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    SRN डिवाइस क्लोजर तकनीक से सफल ऑपरेशन:डॉ ऋषिका पटेल बोलीं-30 मिनट में दूरबीन से बंद हुआ 14 मिमी का एएसडी छेद

    2 hours ago

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    प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ने पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी में 7 वर्षीय देवांश साहू के हृदय में 14 मिमी के जन्मजात ASD छेद को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के डिवाइस क्लोजर तकनीक से सफलतापूर्वक बंद किया गया था। यह मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया शहर में किसी बाल रोगी पर पहली बार की गई। सर्जरी करने वाली पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ ऋषिका पटेल दैनिक भास्कर से ऑपरेशन के बारे में बातचीत की। उन्होंने बताया कि बच्चे को तीन-चार साल से सांस फूलने की शिकायत थी। जो इतनी बढ़ गई थी कि वह सहज खेल-कूद न कर पाता था और स्कूल जाना भी मुश्किल हो गया। 2डी इको टेस्ट से पता लगाया कि बच्चे के दिल में 20 एमएम का एएसडी (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) छेद हैञ साथ ही दाहिने हिस्से के चैंबर्स डाइलेटेड थे। दूरबीन से 30 मिनट में छेद बंद एसआरएन अस्पताल में कैथेटर (दूरबीन) के जरिए ASD क्लोजर डिवाइस लगाकर छेद बंद किया जो ड्रम के आकार का होता है। पूरी प्रक्रिया इको से लेकर समापन तक महज आधा घंटा चली बच्चा पूरी तरह स्थिर रहा। दूसरे दिन ही डिस्चार्ज कर दिया गया। इको में छेद पूरी तरह बंद पाया गया। सात-आठ दिनों में सांस फूलने की दिक्कत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। साथ ही फॉलो-अप से चैंबर्स नॉर्मल होंगे। कंजेनिटल हार्ट डिसीज जन्मजात समस्या डॉ. ऋषिका पटेल ने बताया ये कंजेनिटल हार्ट डिसीज है जो जन्मजात होती है। भ्रूण में दिल का छेद सामान्य है जो जन्म के बाद बंद हो जाता है, लेकिन कुछ बच्चों में स्थायी रहता है।" 8 एमएम से बड़े छेद, डाइलेशन और लक्षणों (सांस फूलना, धड़कन) पर तुरंत बंद करना जरूरी है, वरना भविष्य में सर्जरी असंभव हो सकती है। जितनी जल्दी डायग्नोसिस और हस्तक्षेप, उतना बेहतर। कुछ ही बच्चों को होती है ये समस्या डॉ. ऋषिका पटेल के अनुसार बच्चों में दिल के छेद दो-तीन प्रकार के होते हैं। जिसमें ASD 2-3 प्रतिशत में पाया जाता है। अगर लक्षण दिखें तो तुरंत कार्डियक जांच कराएं। एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) एक सामान्य जन्मजात हृदय दोष है जिसमें हृदय के ऊपरी कक्षों को अलग करने वाली दीवार (सेप्टम) में एक छेद होता है। जिससे ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त आपस में मिल जाते हैं। बच्चों में अक्सर इसके कोई लक्षण नहीं दिखते लेकिन बड़े दोषों के कारण थकान, सांस लेने में तकलीफ, विकास में रुकावट और बार-बार फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है। हालांकि कई छोटे दोष अपने आप ठीक हो जाते हैं लेकिन गंभीर मामलों में फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप (Pulmonary hypertension) या हृदय विफलता जैसी दीर्घकालिक जटिलताओं को रोकने के लिए कैथेटर या शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।
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