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    शायान बोले- मैं इमरान मसूद के खिलाफ नहीं हूं:सपा में शामिल होने पर कहा-मुझे अपने ससुर से सुझाव लेने की जरूरत नहीं

    3 hours ago

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    सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पिछले कुछ दिनों से सपा पर हमलावर हैं। इसी बीच, 20 अगस्त को उनके दामाद शायान मसूद ने सपा ज्वाइन कर ली। उस समय तक शायान कांग्रेस में थे। इसे पश्चिमी यूपी की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। सपा में शामिल होने के बाद से शायान मसूद ने दैनिक भास्कर की बातचीत में कहा- मैं इमरान मसूद के खिलाफ नहीं हूं। सपा में शामिल होने के लिए हमें अपने ससुर इमरान मसूद की सलाह लेने की जरुरत नहीं है। हम सपा के लिए रणनीति बनाएंगे और जिले की सभी सीटों को जिताएंगे। अब पढ़िए हूबहू सपा नेता शायान मसूद की पूरी बातचीत… सवाल- सपा में आने का फैसला अचानक लिया या पहले से इसकी तैयारी चल रही थी? जवाब- 2027 के विधानसभा चुनाव में बड़ी ताकतों से मुकाबला करना है। हम काफी समय से महसूस कर रहे थे कि यूपी में भाजपा और उसकी विचारधारा को अगर कोई मजबूती से रोक सकता है, तो वह अखिलेश यादव का विजन और समाजवादी पार्टी है। इसी सोच के साथ हमने सपा में आने का फैसला लिया। सवाल- आपको क्यों लगता है कि भाजपा को अखिलेश यादव ही रोक सकते हैं? जवाब- 2022 के विधानसभा चुनाव का नतीजा देखिए। सपा ने करीब 150 सीटें जीती थीं। करीब 100 सीटें ऐसी थीं, जहां सपा 2 हजार से भी कम वोटों के अंतर से हारी थी। 2024 का लोकसभा चुनाव भी इसका उदाहरण है। आज सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। अखिलेश यादव की लीडरशिप, उनका विजन और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी महत्वपूर्ण है। सवाल- क्या इमरान मसूद की बयानबाजी से भाजपा को फायदा हो रहा है? जवाब- इमरान मसूद सीधे सपा पर हमला कर रहे हैं। इस समय व्यक्तिगत राजनीति चमकाने का समय नहीं है। सवाल यह नहीं है कि शायान या इमरान की राजनीति रहेगी या नहीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोकतंत्र बचेगा या नहीं। लोकतंत्र को मजबूत रखने के लिए समाजवादी पार्टी ही सबसे बेहतर रास्ता है। सवाल- सपा में आने से पहले आपने इमरान मसूद से बात की थी? जवाब- नहीं, उनसे कोई बात नहीं हुई। मैं अपना राजनीतिक फैसला ले रहा हूं। यह मेरा व्यक्तिगत फैसला है, इसलिए मुझे उनसे इस बारे में चर्चा करने की जरूरत नहीं लगी। सवाल- अगर अखिलेश यादव टिकट देते हैं तो आपकी पसंद की सीट कौन सी होगी? जवाब- मैं समाजवादी पार्टी में बिना किसी शर्त के आया हूं। मेरा मकसद है कि अपने जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर सपा को जिताया जाए। मुझे पार्टी कहां से चुनाव लड़ाती है या टिकट देती भी है या नहीं, यह पूरी तरह पार्टी का फैसला होगा। पार्टी जो भी फैसला करेगी, मैं उसे स्वीकार करूंगा। सवाल- 2027 में सपा के बहुमत में आने का दावा कर रहे हैं। पश्चिमी यूपी में ऐसा क्या बदलाव दिखाई दे रहा है? जवाब- बदलाव सिर्फ पश्चिमी यूपी में नहीं, बल्कि पूरे यूपी में दिखाई दे रहा है। सपा के साथ सबसे ज्यादा नौजवान जुड़ रहे हैं। देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने में युवाओं की बड़ी भूमिका है। आपने देखा है कि युवाओं ने किस तरह जिम्मेदारी संभालते हुए भाजपा को झटका दिया है। मुझे भरोसा है कि यही नौजवान आने वाले समय में पूरे यूपी में अखिलेश यादव की सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। सवाल- पीडीए रणनीति के जरिए सपा पश्चिमी यूपी में भाजपा को कैसे चुनौती देगी? जवाब- आज प्रदेश में जो कुछ हो रहा है, वह सबके सामने है। मेरठ की घटना इसका एक उदाहरण है। दलित और गुर्जर समाज के युवकों को एसपी कार्यालय बुलाकर मारा गया। इस मामले में अखिलेश यादव ने खुलकर आवाज उठाई। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी पीड़ितों की लड़ाई मजबूती से लड़ी। जब पूरा पीडीए एकजुट होगा, तो भाजपा को बड़ा झटका लगेगा। यही लोग सरकार बनाते भी हैं और सरकार बदलते भी हैं। सवाल- पश्चिमी यूपी में सपा की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? जवाब- मेरे हिसाब से पश्चिमी यूपी में सपा की कोई बड़ी कमजोरी नहीं है। सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर और शामली में सपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। बिजनौर, मुरादाबाद और रामपुर में भी पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। मुझे भरोसा है कि 2027 में पश्चिमी यूपी के साथ पूरे प्रदेश में सपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहेगा। सवाल- क्या सपा इमरान मसूद के परिवार से जुड़े होने के कारण सहारनपुर में आपकी राजनीतिक विरासत का इस्तेमाल करेगी? जवाब- मैं रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत का हिस्सा हूं। इमरान मसूद भी उसी विरासत से जुड़े हैं। हम पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ सपा को मजबूत करने का काम करेंगे। पार्टी को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत लगाएंगे। सवाल- आपने खेल के क्षेत्र में देश का प्रतिनिधित्व किया है। राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब- सबसे बड़ी प्रेरणा यही रही कि लोगों के दुख-दर्द और परेशानियों में उनके साथ खड़ा रहूं। जिन लोगों ने हमें पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ाया, उनके लिए और अपने लोगों के लिए कुछ कर सकूं। लोगों की सेवा करना ही राजनीति में आने की मेरी सबसे बड़ी वजह है। सवाल- 2016-17 में आपको सपा में राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। अब दोबारा पार्टी में आने के बाद संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है? जवाब- मैं किसी पद की उम्मीद लेकर पार्टी में नहीं आया हूं। पार्टी मुझे जिस लायक समझेगी और जो जिम्मेदारी देगी, उसे पूरी ईमानदारी और मजबूती से निभाऊंगा। सवाल- 2027 में शायान मसूद की भूमिका क्या होगी- उम्मीदवार, संगठनकर्ता या अखिलेश यादव के लिए पश्चिमी यूपी का नया चेहरा? जवाब- मैं तीनों भूमिकाओं के लिए तैयार हूं। उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करूंगा और पश्चिमी यूपी में संगठन को मजबूत करूंगा। सबसे बड़ी बात, अखिलेश यादव के हाथों को मजबूत करना है। उनकी बाजू बनकर पूरी मजबूती से काम करूंगा। अब जानिए कौन हैं शायान मसूद… शायान मसूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शॉटगन शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2009 से 2013 तक भारतीय राष्ट्रीय शॉटगन शूटिंग टीम के सदस्य रहे। इसी दौरान कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए। उनकी खेल उपलब्धियों में 2012 एशियन शॉटगन चैंपियनशिप, दोहा में जीता स्वर्ण पदक प्रमुख है। वह तीन बार जूनियर गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। खेल के बाद साल- 2014 से उन्होंने राजनीति में कदम रखा। शायान मसूद को 2016-17 में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। अब पढ़िए शायान मसूद ने क्यों कांग्रेस छोड़ी? बेहट सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे शायान राजनीतिक गलियारे में लंबे समय से चर्चा थी कि शायान मसूद 2027 में बेहट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी वह इमरान मसूद के समर्थन में सक्रिय रहे थे। चुनाव के बाद सहारनपुर में लोगों की समस्याएं सुनने और अधिकारियों से संपर्क करने में भी उनकी सक्रियता नजर आई थी। इमरान मसूद के अंबाला रोड स्थित कार्यालय में भी शायान की मौजूदगी रहती थी। इमरान ने कहा था- परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा दरअसल, कुछ समय पहले इमरान मसूद ने कहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। लोकसभा चुनाव में मेहनत करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव में मौका मिलना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी बयान के बाद शायान ने कांग्रेस छोड़कर सपा ज्वाइन कर ली। जुलाई से ही सपा में जाने को तैयार थे शायान शायान मसूद के सपा नेतृत्व के संपर्क में होने की चर्चा जुलाई महीने से चल रही थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात भी हुई थी। इसके बाद उनके जल्द सपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। रशीद मसूद ने भतीजे इमरान को दी सियासी पहचान, फिर रास्ते अलग हुए काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद का राजनीतिक रिश्ता कभी बेहद मजबूत था। इमरान ने अपनी शुरुआती राजनीति चाचा रशीद मसूद की छाया में ही आगे बढ़ाई। 2007 में मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर सपा के तत्कालीन मंत्री जगदीश राणा को हराया। इसके बाद इमरान का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर नकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और करीब 85 हजार वोट हासिल किए। लेकिन, चुनाव हार गए। यहीं से काजी परिवार के भीतर अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई की जमीन तैयार होने लगी। इमरान और काजी रशीद मसूद की राजनीतिक राहें अलग हो गईं। इमरान कांग्रेस में ही रहे, जबकि रशीद मसूद दोबारा सपा के साथ हो गए। 2014 बना सियासी दूरी का साल 2014 का लोकसभा चुनाव काजी परिवार की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जाता है। सपा ने सहारनपुर लोकसभा सीट पर इमरान मसूद को टिकट देने का फैसला किया था, लेकिन इससे पहले वह पार्टी छोड़ चुके थे। इसके बाद सपा ने काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को टिकट दे दिया। इमरान ने यह चुनाव कांग्रेस से लड़ा। एक ही परिवार के दो चेहरे अलग-अलग पार्टी से आमने-सामने हो गए। नतीजा भी इस पारिवारिक सियासी मुकाबले की तस्वीर बताने वाला रहा। इमरान दूसरे नंबर पर रहे, जबकि शाजान चौथे नंबर पर। इस चुनाव के बाद परिवार की राजनीतिक दूरी और गहरी हो गई। यहीं से सवाल उठा कि काजी रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी कौन होगा? उनका बेटा शाजान या वो भतीजा, जिसे उन्होंने खुद लंबे समय तक सियासी जमीन तैयार करके दी थी? रशीद मसूद के निधन के बाद बेटे शाजान के सामने नई चुनाती आई 5 अक्टूबर, 2020 को काजी रशीद मसूद के निधन के बाद परिवार की सियासी तस्वीर और बदल गई। रशीद मसूद के बेटे शाजान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने की रही। यहीं से परिवार के भीतर एक नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई देने लगी। दूसरी तरफ, इमरान मसूद अपनी राजनीति को लगातार विस्तार देते रहे। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने सहारनपुर की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। जिले की राजनीति में उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली मानी जाती रही कि कई विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरणों में भी उनका प्रभाव चर्चा में रहा। इस तरह एक ही परिवार के 2 राजनीतिक केंद्र बन गए। एक तरफ रशीद मसूद के वारिस के तौर पर शाजान मसूद और दूसरी तरफ अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना चुके इमरान मसूद। इमरान के जुड़वां भाई नोमान को हर बार हार मिली काजी परिवार की इस राजनीतिक कहानी में इमरान मसूद के जुड़वां भाई नोमान मसूद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नोमान ने भी चुनावी राजनीति में कई बार अपनी किस्मत आजमाई। 2017 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर गंगोह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर पर रहे। 2019 का उपचुनाव भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। बाद में 2022 में उन्होंने बसपा के टिकट पर भी इसी सीट से चुनाव लड़ा और हार गए। यानी परिवार की राजनीति में नोमान भी लगातार अपनी सियासी जमीन तलाशते रहे हैं। सियासत में काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की एंट्री काजी परिवार की सियासत में अब तीसरी पीढ़ी की एंट्री ने कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। शाजान मसूद के बेटे शायान मसूद ने 20 अगस्त को कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। उन्हें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी में शामिल कराया। शायान के सपा में जाने के बाद उन्होंने अपने ससुर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की राजनीति से असहमति जताई। शायान का कहना था कि अगर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़नी है, तो भाजपा के खिलाफ बोलना होगा। उनका आरोप था कि इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव के खिलाफ बोल रहे हैं। इससे भाजपा को फायदा पहुंचता है। इसी राजनीतिक मतभेद को उन्होंने इमरान से अलग होने की वजह बताई। राजनीतिक तौर पर देखें, तो शायान का सपा में जाना महज पार्टी बदलना नहीं है। यह काजी परिवार की तीसरी पीढ़ी की अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश है। भतीजा बोला- शायान ने बहन से ज्यादती की, मारपीट कर घर से निकाला काजी परिवार की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि राजनीति और रिश्तेदारी लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते रहे हैं। शायान मसूद का रिश्ता इमरान मसूद की बेटी सुबिया मसूद से हुआ। लेकिन, यही पारिवारिक रिश्ता आगे चलकर राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बन गया। शायान मसूद के सपा में शामिल होने के बाद विवाद केवल राजनीतिक नहीं रहा। इमरान मसूद के परिवार की ओर से भतीजे हमजा नोमान मसूद ने फेसबुक लाइव के जरिए कई गंभीर आरोप लगाए। हमजा ने अपने बहनोई शायान मसूद और उनके पिता पर बहन से मारपीट कर घर से निकालने का आरोप लगाया। कहा- परिवार करीब 5 साल से कई बातें चुपचाप सहन कर रहा था। लेकिन, बहन के साथ ज्यादती किए जाने के बाद अब चुप रहना संभव नहीं है। हालांकि, इन आरोपों पर शायान मसूद ने भी सोशल मीडिया पर लाइव आकर पलटवार किया। कहा- अगर राजनीतिक लड़ाई है, तो राजनीतिक मैदान में आकर लड़ना चाहिए। उन्होंने निजी पारिवारिक बातों को सार्वजनिक करने पर आपत्ति जताई। कहा कि उनके पास भी जवाब देने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन वह परिवार की निजी बातें सार्वजनिक नहीं करना चाहते। ---------------
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