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    वाराणसी में गंगा-वरूणा का बढ़ा जलस्तर:330 परिवार ने घर छोड़ा, मौसम वैज्ञानिक बोले-अब 72 घंटे बाद होगी तेज बारिश

    1 hour ago

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    वाराणसी में गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का असर लगातार गंभीर बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार सुबह गंगा के जलस्तर में गिरावट के संकेत मिले हैं, लेकिन नदी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर बह रही है। शहर के निचले इलाकों और वरुणा नदी के आसपास बसे मोहल्लों में बाढ़ का पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित है। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। सुबह वाराणसी में तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे रही और आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 6 सितंबर तक मानसूनी बादल सामान्यतः कम दिखाई देंगे, जबकि 6 सितंबर की रात से 8 सितंबर के बीच हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन खतरा बरकरार केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 70.67 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में अब गिरावट शुरू हुई है, लेकिन नदी अभी भी चेतावनी बिंदु के ऊपर बह रही है। लगातार बढ़े जलस्तर के कारण खतरे के निशान और नदी के जलस्तर के बीच का अंतर कम होता जा रहा था, जिससे प्रशासन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ गई थी। गंगा के बढ़े जलस्तर का असर सहायक नदियों वरुणा, गोमती और नाद पर भी दिखाई दे रहा है। इन नदियों के आसपास के इलाकों में पानी का दबाव बना हुआ है और कई बस्तियां बाढ़ की चपेट में हैं। वरूणा क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाते हैं - पंकज पंकज साहनी ने कहा - हम लोग इस समय नाव चलाकर वरुणा क्षेत्र में बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने का काम कर रहे हैं। जिन लोगों के घरों में पानी भर गया है या जो लोग बाढ़ के कारण अपने घरों में फंसे हुए हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। रोजाना करीब 100 से 150 लोगों को हम नाव के जरिए लाते-ले जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक लगातार हमारा यह काम चलता रहता है। इसमें कई ऐसे बच्चे भी हैं जिन्हें स्कूल जाना होता है, तो हम उन्हें स्कूल तक पहुंचाते हैं और वापस भी लाते हैं। वहीं, कई लोग अपने घरों में रखा जरूरी सामान लेने के लिए जाते हैं, उन्हें भी नाव से उनके घर तक पहुंचाया जाता है और सुरक्षित वापस लाया जाता है। हमारी कोशिश है कि बाढ़ के बीच किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को परेशानी न हो और वह सुरक्षित तरीके से अपने जरूरी काम कर सके। मारुति नगर में टूटा नाला, घरों में पहुंचा पानी गंगा के बढ़ते पानी का असर शहर के कई इलाकों में देखने को मिला। मारुति नगर में नाला टूटने से कई घरों तक पानी पहुंच गया, जिसके बाद इलाके में बिजली आपूर्ति भी बंद करनी पड़ी। लोगों को पानी के बीच दैनिक जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है। नगवा स्थित रामेश्वर मठ का भूतल पानी में डूब गया। स्थिति को देखते हुए वहां रहने वाले बटुकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है। वहीं गंगोत्री विहार के लेन नंबर एक में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग लगातार पानी बढ़ने और घरों में सामान खराब होने की चिंता में हैं। वरुणा नदी के किनारे बढ़ा बाढ़ का दायरा वरुणा नदी के बढ़ते प्रभाव के कारण बाढ़ प्रभावित मोहल्लों की संख्या 15 से बढ़कर 16 हो गई है। अब तक 330 परिवार अपने घर-मकान छोड़ चुके हैं। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। पिपरहवा घाट के किनारे स्थित मकानों में भी पानी घुस गया है। लोगों को घरों से सामान निकालने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। स्थानीय स्तर पर सर्दी, खांसी और बुखार के मामले बढ़ने की बात सामने आई है। लंबे समय तक पानी और नमी के बीच रहने से लोगों में बीमारी का खतरा बढ़ गया है।
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