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    उत्तर प्रदेश अभिलेखागार में जनगणना डाक इतिहास प्रदर्शनी शुरू:जनगणना संचालन की निदेशक बोलीं-2027 में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना

    7 hours ago

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    उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार ने 'गिनती में आओ-भारत में जनगणना का डाक इतिहास' विषय पर पांच दिवसीय अभिलेख प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी का शुभारंभ किया है। यह आयोजन 24 से 28 फरवरी 2026 तक शहीद स्मृति भवन, महानगर स्थित अभिलेखागार परिसर में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में शोध, इतिहास और प्रशासन का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण उत्तर प्रदेश की निदेशक शीतल वर्मा, उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री, जनगणना उपनिदेशक एम.के. चौधरी और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के स्कूल ऑफ डेवलपमेंट से विकास कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। जनगणना के इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया प्रो. विकास कुमार ने बताया कि यह प्रदर्शनी 1951 से 2011 तक भारतीय डाक विभाग के जनगणना में योगदान को दर्शाती है।इसमें डाक टिकटों, विरूपण (कैंसिलेशन)और ऐतिहासिक पत्रों के दुर्लभ संग्रह के माध्यम से जनगणना के इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि डाक सेवा ने देश के कोने-कोने तक जनगणना का संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कथाकार वीरेंद्र सारंग ने अपने उपन्यास 'हाता रहीम' का उल्लेख करते हुए कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि इसके पीछे लाखों मानवीय चेहरों की कहानियां और संघर्ष छिपे होते हैं। उन्होंने अपने लेखन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि जनगणना समाज का दर्पण है। 2027 में देश की पहली डिजिटल जनगणना शुरू होगी मुख्य अतिथि शीतल वर्मा ने घोषणा की कि वर्ष 2027 में देश की पहली डिजिटल जनगणना शुरू होगी। इसका इंटेंट जून 2025 में जारी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रश्नावली इंटर-मिनिस्टीरियल पार्लियामेंट्री कमेटी द्वारा तैयार की जाती है, ताकि पूरे देश में समान रूप से आंकड़े एकत्र किए जा सकें। वर्मा ने यह भी बताया कि भारत की जनगणना विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभियान है, जिसमें देशभर में लगभग 30 लाख प्रगणक और अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 6 लाख प्रगणक कार्य करेंगे। द्वितीय सत्र में आयोजित कार्यशाला में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।इस अवसर पर डॉ. नम्रता, डॉ. प्रत्यूष,प्रो. अर्चना तिवारी और डॉ. शिखा चौहान सहित कई शिक्षाविद उपस्थित थे।
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