Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    वक्फ बोर्ड विवाद में भोपाल के निकाह काजी का इस्तीफा:बोले- गैर मुस्लिमों को शामिल करना स्वीकार नहीं; मुफ्ती को अध्यक्ष के स्वागत पर आपत्ति

    15 hours ago

    1

    0

    मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से उपजा विवाद थम नहीं रहा है। ताजा घटनाक्रम में इस फैसले का विरोध करते हुए भोपाल में निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने इस्तीफा दे दिया है। नदवी ने बुधवार को निकाह काजी के पद के साथ ही दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र सौंपा है। उन्होंने पहला इस्तीफा शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी जबकि दूसरा दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल कलाम कासमी को भेजा। दोनों ही पत्रों में उन्होंने वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों और उनके समर्थन को अपने इस्तीफे का कारण बताया है। नदवी ने लिखा- मुझे जो जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, मैंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से उन्हें निभाने का प्रयास किया। वर्तमान परिस्थितियों में इन पदों पर बने रहना संभव नहीं रह गया है। वहीं, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के स्वागत समारोह पर मुफ्ती मोहम्मद मसरूर ने नाराजगी जताई है। बोले- धार्मिक संस्था में हमवतन भाइयों का क्या काम? दैनिक भास्कर से बातचीत में नदवी ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक और इस्लामिक संस्था है। ऐसे में इसमें गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाना उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा, "धार्मिक संस्था में हमारे हमवतन भाइयों का क्या काम है? कम से कम जिम्मेदार लोगों को इतना तो कहना चाहिए था कि यह फैसला ठीक नहीं है।" नदवी ने बताया कि उन्हें केवल गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से ही आपत्ति नहीं है, बल्कि उसके बाद हुए घटनाक्रम ने भी उन्हें आहत किया। उन्होंने कहा- भोपाल में दो दिन पहले शहर काजी की मौजूदगी में नवगठित मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल का स्वागत किया गया। जिन लोगों से इस फैसले का विरोध करने की उम्मीद थी, उन्होंने विरोध दर्ज कराने के बजाय स्वागत किया। मुफ्ती बोले- धार्मिक संस्थाओं से जुड़े फैसलों पर सवाल पूछे समाज उधर, मुफ्ती मोहम्मद मसरूर ने वीडियो संदेश जारी कर कहा- धार्मिक संस्थाओं से जुड़े जिम्मेदार लोगों द्वारा इस तरह का सार्वजनिक स्वागत मुस्लिम समाज के एक वर्ग के लिए पीड़ादायक है। उन्होंने वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटियों के नवीनीकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है और सिफारिशें मांगी जाती हैं। मसरूर ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वह धार्मिक संस्थाओं से जुड़े फैसलों को लेकर जागरूक रहे और आवश्यक सवाल पूछे। मुस्लिम त्योहार कमेटी ने किया था प्रदर्शन दरअसल, देश में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति हुई है। मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के विरोध में सोमवार को भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इन दो हिंदू सदस्यों की वक्फ बोर्ड में नियुक्ति अब जानिए, मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे विरोध? त्योहार कमेटी के संरक्षक बोले- नियुक्ति उचित नहीं ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जहां लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए वक्फ करते हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है। जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड के गठन का आरोप शमशुल हसन ने अयोध्या, सोमनाथ और मथुरा की धार्मिक संस्थाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि जब मुस्लिम समाज ने कभी उन संस्थाओं के प्रबंधन में प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की, तो वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की जरूरत क्यों महसूस की गई? शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि नए कानून के लागू होने के तुरंत बाद जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी थी, तो मुस्लिम समाज के योग्य और अनुभवी लोगों, जैसे सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी। कांग्रेस विधायक बोले- मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल करने के मामले में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी थी, जो सनवर पटेल को इतनी जल्दबाजी करनी पड़ी। मध्य प्रदेश शासन ने एक और गलती की है। दो अन्य समाज के लोगों को रखने का प्रावधान है, शासन ने तीन रख दिए। आयुक्त भी अन्य कास्ट के हैं। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… देश में पहली बार वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्य देश में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम यानी हिंदू सदस्यों की नियुक्ति हुई है। मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    नकली नोट में गांधीजी का वाटरमार्क, सिल्वर लाइन भी:एक पेपर पर छपते 500 के 5 नोट, इंडस्ट्री की तरह गैंग में प्रोडक्शन
    Next Article
    लॉरेंस पर USA में मर्डर केस, FBI अमेरिका ले जाएगी:गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर इनाम; दावा- दोनों ने कनाडा में निज्जर की हत्या कराई

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment