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    तिरंगा यात्रा में छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, जांच शुरू:देवरिया में एक ही स्कूल की छात्राओं के बीमार होने पर सवाल, तीन का चल रहा इलाज

    1 hour ago

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    देवरिया में गुरुवार को तिरंगा यात्रा के दौरान छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज से निकली इस यात्रा में जिले के कई विद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल थे। तेज धूप और उमस के कारण बड़ी संख्या में छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, लगभग 40 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि तीन छात्राओं का अभी भी उपचार जारी है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके श्रीवास्तव ने बताया कि छात्राओं में डिहाइड्रेशन की स्थिति पाई गई थी। शिक्षा विभाग ने छात्राओं के बीमार पड़ने के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि यात्रा में शामिल अन्य स्कूलों की तुलना में एक ही स्कूल की छात्राओं की तबीयत ज्यादा क्यों बिगड़ी। विभाग की टीम छात्राओं से बातचीत कर रही है और विद्यालय में पीने के पानी की उपलब्धता तथा गुणवत्ता की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि तिरंगा यात्रा के दौरान बच्चों के लिए पेयजल, विश्राम और चिकित्सा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त थीं या नहीं। विभागीय अधिकारी आयोजन से जुड़े स्कूलों और जिम्मेदार शिक्षकों से भी जानकारी एकत्र कर रहे हैं। छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही छात्राओं की तबीयत खराब होने की मुख्य वजह स्पष्ट हो सकेगी। कई स्कूल शामिल, फिर एक ही स्कूल की छात्राएं ज्यादा बीमार क्यों? तिरंगा यात्रा में जिले के पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज समेत अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था। यात्रा के दौरान मौसम गर्म और उमस भरा था। इसके बावजूद सबसे ज्यादा छात्राओं की तबीयत एक ही स्कूल से खराब होने की बात सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इस पहलू को जांच में शामिल किया है। विभागीय टीम छात्राओं से सीधे बातचीत कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि यात्रा से पहले उन्होंने क्या खाया-पीया था, विद्यालय से निकलने से पहले पानी की व्यवस्था कैसी थी और यात्रा के दौरान उन्हें पर्याप्त पानी मिला या नहीं। अधिकारियों की नजर स्कूल में उपलब्ध पेयजल व्यवस्था पर भी है। विद्यालय में बच्चों के लिए पीने का पानी कहां से उपलब्ध कराया जाता है, पानी की पर्याप्तता क्या थी और यात्रा के दौरान छात्राओं को पानी उपलब्ध कराया गया या नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय घटना के कारणों की तथ्यात्मक जानकारी जुटाना है। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी या लापरवाही को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। मेडिकल कॉलेज में 40 छात्राएं भर्ती, तीन का इलाज जारी तिरंगा यात्रा के बाद छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की इमरजेंसी में लाया गया। मेडिकल कॉलेज में करीब 40 छात्राओं को भर्ती कर उपचार दिया गया। चिकित्सकों ने छात्राओं की स्थिति की जांच की। जिन छात्राओं की हालत प्राथमिक उपचार के बाद ठीक हो गई, उन्हें इमरजेंसी से छुट्टी दे दी गई। वहीं तीन छात्राओं को अभी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रखा गया है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके श्रीवास्तव ने बताया कि छात्राओं में डिहाइड्रेशन की स्थिति मिली थी। गर्मी और उमस के बीच लंबे समय तक बाहर रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चिकित्सकों ने इसी आधार पर छात्राओं का उपचार किया और उनकी स्थिति पर निगरानी रखी। अस्पताल पहुंची छात्राओं के परिजनों को भी उनकी स्थिति की जानकारी दी गई। फिलहाल भर्ती छात्राओं का इलाज चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। शिक्षा विभाग छात्राओं से कर रहा बातचीत घटना की वजह जानने के लिए शिक्षा विभाग ने छात्राओं से बातचीत शुरू कर दी है। अधिकारियों की ओर से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि तिरंगा यात्रा में शामिल होने से पहले और यात्रा के दौरान छात्राओं की दिनचर्या कैसी रही। जांच में यात्रा के रूट, समय, मौसम और बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को भी देखा जा रहा है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि बच्चों को पर्याप्त पानी और आराम का अवसर मिला था या नहीं। इसके अलावा स्कूल स्तर पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। विद्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था, छात्राओं को यात्रा के लिए रवाना करने से पहले दी गई जानकारी और शिक्षकों की मौजूदगी जैसे बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है। विभागीय जांच का उद्देश्य घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। अधिकारियों का कहना है कि तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। गर्मी-उमस के बीच निकली थी तिरंगा यात्रा तिरंगा यात्रा स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए थे। यात्रा के दौरान छात्र-छात्राएं तिरंगा लेकर शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरे। इस दौरान मौसम गर्म और उमस भरा था। यात्रा के बाद छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ छात्राओं को चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। संख्या बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में उपचार की व्यवस्था की गई। घटना के बाद प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्थिति की जानकारी ली। छात्राओं के इलाज के साथ-साथ अब यह भी देखा जा रहा है कि आयोजन से पहले मौसम और विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई थीं या नहीं। शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियां क्या थीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी जिम्मेदारी छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आयोजन की तैयारियों को लेकर है। शिक्षा विभाग एक ओर छात्राओं के स्वास्थ्य की जानकारी जुटा रहा है, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा भी कर रहा है। जांच में पेयजल, चिकित्सा सुविधा, विद्यार्थियों की संख्या, यात्रा की अवधि और मौसम जैसे बिंदुओं को देखा जा रहा है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि कई स्कूलों के विद्यार्थियों के शामिल होने के बावजूद एक ही स्कूल की छात्राओं में समस्या अधिक क्यों सामने आई। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. आरके श्रीवास्तव के अनुसार छात्राओं में डिहाइड्रेशन की स्थिति मिली थी। इससे जांच में गर्मी और शरीर में पानी की कमी भी महत्वपूर्ण पहलू बन गई है। फिलहाल तीन छात्राएं मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारण और यदि कोई प्रशासनिक लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
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