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    देवरिया बना पशु तस्करी का ट्रांजिट कॉरिडोर:मुख्य मार्गों पर बेलगाम तस्करी, सख्ती के दावे बेअसर

    6 hours ago

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    देवरिया जिले में पशु तस्करी के खिलाफ प्रशासनिक दावों के बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर ग्रामीण संपर्क मार्गों तक तस्करों की आवाजाही लगातार जारी है। पुलिस की सक्रियता और मुठभेड़ों के बाद भी अवैध धंधा थमता नजर नहीं आ रहा। तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मवेशियों की खेप बिहार की ओर भेज रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात पिकअप और अन्य वाहनों की आवाजाही आम हो चुकी है, जिससे ग्रामीण इलाकों में असुरक्षा और अव्यवस्था का माहौल बन रहा है। प्रमुख सड़कों का तस्करों के लिए इस्तेमाल देवरिया से होकर गुजरने वाला गोरखपुर–देवरिया मुख्य मार्ग और कपरवार–बरहज मार्ग तस्करों के लिए सबसे मुफीद रास्ते बन चुके हैं। इन मार्गों पर देर रात पिकअप वाहनों के जरिए मवेशियों को सीमा पार भेजा जा रहा है। बॉर्डर पार कराने के लिए तस्कर ग्रामीण और कच्चे रास्तों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पुलिस की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। पिकअप के अलावा लग्जरी कारों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि शक कम हो और चेकिंग से बचा जा सके। सीमावर्ती क्षेत्रों में यह गतिविधि अधिक देखी जा रही है, जहां से तस्कर आसानी से बिहार की ओर निकल जाते हैं। मुठभेड़ों के बावजूद नेटवर्क सक्रिय पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बीते दो महीनों में पशु तस्करों से छह बार मुठभेड़ हो चुकी है। इन घटनाओं में कई तस्कर घायल हुए और कुछ गिरफ्तार भी किए गए, लेकिन बड़ी संख्या में आरोपी अंधेरे और स्थानीय रास्तों की जानकारी का फायदा उठाकर फरार हो गए। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कारोबार में सिर्फ स्थानीय गिरोह ही नहीं, बल्कि बाहरी जिलों के तस्कर भी सक्रिय हैं। आजमगढ़, अंबेडकरनगर और गोरखपुर के गिरोह देवरिया को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं सीमावर्ती सिवान जिले के तस्करों का भी यहां मजबूत नेटवर्क बताया जा रहा है। सूचना के बावजूद कार्रवाई पर सवाल हाल ही में एक घटना ने पुलिस की समन्वय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। दो दिन पूर्व गोरखपुर की एसओजी टीम तस्करों के दो पिकअप वाहनों की तलाश में थी। इसी दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन गुजरता दिखाई दिया, जिसका पीछा किया गया। गौरी बाजार के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें एक युवक और एक युवती की मौत हो गई, जबकि चालक घायल हो गया। बताया गया कि गोरखपुर पुलिस ने देवरिया पुलिस को पहले ही सूचना दी थी, इसके बावजूद संदिग्ध पिकअप वाहनों को जिले में कहीं रोका नहीं जा सका। इस घटना के बाद पुलिस की सतर्कता और आपसी समन्वय पर सवाल उठने लगे हैं। जिले में हुई प्रमुख पुलिस कार्रवाइयाँ हाल के महीनों में पुलिस ने कई सफल कार्रवाइयाँ भी की हैं— भाटपार रानी और बनकटा पुलिस ने 6 फरवरी को ऐंठी गांव के पास मुठभेड़ में तीन तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक के पैर में गोली लगी। श्रीरामपुर पुलिस ने प्रतापपुर चीनी मिल कॉलोनी के पास चार आरोपियों को दबोचा। देवरिया कोतवाली पुलिस ने जनवरी अंत में शहर के पास मुठभेड़ के दौरान एक तस्कर को पकड़ा, जबकि दो फरार हो गए। लार, भटनी और सलेमपुर थानों की पुलिस ने भी अलग-अलग तिथियों पर कई तस्करों को गिरफ्तार कर नेटवर्क पर चोट पहुंचाने का दावा किया। तस्करी रोकना पुलिस के लिए चुनौती लगातार हो रही गिरफ्तारियों और मुठभेड़ों के बावजूद पशु तस्करी पर रोक नहीं लग पा रही है। सीमावर्ती स्थिति, ग्रामीण रास्तों की भरमार और बाहरी गिरोहों की सक्रियता प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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