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    Tamil Nadu और पुडुचेरी की 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में 80% से ज्यादा वोटिंग

    5 hours ago

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    (फोटो के साथ) चेन्नई, छह अक्टूबर तमिलनाडु की दो और पुडुचेरी विधानसभा की एक सीट पर मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। तीनों सीट पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। इन उपचुनावों को तमिलनाडु में टीवीके और पुडुचेरी में एआईएनआरसी के नेतृत्व वाली सरकारों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।हालांकि, इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों की तुलना में तमिलनाडु और पुडुचेरी दोनों में मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों के लिए क्रमश: 86.26 प्रतिशत और 80.30 प्रतिशत मतदान हुआ। एक अधिकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में मदुरांतकम और धारापुरम में क्रमश: 92.28 प्रतिशत और 88.92 प्रतिशत मतदान हुआ था।उपचुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली चार महीने पुरानी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के प्रति जनता की धारणा का पैमाना होंगे। विजय ने इस चुनावी मुकाबले में काफी दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक जनसभा को संबोधित किया और मदुरांतकम तथा धारापुरम में व्यापक रोड शो किए।पुडुचेरी की तत्तांचावडी विधानसभा सीट पर 80.81 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि इस साल अप्रैल में यहां 87.20 प्रतिशत मतदान हुआ था। केंद्र शासित प्रदेश में उपचुनाव को मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली चार महीने पुरानी राजग सरकार की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। तत्तांचावडी से रंगासामी के इस्तीफा देने के कारण उपचुनाव कराना जरूरी हुआ।सुबह से ही लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों पर उत्साह के साथ पहुंचे। दोपहर में मतदान की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी लेकिन बाद में फिर तेजी आई। मदुरांतकम से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उम्मीदवार पी. सुगंती ने संवाददाताओं से कहा कि चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में युवाओं की भागीदारी स्पष्ट रूप से कम रही।सुबह सात बजे शुरू हुआ मतदान शाम छह बजे समाप्त हुआ और यह शांतिपूर्ण रहा। कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में आई मामूली तकनीकी दिक्कतों को अधिकारियों ने तुरंत दूर कर दिया। तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से करीब 9,000 कर्मियों को तैनात किया गया था।मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम को सील कर शैक्षणिक संस्थानों में बनाए गए स्ट्रांग रूम में ले जाया गया। मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम-वीवीपैट उपकरणों में आई मामूली तकनीकी दिक्कतों को अधिकारियों ने तुरंत दूर कर दिया।मदुरांतकम में 27 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में सत्तारूढ़ टीवीके की मरगाथम कुमारवेल, द्रमुक के आई. पारंथामेन, अन्नाद्रमुक की कनिथा संपत, माकपा की पी. सुगंती और नाम तमिलर काची (एनटीके) के जानकीरमन शामिल हैं। धारापुरम में कुल 22 उम्मीदवार मैदान में हैं।प्रमुख उम्मीदवारों में पी. सत्यबामा (टीवीके), एस. सुगन्या (द्रमुक), के. भानुमति (अन्नाद्रमुक), पी. लक्ष्मणन (भाकपा) और एम. कार्तिका (एनटीके) शामिल हैं। तत्तांचावडी में कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला सत्तारूढ़ एआईएनआरसी नीत राजग, कांग्रेस और उसकी पूर्व सहयोगी द्रमुक के बीच त्रिकोणीय माना जा रहा है। उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री विजय, द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने जोरदार प्रचार किया।आम तौर पर उपचुनावों से पहले ऐसा प्रचार देखने को नहीं मिलता। मई में सरकार बनने के बाद ये विजय के नेतृत्व वाली अल्पमत टीवीके सरकार की पहली चुनावी परीक्षा है। बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए उसके लिए जीत महत्वपूर्ण है।उपचुनाव के नतीजे मुख्य विपक्षी द्रमुक के लिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लंबे समय बाद स्टालिन के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और वाम दलों समेत अपने पूर्व सहयोगियों के समर्थन के बिना पहली बार चुनाव का सामना कर रही है। टीवीके ने कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन तथा वाम दलों के बाहर से मिले समर्थन से पहली बार सरकार बनाई थी। वाम मोर्चा टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन या सरकार में शामिल नहीं हुआ था।उसने कई मुद्दों पर अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की और उपचुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे। भाकपा और माकपा के पास चार विधायक हैं। दोनों दलों ने बार-बार कहा है कि वे बाहर से सरकार को समर्थन जारी रखेंगे।हालांकि, टीवीके और उसके शासन के मॉडल की लगातार आलोचना किए जाने से करीब पांच महीने पुरानी नयी सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल उठे हैं। अन्नाद्रमुक ने तीन दशक से अधिक समय तक तमिलनाडु में शासन किया है, पर चुनावी वापसी करने का भारी दबाव है। टीवीके की जीत से उसे यह दावा करने का मौका मिलेगा कि जनादेश भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता और कई कल्याणकारी उपायों वाली उसकी सुशासन व्यवस्था का समर्थन है।तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों के इस्तीफे के बाद सात सीटें रिक्त हुई थीं। मुख्यमंत्री विजय ने पेरम्बूर सीट बरकरार रखी और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) सीट से इस्तीफा दिया। वहीं, अन्नाद्रमुक के मरगाथम कुमारवेल (मदुरांतकम), सत्यबामा (धारापुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई), एसाक्की सुबाया (अंबासमुद्रम), सी. विजयभास्कर (विरालिमलाई) और एम. आर. विजयभास्कर (करूर) ने अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया।वर्तमान में टीवीके के 107 विधायक (अध्यक्ष सहित), द्रमुक के 59, अन्नाद्रमुक के 41, कांग्रेस के पांच, पीएमके के चार, भाकपा और माकपा के दो-दो, वीसीके के दो और आईयूएमएल के दो विधायक हैं। भाजपा, डीएमडीके और एएमएमके का एक-एक विधायक है। सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 227 है।निर्वाचन आयोग ने मदुरांतकम और धारापुरम के लिए उपचुनाव की घोषणा की थी क्योंकि विधायकों के इस्तीफे और इससे जुड़े मामले मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित थे।
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