Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    वांगचुक बोले- विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकारें बेहतर काम करती हैं:गुस्सा जाहिर करने जगह न मिले, तो हालात नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे बन सकते हैं

    15 hours ago

    1

    0

    सोनम वांगचुक ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन सरकारों के बेहतर काम करने का बड़ा जरिया हैं। शांतिपूर्ण तरीके से गुस्सा जाहिर करने की जगह न मिले तो नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे हालात बन सकते हैं। मुंबई में शनिवार को आईपीएफ फेस्टिवल में पहुंचे वांगचुक ने भारत में संसद से दूर प्रदर्शन कराने पर सवाल उठाया। साथ ही कहा कि दुनिया के कई देशों में संसद के ठीक सामने प्रदर्शन की अनुमति होती है। वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान से मिला नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर कहा, “संदेश लाने वाले को मत मारिए, संदेश को समझिए।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष ने केंद्र सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति नहीं देने को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शन फीडबैक और दबाव का जरिया वांगचुक ने कहा कि दुनियाभर के देश जैसे ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन संसद के सामने प्रदर्शन की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहा, “सभी देशों में संसद के सामने का हिस्सा प्रदर्शन का चेहरा होता है। भारत में यह संसद से बहुत दूर था। नई दिल्ली का जंतर-मंतर भी संसद से बहुत दूर है।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने के लिए अनुमति नहीं मांगी जानी चाहिए। अनुमति का इस्तेमाल शहर में होने वाली गतिविधियों की निगरानी के लिए होना चाहिए, जैसे त्योहारों के दौरान किया जाता है। अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर सवाल वांगचुक ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि अर्धसैनिक बल गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बलों को उनके जैसे लोगों और युवाओं के खिलाफ लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए। अर्धसैनिक बलों को गृह मंत्रालय के बजाय रक्षा मंत्रालय के अधीन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में उन्होंने “सलामी स्लाइसिंग” देखी है। उनके मुताबिक, इसमें चीन धीरे-धीरे भारतीय क्षेत्र के अंदर बढ़ रहा है। वांगचुक ने दावा किया कि जब सर्दियों में अर्धसैनिक बलों को दूसरे कामों में लगाया जाता है, तो सीमा पर ध्यान कम हो जाता है। बलों के लौटने तक चीन आगे बढ़ चुका होता है। इसके बाद उसे पीछे धकेलना मुश्किल हो जाता है। लद्दाख के फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका की मांग कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह क्षेत्र कैसे चलाया जाए। उन्होंने कहा कि उपेक्षा का असर भी वहीं रहने वाले लोगों को झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा- इसी सिद्धांत के आधार पर मैं कहता हूं कि लद्दाख को यह तय करने में अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए कि लद्दाख कैसे चलाया जाए। हम मूल रूप से यही कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि फैसलों में आज के साथ बच्चों के लंबे समय के भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वहां रहने वाले लोग ही ऐसा बेहतर तरीके से कर सकते हैं। सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। उन्हें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत रखा गया था। इस साल मार्च में उन्हें रिहा किया गया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    खबर हटके- मूंछों के साथ जन्मा बच्चा:₹7 के टिकट से ₹1 करोड़ जीती महिला; हैंडपंप से निकल रहा फव्वारा
    Next Article
    जगन रेड्डी बोले-येलहंका पैलेस में भांजी की शादी संभव नहीं:बहन शर्मिला को चिट्‌ठी लिखकर इनकार किया; CM नायडू ने कंस से तुलना की

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment