Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    वाइट स्वान फेस्टिवल में कला-संस्कृति पर संवाद:लखनऊ में रिस्पॉन्सिबल म्यूजिक, डांस और आर्ट पर चर्चा

    2 hours ago

    1

    0

    लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मेट्रो ऑडिटोरियम में वाइट स्वान आर्ट संस्था द्वारा 'वाइट स्वान फेस्टिवल' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कला, संस्कृति और सतत विकास पर सार्थक संवाद हुआ। 'रिस्पॉन्सिबल म्यूजिक', 'रिस्पॉन्सिबल डांस' और 'रिस्पॉन्सिबल आर्ट एंड सस्टेनेबल पहनावा' की अवधारणाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संस्कृति में कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसमें समाज को दिशा देने और सकारात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति है। कार्यक्रम में भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित विचारों का आदान-प्रदान किया गया। उत्तरदायी संगीत लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाता है भारतीय परंपरा में 'नाद ब्रह्म' की अवधारणा संगीत को सृष्टि का मूल मानती है। वक्ताओं ने कहा कि उत्तरदायी संगीत लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाता है, मन को शांति देता है और समाज में संवेदनशीलता विकसित करता है। उनका मत था कि जब व्यक्ति के भीतर संतुलन और शांति होती है, तभी समाज और विश्व में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। फेस्टिवल में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा और उसके सामाजिक महत्व पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि नाट्यशास्त्र में नृत्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के प्रसार और समाज के मार्गदर्शन का सशक्त साधन माना गया है। उत्तरदायी नृत्य अनुशासन, सौंदर्य, संतुलन और आत्मिक जागरूकता का प्रतीक है, जो लोगों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ता है। कला संवाद और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा कला और सतत पहनावे के विषय पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने बताया कि भारत की प्राचीन चित्रकला और हस्तशिल्प परंपराएं हमेशा से प्रकृति और मानवता के बीच संबंध को मजबूत करती रही हैं। उत्तरदायी कला संवाद, सहानुभूति और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देती है, जबकि सस्टेनेबल पहनावा पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम्' पर आधारित रहा। वक्ताओं ने जोर दिया कि जब पूरी दुनिया एक परिवार है, तब शांति, करुणा, समावेशिता और सतत विकास हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बन जाते हैं। उन्होंने कला और संस्कृति को विश्व कल्याण तथा वैश्विक शांति का प्रभावी माध्यम बनाने का आह्वान किया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    प्रसूता की मौत पर नर्सिंग होम की ओटी सील:तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम, बिसरा सुरक्षित
    Next Article
    सरकारी भूमि पर अवैध प्लाटिंग का आरोप:सर्वे टीम की छापेमारी में भूमाफिया फरार, नोटिस चस्पा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment