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    उत्तराखंड CM ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा न्योता:लिखा- आपके आने से दिव्य कुंभ होगा, श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा मिलेगी

    12 hours ago

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    उत्तराखंड के हरिद्वार में साल 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां राज्य सरकार ने शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कुंभ में शामिल होने के लिए पत्र भेजा है। मुख्यमंत्री की ओर से भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि आपके आगमन से आयोजन और अधिक दिव्य होगा। साथ ही, आपके आशीर्वाद से करोड़ों श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा मिलेगी। दरअसल, माघ मेले के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद वह मेला छोड़कर काशी चले गए थे। काशी पहुंचकर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी सरकार से गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने की मांग करते हुए 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। शंकराचार्य इस समय गौमाता को राज्य माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर प्रदेशभर में यात्रा निकाल रहे हैं। वह यूपी की हर विधानसभा में पहुंचते हैं और लोगों को संबोधित करते हैं। कुंभ मेलाधिकारी सोनिका ने बताया- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कुंभ मेला प्रशासन की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। हरिद्धार कुंभ में शामिल होंगे शंकराचार्य शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने कहा- कल (5 जून 2026) मुख्यमंत्री धामी की ओर से कुंभ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। हरिद्वार में होने वाले कुंभ में शंकराचार्य जी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जो प्रमाण मांगे थे, उसका जवाब उत्तराखंड सरकार ने दे दिया है। शंकराचार्य का पट्टाभिषेक श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य ने किया था। पूर्व शंकराचार्य बाकायदा वसीयत भी बना चुके थे, जो सार्वजनिक हो चुकी है। सभी उन्हें शंकराचार्य मानते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में उनसे प्रमाण मांगे थे। अब पढ़िए लेटर में क्या लिखा? चिट्ठी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगमन को बताया महत्वपूर्ण सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने पत्र में लिखा, "आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन से हिमालय की यह भूमि हमेशा धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति की रोशनी से जुड़ी रही है। बदरिकाश्रम और ज्योतिर्मठ की परंपरा पूरे देश की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2027 में हरिद्वार में होने वाला कुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का बड़ा उत्सव है। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु स्नान और संत-महात्माओं के दर्शन के लिए आएंगे। आपका आगमन केवल एक संत की मौजूदगी नहीं होगा, बल्कि सनातन परंपरा का आशीर्वाद होगा। आपके आशीर्वचन करोड़ों श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा और धर्म के प्रति नई प्रेरणा देंगे। आपकी मौजूदगी से पूरे आयोजन को आध्यात्मिक मजबूती मिलेगी। आखिर में मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि आप 2027 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ में शामिल होकर आयोजन की शोभा बढ़ाएं। पहले भी सीएम धामी भेज चुके हैं निमंत्रण हालांकि, इससे पहले 25 जनवरी को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर भी उन्हें बतौर शंकराचार्य निमंत्रण भेजा गया था। इस निमंत्रण में 8 अप्रैल को ऋषिकेश से बद्रीनाथ धाम तक निकलने वाली गाड़ू घड़ा यात्रा में शामिल होने की अपील की गई थी। इसके बाद शंकराचार्य गाड़ू घड़ा यात्रा में शामिल हुए थे। दरअसल, गाड़ू घड़ा यात्रा बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले निभाई जाने वाली प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत भी मानी जाती है। भगवान बद्री विशाल के अभिषेक और अखंड ज्योति के लिए इस्तेमाल होने वाला तिल का तेल इसी यात्रा के जरिए धाम तक पहुंचाया जाता है। अब जानिए पूरा मामला प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया था। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए थे। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आई थी। 27 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमानत मंजूर की थी। उस समय हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने फैसला सुनाया था कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। 29 मई को आशुतोष महाराज के फैसले को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग खारिज कर दी। --------------- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व विधायक को करोड़ों का फायदा पहुंचाकर मेरठ CMO फंसे:श्रावस्ती में भी NHM घोटाले का आरोप; जांच शुरू मेरठ के CMO रहे डॉ. अशोक कटारिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इसके बाद उन्हें लखनऊ के स्वास्थ्य निदेशायल में अटैच कर दिया गया है। आरोप है कि डॉ. कटारिया ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) घोटाले में फंसे पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव की कंपनियों को अवैध तरीके से करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाया है। पूरी खबर पढ़ें…
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