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    शिया सुन्नी वक्फ बोर्ड विलय की याचिका खारिज:पूर्व शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने दायर की थी, अली जैदी बोले- सही निर्णय

    3 hours ago

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    लखनऊ की हाईकोर्ट बेंच ने वक्फ बोर्ड से जुड़े हुए मामले को खारिज कर दिया। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी ने जानकारी देते हुए बताया कि शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी के द्वारा प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड को एक करने साथ ही मौजूदा बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। जिसको को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने खारिज कर दिया है। संबंधित मामले पर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने कहा कि पूरे देश में उत्तर प्रदेश और बिहार ऐसे राज्य हैं, जहां शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग-अलग गठित हैं। जबकि अन्य राज्यों में एक ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड कार्यरत है। राज्य सरकार को अधिकार त्यागी ने कहा कि वक्फ अधिनियम 1995 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी राज्य में शिया वक्फ की संख्या कुल वक्फ संपत्तियों की संख्या का 15 प्रतिशत या उससे अधिक हो, या कुल वक्फ आय में शिया वक्फ की आय 15 प्रतिशत या उससे अधिक हो, तो राज्य सरकार चाहे तो शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग-अलग गठित कर सकती है। प्रदेश में एक ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड होना चाहिए त्यागी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में अधिकृत आंकड़ों के अनुसार शिया वक्फ की संख्या मात्र 2 से 2.5 प्रतिशत के बीच है और आय भी 1 से 2 प्रतिशत के आसपास है। ऐसे में दो अलग-अलग बोर्डों का संचालन वक्फ अधिनियम 1995 और उसके बाद हुए संशोधनों की भावना के विपरीत है । इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के अनुसार प्रदेश में एक ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड होना चाहिए और यही उनकी याचिका की मुख्य प्रार्थना थी। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी ने कहा कि कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। दोनों वक्फ बोर्ड को जोड़ने वाली याचिका माहौल को खराब करने के लिए की गई थी। जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज करके याचिका करता को फटकार भी लगाया है। यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो गलत तरीके से याचिकाएं दायर करके कोर्ट का वक्त बर्बाद करते हैं।
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