Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Shaurya Path: बढ़ते वैश्विक संघर्षों के बीच Defence Minister Rajnath Singh ने उठाया बड़ा कदम

    3 hours from now

    1

    0

    वैश्विक संघर्षों और तेजी से बदलते सामरिक समीकरणों के इस दौर में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी दूरदर्शी रणनीति से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक ओर जहां भारत अपनी सेना को आधुनिक और भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करने के लिए रक्षा बल विजन 2047 जैसा व्यापक रोडमैप सामने लाया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रक्षा निर्यात भी तेजी से वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय मांग और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ हुए समझौते यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भारत अब केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक रक्षा व्यवस्था में भी एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।देखा जाये तो आज दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है जहां हर महाद्वीप में संघर्ष, शक्ति संतुलन और सामरिक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। इसी दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी किया गया दस्तावेज रक्षा बल विजन 2047 इसी रणनीतिक सोच का सशक्त उदाहरण है, जो स्पष्ट करता है कि मोदी सरकार भारत को केवल सुरक्षित ही नहीं बल्कि सामरिक रूप से प्रभावशाली राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।इसे भी पढ़ें: Agniveer को CM Dhami का बड़ा भरोसा, बोले- 10% Reservation से सुरक्षित करेंगे भविष्यनई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में जारी इस व्यापक दृष्टि दस्तावेज का उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत की सेना को आधुनिक, समन्वित, तकनीकी रूप से उन्नत और विश्व स्तर पर सम्मानित सैन्य शक्ति में बदलना है। यह वही वर्ष होगा जब भारत अपनी स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा। इस दस्तावेज में सैन्य सुधार, क्षमता विस्तार, संगठनात्मक पुनर्रचना और उन्नत तकनीक के व्यापक उपयोग का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।दरअसल आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल जमीन, समुद्र और आकाश में लड़ाई नहीं होती बल्कि सूचना, प्रौद्योगिकी और साइबर जैसे अनेक क्षेत्रों में भी मुकाबला होता है। इसी कारण इस विजन दस्तावेज में भारतीय सेना को बहु क्षेत्रीय और तीव्र प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति के रूप में विकसित करने की योजना रखी गई है। लक्ष्य यह है कि भारत की सेना किसी भी संभावित खतरे का समय रहते जवाब दे सके और दुश्मन को आक्रामक कदम उठाने से पहले ही रोक सके।इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त क्षमता का विकास है। थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के बीच योजनाओं, अभियानों और तकनीकी विकास में गहरा तालमेल स्थापित किया जाएगा। इससे सैन्य दक्षता बढ़ेगी और जटिल सुरक्षा परिस्थितियों में भी भारत की प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी होगी। आधुनिक युद्ध में यही संयुक्तता निर्णायक साबित होती है।मोदी सरकार की रक्षा नीति का एक और केंद्रीय स्तंभ आत्मनिर्भरता है। लंबे समय तक भारत रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भर रहा, जिससे न केवल रणनीतिक स्वतंत्रता सीमित होती थी बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। अब सरकार ने स्वदेशी रक्षा निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है। नई नीति के तहत देश में रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को अभूतपूर्व प्रोत्साहन दिया जा रहा है।रक्षा बल विजन 2047 इसी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें स्वदेशी तकनीक के विकास, घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप सैन्य समाधान तैयार करने पर जोर दिया गया है। इससे सेना की तैयारी मजबूत होगी और साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।वैश्विक सुरक्षा वातावरण की जटिलता को देखते हुए इस दस्तावेज में पूरे राष्ट्र की संयुक्त भागीदारी की अवधारणा भी सामने रखी गई है। इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं बल्कि कूटनीति, प्रौद्योगिकी, उद्योग और आर्थिक शक्ति के समन्वय से ही मजबूत होती है। यही समग्र दृष्टिकोण भारत को आने वाले दशकों में एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र बनाएगा।इसके अलावा, भारत की नई रक्षा नीति की प्रभावशीलता का स्पष्ट प्रभाव अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में दक्षिण पूर्व एशिया का महत्वपूर्ण देश इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने पर सहमत हुआ है। लगभग तीन हजार आठ सौ करोड़ रुपये के इस समझौते ने भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।हम आपको बता दें कि ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल मानी जाती है। इसकी गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तक पहुंचती है और यह जमीन, समुद्र, पनडुब्बी तथा वायु मंच से दागी जा सकती है। कम ऊंचाई पर तीव्र गति से लक्ष्य भेदने की इसकी क्षमता इसे रोकना लगभग असंभव बना देती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध का अत्यंत प्रभावशाली हथियार माना जाता है।भारत ने पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ चार दिन के संघर्ष के दौरान इसी मिसाइल का उपयोग कर दुश्मन के वायु अड्डों और सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की सैन्य तकनीक की ओर खींचा था। परिणामस्वरूप अनेक देश अब इस मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।इंडोनेशिया के साथ समझौते से पहले फिलीपींस ने भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदी थी और उसे अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए गेम चेंजर बताया था। इसके अलावा वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और मिस्र सहित कई देशों ने भारत के साथ संभावित समझौतों पर चर्चा शुरू कर दी है। यह स्थिति बताती है कि भारत तेजी से वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।रक्षा निर्यात का यह विस्तार केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है बल्कि इसका गहरा सामरिक महत्व भी है। जब भारत अपने मित्र देशों को आधुनिक हथियार प्रणालियां उपलब्ध कराता है तो वह क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को भी मजबूत करता है। विशेष रूप से हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की यह भूमिका चीन जैसी विस्तारवादी शक्तियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारत अब निर्णायक शक्ति है।स्पष्ट है कि मोदी सरकार की रक्षा नीति ने भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई दिशा दी है। जहां एक ओर सेना को आधुनिक बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है वहीं दूसरी ओर रक्षा निर्यात के माध्यम से भारत आर्थिक और सामरिक दोनों स्तरों पर मजबूत हो रहा है।रक्षा बल विजन 2047 इस परिवर्तन की आधारशिला है। यह दस्तावेज केवल सैन्य सुधार का खाका नहीं बल्कि विकसित भारत के उस भविष्य का घोषणापत्र है जिसमें भारत की सेना तकनीकी रूप से उन्नत, युद्ध के लिए सदैव तैयार और विश्व मंच पर सम्मानित शक्ति के रूप में खड़ी होगी।बहरहाल, आज जब वैश्विक राजनीति अनिश्चितता और संघर्ष के दौर से गुजर रही है तब भारत की यह दूरदर्शी रक्षा नीति न केवल देश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि आने वाले दशकों में भारत को विश्व शक्ति के रूप में स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। यही वह आक्रामक और आत्मविश्वासी रणनीति है जिसने भारत को नई सामरिक ऊंचाइयों की ओर अग्रसर कर दिया है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Supreme Court ने दिया ऐतिहासिक फैसला, Life Support System हटेगा, Harish Rana को मिली निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति
    Next Article
    'मिडिल ईस्ट संकट पर राजनीति कर रही कांग्रेस', केरल में बोले PM मोदी, युद्ध ने हमें फिर समझाया आत्मनिर्भरता का महत्व

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment