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    तिहाड़ से रिहा होने के बाद शाहजहांपुर पहुंचे राजपाल यादव:बोले- जेलों को भी अपग्रेड करने की जरूरत, हर सुधार गृह में हो स्मोकिंग एरिया

    2 hours ago

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    राजपाल यादव तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद बुधवार को शाहजहांपुर पहुंचे। यहां परिवार और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार, कानून व्यवस्था और धूम्रपान को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। राजपाल यादव ने कहा कि देश में जब हर व्यवस्था अपग्रेड हो रही है तो हमारी जेलों को भी अपग्रेड किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हर सुधार गृह में एक या दो धूम्रपान क्षेत्र निर्धारित होने चाहिए, ताकि धूम्रपान करने वाले और अन्य लोग अलग-अलग रहें और किसी को अनावश्यक रूप से इसके संपर्क में न आना पड़े। उन्होंने कहा, हम स्मोकिंग को प्रमोट नहीं कर रहे हैं, लेकिन जब देश में इसकी बिक्री होती है और इसका कारोबार चलता है, तो सुधार गृहों में भी इसके लिए अलग स्थान होना चाहिए। हम खुद भी धूम्रपान के शिकार हैं, बहुत कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पूरी तरह छोड़ नहीं पाए हैं। जेल अवधि को बताया ‘चिंतन शिविर’ राजपाल यादव ने अपनी तिहाड़ जेल की अवधि को “चिंतन शिविर” करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और कानून से बड़ा कोई नहीं है। कानून में सजा का प्रावधान है, लेकिन कैदियों के आचरण, व्यवहार और संस्कार को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के कम से कम 10 प्रतिशत कैदियों- खासतौर पर वे जो अदालतों के चक्कर नहीं लगा पा रहे या सजायाफ्ता हैं। उन्हें जीवन में सुधार का एक अवसर दिया जाना चाहिए। घृणा पाप से करो, पापी से नहीं राजपाल यादव ने कहा कि यदि किसी से एक बार गलती हो गई है, तो ऐसे हजारों लोग हैं जिन्हें समाज में दोबारा मौका देकर सकारात्मक ऊर्जा दी जा सकती है। “घृणा पाप से करो, पापी से नहीं,” कहते हुए उन्होंने प्रशासन और केंद्र सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुहिम में वे किसी भी मंच पर योगदान देने को तैयार हैं। 600 करोड़ लोग नाम से जानते हैं अभिनेता ने उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने प्रत्यक्ष या सोशल मीडिया के माध्यम से उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशंसक पूरे विश्व में हैं और 800 करोड़ की आबादी में से 600 करोड़ लोग उन्हें नाम से जानते हैं। खुद को भारतीय सिनेमा का जिम्मेदार अभिनेता बताते हुए उन्होंने कहा कि वे कॉमेडी, गंभीर और विविध भूमिकाएं निभाने में सक्षम हैं। कला को विज्ञान बताते हुए उन्होंने कहा कि वे विज्ञान के विद्यार्थी भी रहे हैं। उनके लिए खेती-बाड़ी हमेशा ‘आटा, दाल, चावल’ रही है और अपने गांव से उनका बचपन का गहरा नाता है। उन्होंने कहा, कला को जीने की भूख ही मेरा आटा है। पिछले 30 साल में मुझे काम ढूंढना नहीं पड़ा, क्योंकि मैं काम को जीता हूं। जब तक शरीर में सांस है, आशीर्वाद और सबका साथ मिलता रहेगा।
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