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    उन्नाव पुलिस लाइन में कार्यशाला आयोजित:नए आपराधिक कानूनों में फोरेन्सिक की भूमिका पर दिया जोर

    9 hours ago

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    उन्नाव रिजर्व पुलिस लाइन में “नए आपराधिक कानून में फोरेन्सिक की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता अपर पुलिस महानिदेशक (सेवानिवृत्त) एवं उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेन्सिक साइंस, लखनऊ के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी प्रेमचंद, सहायक पुलिस अधीक्षक संचित शर्मा, क्षेत्राधिकारी लाइंस विनी सिंह सहित जनपद के सभी थानों से आए उपनिरीक्षक, आरक्षी और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में डॉ. जी.के. गोस्वामी ने नए आपराधिक कानूनों में फोरेन्सिक विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अपराधों की जांच को अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए फोरेन्सिक साक्ष्यों का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। अब पारंपरिक साक्ष्यों के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे अपराधों की त्वरित और निष्पक्ष विवेचना संभव हो सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने की सही प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान साक्ष्य संकलन में बरती जाने वाली सावधानियां, साक्ष्यों की शुद्धता बनाए रखना, चेन ऑफ कस्टडी का पालन करना और वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि सही तरीके से संकलित साक्ष्य न्यायालय में मजबूत प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं और अपराधियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. गोस्वामी ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने “लॉ विद लैब्स” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि कानून और विज्ञान का समन्वय ही भविष्य की प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली का आधार बनेगा। उन्होंने “फोरेन्सिक जस्टिस = साइंस + लॉ” के सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि जब वैज्ञानिक जांच और कानूनी प्रक्रिया साथ मिलकर काम करती हैं, तब अपराध की सटीक जांच और दोषियों की पहचान संभव हो पाती है।
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