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    दुधवा के आसपास खेती का पैटर्न बदलेगा:हल्दी की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी, गन्ने के खेत में छिपना होता है आसान

    1 hour ago

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    लखीमपुर खीरी में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से सटे गांवों में अब खेती का पैटर्न बदला जाएगा। वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) की संयुक्त पहल के तहत किसानों को गन्ने की जगह हल्दी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दरअसल, दुधवा के बफर जोन और आसपास के क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ और हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है। पहले हाथियों का आना मानसून तक सीमित था, लेकिन अब वे किसी भी मौसम में गांवों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। इन घटनाओं में कई किसानों की जान भी जा चुकी है। छिपने के लिए मिलता है सुरक्षित स्थान विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने की फसल वन्यजीवों को आकर्षित करने का एक प्रमुख कारण है। गन्ने की ऊंची और घनी फसल बाघों व तेंदुओं के छिपने के लिए सुरक्षित जगह बन जाती है। वहीं, हाथी भी गन्ने की ओर आकर्षित होकर लंबे समय तक खेतों के आसपास डेरा डाले रहते हैं, जिससे कटाई या रखवाली के दौरान अचानक हमले की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कार्यशाला में दी गई जानकारी इस समस्या के समाधान के रूप में हल्दी की खेती को देखा जा रहा है। हाल ही में एक कार्यशाला में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि हाथी हल्दी की पत्तियां नहीं खाते और उसकी गंध से भी दूर रहते हैं। इसी तरह, बाघ और तेंदुए भी हल्दी की फसल में न तो छिप सकते हैं और न ही उसकी गंध पसंद करते हैं। कुछ गांव में सफल रहा प्रयोग कतर्नियाघाट क्षेत्र के कुछ गांवों में हल्दी की खेती का प्रयोग सफल रहा है। इन गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। इसी सफल मॉडल को अब दुधवा क्षेत्र में भी लागू करने की तैयारी है। वन विभाग बसंतकालीन गन्ने की बुआई के समय किसानों से संपर्क करेगा और उन्हें हल्दी की खेती के लाभों के बारे में बताएगा। यदि यह प्रयोग बड़े पैमाने पर सफल होता है, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष में काफी कमी आने की उम्मीद है। और भी फायदे होंगे किसानों की फसल सुरक्षा वन्यजीवों का जंगल में ही ठहराव जानमाल की हानि में कमी हल्दी जैसी नकदी फसल से बेहतर आमदनी की संभावना लखीमपुर खीरी में यह पहल सफल होती है तो यह मॉडल देश के अन्य टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है
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