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    वाराणसी में 2549 जगहों पर प्रहलाद के साथ 'होलिका' विराजमान:आज शाम 5:21 बजे से लगेगी भद्रा, भोर में 4:58 पर लगेगी आग

    3 hours ago

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    वाराणसी में आज होलिका दहन का उत्साह है, शहर से लेकर देहात तक लगभग 2549 स्थानों पर होलिका दहन होगा। रविवार शाम पूजन के बीच होलिका को प्रहलाद के साथ विराजमान किया गया। अब आज रात होलिका पूजन होगा, जिसके बाद मंगलवार भोर होली जलेगी। 2549 स्थानों पर जलेगी होलिका वाराणसी। जिले भर में 2549 स्थानों पर होलिका दहन होगा। काशी जोन में 735 स्थानों पर, वरुणा जोन में 949 और गोमती जोन में 865 स्थानों पर होलिका लगी है। वहीं तीन स्थानों पर मटका फोड़ होली खेली जाएगी। चेतगंज में दो और आदमपुर में एक जगह मटका फोड़ होली का आयोजन है। होली के दिन कुल 17 जुलूस निकाले जाएंगे। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरि मीना ने बताया कि आयोजनों को लेकर समुचित सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। पंचांगों में रंग खेलने का दिन चार मार्च काशी के सभी पंचांगों में होलिका दहन का दिन दो मार्च और रंग खेलने का दिन चार मार्च निर्दिष्ट किया गया है। यह स्थिति तीन मार्च को चंद्रग्रहण के कारण बन रही है। भृगुसंहिता विशेषज्ञ पं.वेदमूर्ति शास्त्री ने बताया कि भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित है। वहीं पुच्छ की भद्रा में होलिका दहन की छूट दी गई है। उन्होंने बताया कि विश्व पंचांग के अनुसार दो मार्च की शाम 05:21 बजे भद्रा आरंभ होगा। वहीं हृषिकेष पंचांग के अनुसार भद्रा दो मार्च की शाम 05:18 मिनट पर आरंभ होगा। इन दोनों पंचांगों में भद्रा समाप्ति का समय क्रमश: तीन मार्च की भोर में 04:58 और 04:56 बजे बताया गया है। इस आधार पर पुच्छ की भद्रा दो मार्च की रात्रि 12:50 से रात्रि 01:00 बजे के मध्य आरंभ हो जाएगी। जो लोग पुच्छ की भद्रा में होलिका दहन करना चाहते हैं वे रात्रि एक बजे के बाद कभी भी कर सकते हैं। जो लोग भद्रा समाप्त होने के बाद होलिका दहन करना चाहते हैं वे तीन मार्च की भोर में पांच बजे होलिका दहन कर सकते हैं। धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु जैसे सर्वमान्य ग्रंथों में भी पुच्छभद्रा काल में होलिका दहन करने का उल्लेख किया गया है। श्री शास्त्री ने बताया कि तीन मार्च को चंद्रग्रहण का सूतक काल सुबह 06:20 बजे से लग जाएगा जो सायंकाल ग्रहण के मोक्ष के साथ समाप्त होगा। होलिका दहन के बाद धुरड्डी मनाने के बाद लोग मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं। तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण सभी मंदिरों के पट बंद रहेंगे। ऐसी स्थिति में रंगोत्सव का आयोजन चार मार्च को ही शास्त्र सम्मत है।
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