाराज क्या किसी बच्चे का अभिभावक बनकर केस लड़ सकते हैं। अधिवक्ता. बच्चों से जुड़े किसी भी मामले में अभिभावक कोई भी बन सकता है। लेकिन यह भी जांच का विषय होगा। आशुतोष महाराज का इस मामले में आगे आना जांच का एक पहलू होगा, लेकिन यह कोई अहमियत नहीं रखता। किसी घटना की सूचना, जानकारी होने पर कोई भी पुलिस या अदालत तक जा सकता है। यह उसका अधिकार है। सवाल. पुलिस कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट में क्या कहा, या केवल अपना मत दिया? अधिवक्ता. पुलिस ने पहले रिपोर्ट दर्ज नहीं की, लेकिन कोर्ट में वाद दाखिल होने पर रिपोर्ट दी कि प्रथम द्ष्ट्या अपराध बनता है, यह सही है। असल में जब पुलिस को तहरीर दी गई होगी, तब साक्ष्य नहीं दिए गए होंगे। आशुतोष महाराज ने शिकायत दी, पीड़ितों की तरफ से कुछ नहीं था। न पीड़ित सामने आए होंगे। तब पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। लेकिन जब कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य पहुंचे, विक्टिम पेश हो गए तो कोर्ट ने जांच का आदेश कर दिया। इसके बाद पुलिस को लगा कि प्राथमिक जांच होनी चाहिए, ऐसे में पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट लगा दी। सवाल. केस दर्ज हो चुका है, क्या शंकराचार्य और उनके शिष्य की गिरफ्तारी हो सकती है? अधिवक्ता. चूंकि मामला बटुकों के यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, ऐसे में शंकराचार्य को अपने बचाव में आना होगा। FIR दर्ज होने के बाद विवेचना तक इंतजार नहीं कर सकते हैं। पुलिस कोई भी एक्शन ले सकती है। अब शंकराचार्य को कोर्ट में FIR रद्द करने की मांग की अर्जी डालनी होगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा ही दी है। सवाल. क्या अब शंकराचार्य सरकार-प्रशासन से भिड़ने के हालात में नहीं रहेंगे? अधिवक्ता. दोनों बटुकों का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान दर्ज हो चुका। दोनों का मेडिकल परीक्षण करके रिपोर्ट सौंप दी गई। मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई या नहीं, ये बंद लिफाफे की रिपोर्ट होती है। पुलिस भी लीगल एक्सपर्ट से मशवरा कर रही है। सवाल. पॉस्को के केस में क्या कभी कोर्ट ने आदेश पलट दिए हों? अधिवक्ता. नाबालिग यौन उत्पीड़न के मामलों में कोर्ट में आरोप सही भी साबित होते हैं, कई मामलों में गलत भी सामने आते हैं। केस दर्ज होने के 20-20 साल बाद आरोप गलत साबित हो जाते हैं, जमानत दी जाती है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर FIR होने के बाद पुलिस ने अब तक क्या-कुछ किया, ये भी जानिए… जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं आशुतोष महाराज; जानिए इनके बारे में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टर थे। आशुतोष महाराज कांधला के प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह इसके प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। इसके बाद से वह संन्यासी जीवन जी रहे हैं। शंकराचार्य को लेकर जारी विवाद का ताजा मामला विस्तार से पढ़िए प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। ………… ये पढ़ें - शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक:अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित; सरकारी वकील की दलील- वे बहुत ताकतवर, केस प्रभावित करेंगे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखीं। अब मार्च के तीसरे हफ्ते में केस की सुनवाई होगी। पढ़िए पूरी खबर…
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