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    वाराणसी में बेटे-बहू ने 24 घंटे लाश नहीं उठाने दी:बोले- मां रास्ते के लिए 2 साल दर-दर भटकीं, घर से बेटियों की शादी तक नहीं कर पाईं

    5 hours ago

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    'पड़ोसी ने 2 साल पहले हमारे घर का रास्ता जबरदस्ती बंद कर दिया। सास रास्ता खुलवाने के लिए अधिकारियों के पास करीब 100 बार गईं। लेकिन, किसी ने नहीं सुनी। तीन ननद की शादी सिर्फ इसलिए इस घर से नहीं हो सकी, क्योंकि आने-जाने का रास्ता नहीं था। सास इस अफसोस में घुट रही थीं। आखिरकार उन्होंने खुदकुशी कर ली।' यह दर्द है कि वाराणसी की रहने वाली दीक्षा उपाध्याय का। उनकी 50 साल की सास कविता ने गुरुवार को टॉयलेट में फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस पहुंची तो परिवार ने करीब 24 घंटे तक लाश नहीं उठाने दी। बहू दीक्षा ने कहा, सास की मौत के बाद अब प्रशासन हमें आश्वासन दे रहा है। लेकिन अब आश्वासन लेकर क्या करेंगे? दैनिक भास्कर ने कविता की आत्महत्या के कारण और अंतिम समय में उन्होंने क्या बात की थी, जानने के लिए बहू और जेठानी से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… 3 तस्वीरें देखिए… पहले घटना जानिए… कविता उपाध्याय का घर वाराणसी में पिंडरा तहसील इलाके के अहरक खास गांव में है। बुधवार शाम करीब 7 बजे उन्होंने टॉयलेट में फांसी लगा ली। जब बेटे विशाल ने टॉयलेट का दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही, तो परिजन ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "हमारे रास्ते पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। जब रास्ता ही नहीं है, तो शव किस रास्ते से लेकर जाएंगे? पहले विवाद का निपटारा हो, उसके बाद ही शव को पोस्टमॉर्टम या अंतिम संस्कार के लिए ले जाने देंगे।" अफसरों ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया। कार्रवाई के साथ रास्ता दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तैयार हुए। अब पढ़िए बहू का दर्द… 'प्रेग्नेंसी में जाना पड़ा मायके' कविता की बहू दीक्षा ने बताया- मैं 6 महीने की गर्भवती थी। मैं अधिकारियों के पास गई और गुहार लगाई कि रास्ता दिलवा दीजिए, लेकिन रास्ता नहीं मिला। ऐसे में डिलीवरी के समय मुझे मायके जाना पड़ा। रास्ता नहीं होने से घर की तीन बेटियों और एक भतीजी की शादी भी घर से नहीं हो पाई। शादी बाहर से की गई। घर पर चार पहिया वाहन छोड़िए, बाइक भी नहीं आ पाती है। घर के जो भी लोग काम करने जाते हैं, वह दूसरे के घर वाहन खड़ा करके आते-जाते हैं। आत्महत्या करने के बाद जागे अधिकारी दीक्षा ने बताया- हम लोगों ने बड़ागांव थाने की पुलिस और DM-SDM से शिकायत की थी। कई बार विवाद हुआ। विवाद के बाद पुलिस मौके पर आती। हमें थाने बुलाया जाता। अधिकारी मौके पर पहुंचकर रास्ता दिलवाने और विवाद का निस्तारण की बात कहकर चले जाते थे। लेकिन निस्तारण नहीं हो पाया। अब आत्महत्या करने के बाद अधिकारी मौके पर आए हैं। यदि अधिकारी पहले ही मौके पर आए होते तो मेरी सास आज जिंदा होती। जेठानी ने कहा- कविता कह रही थी रास्ता नहीं मिला तो दे दूंगी जान कविता की जेठानी राजवंती देवी ने बताया- मेरी देवरानी कविता रास्ते को लेकर काफी समय से परेशान रहती थी। वह तीन दिनों से जान देने की बात कह रही थी। कई बार हम लोगों ने समझाया कि जब जान देने के बाद रास्ता बनेगा तो फिर ऐसे रास्ते को बनवाने से क्या फायदा। राजवंती ने बताया - इस मामले को लेकर वह खुद परिवार के लोगों के साथ कई बार एसडीएम कार्यालय पहुंचीं, पुलिस के पास भी पहुंची, लेकिन हर जगह से केवल आश्वासन मिलता रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक बार इस मामले को लेकर परिवार के साथ वह पिंडरा की पूर्व एसडीएम प्रतिभा मिश्रा के पास पहुंची थीं। इस दौरान एसडीएम पिंडरा ने चरित्र पर लांछन लगाते हुए उनको डांट फटकार लगाया गया। रास्ते के लिए परिवार को तमाम जलालत झेलनी पड़ी, लेकिन रास्ता नहीं मिला। अब विवाद भी समझ लीजिए अहरक गांव में संतोष उपाध्याय का मकान है। संतोष दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। पिता लक्ष्मी नारायण उपाध्याय का काफी पहले निधन हो चुका है। बेटा विशाल MA की पढ़ाई कर रहा है। विशाल ने बताया कि घर से बाहर 6 फीट चौड़ी सरकारी जमीन थी। इसी से हमारा आना-जाना होता था। 2 साल पहले मनीष और अमित उपाध्याय के परिजनों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। चारों तरफ दीवार खड़ी कर दी। इसके बाद हमारा रास्ता बंद हो गया। विशाल ने कहा- रास्ता बंद होने से हमारे पास उस जमीन के बगल से सिर्फ दो फीट की एक गली बची। मां कविता उपाध्याय ने मामले में आखिरी शिकायत 22 जुलाई 2026 को डीएम की जनसुनवाई में की गई थी। इसमें 12 अगस्त को रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। रिपोर्ट में लिखा गया कि शिकायत सही नहीं पाई गई। तब से ही मां परेशान थीं। बीते दिन उन्होंने सुसाइड कर लिया। मां तब से काफी परेशान थी। हमने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया। लेकिन, उन्होंने एक न सुनी। अगर समय रहते अधिकारियों ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई की होती तो शायद यह नौबत नहीं आती। एसीपी पिंडरा प्रशांत सिंह ने बताया- परती वाली भूमि से जुड़ा मामला तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन है। परिजनों द्वारा तत्काल रास्ते की मांग की जा रही थी। लेकिन, जमीन भूमिधरी होने के चलते रास्ता तत्काल दिलाया जाना संभव नहीं था। परिजनों को काफी समझाया गया, बाद में शाम 7 बजे वे लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजने को तैयार हुए। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… वाराणसी में महिला ने सुसाइड किया, बेटा बोला-लाश नहीं उठाएंगे:रास्ते की विवाद की DM-SDM से 100 बार शिकायत की, अब न्याय चाहिए वाराणसी में रास्ते के विवाद से परेशान एक 50 साल की महिला ने टॉयलेट में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। जब बेटे ने शौचालय जाने के लिए दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया। पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। पढ़ें पूरी खबर…
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