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    थाने के गेट पर आत्मदाह मामले दारोगा सस्पेंड:डिलीवरी बॉय ने परेशान होकर खुद को लगाई थी आग, SSP ने की लापरवाही पर दरोगा पर कार्यवाही

    2 hours ago

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    बरेली के थाना बारादरी के गेट पर एक डिलीवरी बॉय द्वारा खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह का प्रयास करने के मामले में एसएसपी अनुराग आर्य ने सख्त रुख अपनाया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने प्राथमिक जांच के आदेश दिए थे, जिसमें पुलिस की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता सामने आई है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए एसएसपी ने थाना बारादरी में तैनात सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह पूरी घटना पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहाँ एक पीड़ित अपनी आजीविका (बाइक) के लिए थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई करने के बजाय उसे टरकाया गया। अंततः हताश होकर युवक ने आत्मघाती कदम उठा लिया। क्या है पूरा घटनाक्रम: एक हादसे से शुरू हुई परेशानी घटना की जड़ें 23 फरवरी (सोमवार) की रात से जुड़ी हैं। फतेहगंज पश्चिमी के रहने वाले 32 वर्षीय अक्षय कश्यप, जो एक डिलीवरी बॉय हैं, गंगापुर इलाके में ऑर्डर देने गए थे। वहां उन्होंने अपनी बाइक खड़ी की थी, जिसमें चाबी लगी रह गई थी। इसी दौरान विकास सागर नाम का एक युवक उनकी बाइक लेकर भागने लगा और उसने एक अन्य व्यक्ति को टक्कर मार दी। मौके पर पहुंची बारादरी पुलिस ने दुर्घटना के बाद अक्षय की बाइक को कब्जे में लेकर थाने खड़ा करवा दिया। अक्षय के लिए उसकी बाइक सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया थी। बाइक न होने से उसका काम ठप हो गया, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया। थाने के तीन चक्कर और पुलिस की अनदेखी एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर जब एसपी सिटी मानुष पारीक ने इस मामले की जांच शुरू की, तो सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों ने पुलिस की पोल खोल दी। जांच में यह तथ्य निकलकर सामने आया कि पीड़ित अक्षय 24 फरवरी को एक बार नहीं, बल्कि कुल तीन बार मदद की गुहार लेकर थाना बारादरी गया था। वह बार-बार पुलिसकर्मियों से अपनी बाइक छोड़ने की विनती कर रहा था ताकि वह अपना काम दोबारा शुरू कर सके। लेकिन थाने में मौजूद अधिकारियों ने उसकी पीड़ा को समझने के बजाय उसे अनसुना कर दिया। इसी उपेक्षा से आहत होकर अक्षय ने रात करीब 10:30 बजे थाने के गेट पर ही खुद को आग के हवाले कर दिया। सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार शर्मा पर क्यों गिरी गाज? जांच के दौरान पाया गया कि जिस समय अक्षय थाने पहुंचा, उस वक्त सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार शर्मा 'जन शिकायत हेल्प डेस्क' पर तैनात थे। नियम के मुताबिक, हेल्प डेस्क का काम ही यह है कि वह आने वाले हर फरियादी की बात सुने, उसका प्रार्थना पत्र ले और उसे रजिस्टर में दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करे। एसएसपी की रिपोर्ट के अनुसार, सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार शर्मा ने अपने कर्तव्यों के प्रति भारी लापरवाही और उदासीनता बरती। उन्होंने अक्षय के संवेदनशील मामले को न तो गंभीरता से लिया और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसी 'ड्यूटी में लापरवाही' और 'संवेदनहीनता' के कारण एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है और विभागीय जांच एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा को सौंप दी है। अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा अक्षय वर्तमान में अक्षय कश्यप की हालत नाजुक बनी हुई है। आग की लपटों से उसका चेहरा, पेट, पीठ और हाथ बुरी तरह झुलस गए हैं। उसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने बरेली पुलिस प्रशासन को हिला कर रख दिया है। एसएसपी अनुराग आर्य ने संदेश दिया है कि जनसुनवाई में लापरवाही बरतने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है।
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