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    वाराणसी में पहली बार तैयार होगा ग्रिडेड उत्सर्जन सूची:वायु गुणवत्ता सुधार के लिए पहली बार शुरू हुआ शोध, BHU के वैज्ञानिकों को मिला प्रोजेक्ट

    5 hours ago

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    काशी में पहली बार वायु की गुणवत्ता को शुद्ध करने के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने शोध शुरू किया है। इसमें विशेषज्ञ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान करेंगे। इस पूरे शोध को करने वाले डॉ. किरपा राम से दैनिक भास्कर ने बातचीत की पेश है रिपोर्ट… सवाल: इस अध्ययन की रूपरेखा क्या है? जवाब- हम लोग वाराणसी शहर के लिए इमिशन इन्वेंटरी तैयार कर रहे हैं। वाराणसी एक नॉन-अटेनमेंट सिटी है, जहां प्रदूषण का स्तर अधिक है। इस स्टडी में हम यह पहचानते हैं कि प्रदूषण किन-किन स्रोतों से आ रहा है—जैसे वाहन, उद्योग, जेनसेट, सड़क की धूल, बाहरी स्रोत और प्राकृतिक कारण। सवाल- आप डेटा कैसे एकत्र कर रहे हैं? जवाब- हमारी टीम शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर प्राइमरी डेटा कलेक्ट कर रही है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई डीजल जनरेटर चल रहा है तो हम यह देखते हैं कि वह कितने घंटे चलता है और कितना ईंधन खर्च करता है। इसी आधार पर हम उसके उत्सर्जन का अनुमान लगाते हैं। सवाल- छोटे स्रोतों को शामिल करना कितना जरूरी है? जवाब- छोटे-छोटे स्रोतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन ये भी कुल प्रदूषण में बड़ा योगदान देते हैं। इसलिए हम हर छोटे स्रोत को भी इस अध्ययन में शामिल कर रहे हैं। सवाल- इस अध्ययन से क्या लाभ होगा? जवाब- जब इमिशन इन्वेंटरी तैयार हो जाएगी, तो हमें साफ पता चल जाएगा कि सबसे ज्यादा प्रदूषण किस स्रोत से हो रहा है। इसके बाद हम उन प्रमुख स्रोतों को प्राथमिकता से नियंत्रित करने की रणनीति बना सकते हैं। सवाल - इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन शामिल हैं? जवाब- यह परियोजना डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की टीम द्वारा की जा रही है। इसके अलावा पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञ, डॉक्टर सुनीता वर्मा और डॉक्टर सरोज साहू भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। यह एक सरकारी फंडेड प्रोजेक्ट है। सवाल- यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा? जवाब- अभी प्रारंभिक सर्वे पूरा हुआ है और अगला चरण जल्द शुरू होगा। पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगभग तीन से चार महीने लगेंगे।
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