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    तेरहवीं के एक दिन बाद घर पहुंचा युवक:गाजियाबाद में मिली थी लाश, परिजन ने किया था अंतिम संस्कार, बेटे को जिंदा देख मां लिपटकर रोई

    1 day ago

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    गाजियाबाद में तेरहवीं के अगले ही दिन एक युवक घर लौट आया। गुरुवार सुबह करीब 5 बजे उसने घर का दरवाजा खटखटाया। बेटे को सामने देखकर मां उसे गले लगाकर रोने लगी और बोली- बेटा, कहां थे? हम लोगों ने तो तुम्हारी तेरहवीं भी कर दी। परिजनों ने युवक से पूरी घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह कुछ भी स्पष्ट नहीं बता सका। पुलिस के मुताबिक, 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से विवाद के बाद युवक को शांति भंग के आरोप में जेल भेजा गया था। 21 मई को उसे जमानत मिल गई, लेकिन डासना जेल से रिहा होने के बाद वह घर नहीं पहुंचा। इसके बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी। 13 जून को गंग नहर में एक अज्ञात शव मिला।परिजनों ने उसकी पहचान गिरधर सिंह बिष्ट (42) के रूप में की और हत्या की आशंका जताते हुए कौशांबी थाने में हंगामा किया। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन शव को घर ले आए और अंतिम संस्कार कर दिया। बुधवार को तेरहवीं भी हुई, लेकिन अगले ही दिन गिरधर घर लौट आया। सूचना मिलने पर पुलिस उसके घर पहुंची और पूछताछ शुरू कर दी। मामला कौशांबी थाना क्षेत्र का है। 2 तस्वीरें देखिए… अब जानिए विस्तार से पूरा मामला ... कौशांबी स्थित वैशाली के कल्पना अपार्टमेंट में गिरधर सिंह बिष्ट अपनी मां के साथ रहते हैं। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिजनों के मुताबिक, गिरधर मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, जिसके कारण उनकी शादी भी नहीं हुई। 16 मई को किसी बात को लेकर उनका स्थानीय दुकानदारों से विवाद हो गया था। हंगामे के बाद पुलिस ने उन्हें शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जमानत के बाद नहीं पहुंचा घर 21 मई को गिरधर को अदालत से जमानत मिल गई और उसी दिन शाम को डासना जेल से उनकी रिहाई भी हो गई, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे। परिजनों के अनुसार, उन्हें लेने के लिए परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं गया था। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसी बीच 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में गंग नहर से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। पुलिस ने पहचान के लिए परिजनों को बुलाया। परिवार ने शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी। इसके बाद परिजन और स्थानीय लोग कौशांबी थाने पहुंच गए और पुलिस व जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर इंदिरापुरम एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया। अंतिम संस्कार के बाद लौटा युवक पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया और 24 जून को तेरहवीं का कार्यक्रम भी आयोजित किया, जिसमें रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग शामिल हुए। लेकिन 25 जून की सुबह करीब 5 बजे गिरधर अचानक घर लौट आया। जिसे मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार और तेरहवीं तक कर चुका था, उसके जीवित लौटने से पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई। मां बोलीं- जिसकी तेरहवीं की, वह कौन था? गिरधर की मां ने बताया कि उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है और वह खुद कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा- आज सुबह बेटा घर लौटा तो हम सभी हैरान रह गए। कल ही उसकी तेरहवीं की थी। बेटे के लौटने की खुशी है, लेकिन अब यह सवाल परेशान कर रहा है कि जिसका अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन था। हमें भी पहचान को लेकर कुछ संदेह था। अब पुलिस को जांच कर बताना चाहिए कि वह शव किसका था। SHO बोले- युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं मसूरी थाना प्रभारी हरेंद्र मलिक ने बताया कि युवक से पूछताछ की जा रही है। उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। वह कभी खुद को इंटेलिजेंस अधिकारी बताता है तो कभी किसी वीआईपी का नाम लेकर अपनी पहचान बताने लगता है। उन्होंने बताया कि जिस शव की पहचान परिजनों ने गिरधर के रूप में की थी, उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना पाया गया था। अब पूरे मामले की दोबारा जांच की जाएगी। -------------------- ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ अग्निकांड- बिल्डिंग से कूदे युवक के दोनों पैर सुन्न:पसलियां टूटीं, फेफड़े भी डैमेज; 7 डॉक्टर बेजान शरीर को जिंदा करने में जुटे लखनऊ अग्निकांड में जान बचाने के लिए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल से छलांग लगाने वाले जयंत गुप्ता 4 दिनों से जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं। रीढ़ की हड्‌डी में गहरी चोट के कारण कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न पड़ गया है। पढ़ें पूरी खबर…
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