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    Tarique Rahman Oath Ceremony: BNP ने दो दशक बाद बनाई सरकार, तारिक रहमान समेत 298 सांसदों ने ली शपथ

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    बांग्लादेश संसद के नए सदस्यों ने मंगलवार (17 फरवरी, 2026) की सुबह मुख्य चुनाव आयुक्त ए.एम.एम. नासिर उद्दीन के समक्ष शपथ ली। इसके बाद बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो दशकों में इस शीर्ष पद को संभालने वाले पहले पुरुष होंगे। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा को तोड़ा है, उनका शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, जमात के विपरीत, बीएनपी ने आम चुनाव के साथ आयोजित जनमत संग्रह का समर्थन करने के लिए "संविधान सुधार आयोग" के सदस्यों के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि परिषद का कोई भी प्रावधान अभी तक संविधान में शामिल नहीं किया गया है। सभी 298 सांसदों ने ली शपथबांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में सभी 298 सांसदों को पद की शपथ दिलाई। शाम 4 बजे रहमान प्रधानमंत्री और अन्य सांसद मंत्रिमंडल के मंत्री के रूप में शपथ लेंगे।35 साल बाद बांग्लादेश में पुरुष पीएम 13वें संसदीय चुनाव में दो तिहाई बहुमत से ज्यादा सीटें जीतने वाली बीएनपी नेता तारिक रहमान आज पीएम पद की शपथ ली है। इस देश में 35 साल बाद कोई पुरुष पीएम ने सत्ता संभाली है। 30-40 सदस्यों की कैबिनेटबीएनपी महासचिव हुमायू कबीर विदेश मंत्री बन सकते है, सलाहुद्दीन अहमद, डॉ. रजा किबरिया, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर समेत कई को मंत्री पद मिलने की चर्चा है।हिंदू मंत्री की भी चर्चा  पार्टी से 2 हिंदू सांसद चुने गए है। इनमें गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री पद मिल सकता है। 1200 विदेशी मेहमानभारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, भूटान के पीएम शेरिंग तोबगे, पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल समेत 1200 से ज्यादा मेहमान शपथ ग्रहण में हिस्सा लिया। क्यों है कांटो का ताजभारत समेत विदेशी रिश्तों को फिर संवारना बड़ी चुनौती होगी। अंतरिम मुखिया यूनुस ने पाकिस्तान को बहुत ज्यादा अहमियत दे दी थी। भीड़ की हिंसा पर नकेल कसनी होगी। कट्टरपंथी जमात की वजह से ऐसी हिंसा रोज होती थी। इस बार उसे अब तक की सबसे ज्यादा सीटें मिलीं। जमात ने पश्चिम बंगाल से लगते सीमांत इलाकों में बड़ी जीत हासिल की है। इन इलाकों में कट्टरपंथ तेजी से फैल रहा था। यह भारत के लिए चुनौती है। 
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