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    श्रीकृष्ण जन्मभूमि- ईदगाह मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई:एएसआई जवाब दाखिल करेगी, रिपोर्ट पर सभी पक्ष बहस में शामिल होंगे

    7 hours ago

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    श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) शुक्रवार को अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद रिपोर्ट पर सभी पक्ष बहस में शामिल होंगे। इससे पहले 30 जनवरी को श्रीकृष्ण जन्मभूमि- ईदगाह मस्जिद प्रकरण में तीन घंटे तक सुनवाई चली थी। जस्टिस अविनाश सक्सेना की अदालत में सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय मांगा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 फरवरी तय कर दी। सुनवाई के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मुकदमा संख्या तीन में अब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल नहीं की गई है। इस पर एएसआई की ओर से अदालत को बताया गया कि रिपोर्ट और जवाब प्रस्तुत करने के लिए उन्हें दो सप्ताह का समय जरूरी है। वहीं, मामले में लंबित प्रार्थना पत्रों को लेकर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में 16 फरवरी को होने वाली सुनवाई के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधि वाद से संबंधित सुनवाई प्रस्तावित है। इसके निर्णय के बाद ही हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जानिए इससे पहले सुनवाई में क्या हुआ? रिकॉर्ड में ईदगाह का नाम तक नहीं 10 दिसंबर को हुई सुनवाई में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह विवाद से जुड़े वाद संख्या चार के वादी संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। वाद संख्या चार के वादी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के आशुतोष ब्रह्मचारी के अनुसार संशोधन प्रार्थना पत्र में उन्होंने दावा किया है कि विवादित भूमि के रिकॉर्ड में ईदगाह का नाम तक नहीं है। और जिसे वजूखाना बताया जा रहा है, वह किसी भी प्रकार इस्लामिक निर्माण नहीं है। मरम्मत व सफाई में नीचे से देवी देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं गर्भगृह के पत्थर, कमल, चक्र, शंख जैसे वैदिक चिह्न मिले हैं। कहा गया है कि मूर्तियों को जानबूझकर नीचे दबाकर रखा गया था। कहा गया है कि यह स्थल मूलतः हिन्दू देवस्थान था। साथ ही रिकॉर्ड में शाही मस्जिद ईदगाह नाम की कोई भी अधिकृत संपत्ति नहीं मिलती। नगर निगम, बिजली विभाग, जल विभाग और राजस्व रिकॉर्ड में कहीं भी शाही मस्जिद ईदगाह नाम दर्ज नहीं है। इस नाम से न बिजली कनेक्शन और न कर पंजीकरण। अतः विवादित भूमि पर खड़ा ढांचा अभिलेख विहीन और वैधानिक आधार से रहित है। कहा गया है कि वज़ूखाने के नीचे दबाई गई प्राचीन मूर्तियां, रिकॉर्ड में ईदगाह का नाम न होने स्पष्ट है कि विवादित भूमि मूल श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की ही है। ऐसे में शाही मस्जिद ईदगाह का नाम हटाकर विवादित भूमि किया जाए। इसके अलावा वाद में महत्वपूर्ण तथ्य जोड़े गए हैं और वादी पक्ष में एक नया धार्मिक प्रतिनिधि एवं एक महत्वपूर्ण गवाह का नाम शामिल किया गया है। पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास महराज को वादी के रूप में सम्मिलित किए जा रहा है। जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक परंपरा, स्मृतियां और संरक्षित साक्ष्यों के संबंध में महत्त्वपूर्ण जानकारी रखते हैं। इसलिए वह इस वाद में आध्यात्मिक साक्ष्यदाता के रूप में होंगे।
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