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    वाराणसी में संतों ने किया शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध:बोले - रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ टिप्पणी स्वीकार्य नहीं, शंकराचार्य कालनेमी

    4 hours ago

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    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का काशी में बुधवार को संतों ने खुलकर विरोध किया। वाराणसी के पातालपुरी मठ में जगद्गुरु बालक देवाचार्य के नेतृत्व संतों ने बैठक की और शंकराचार्य के रामानंदी समुदाय को लेकर दिए गए बयान पर विरोध किया। जगदगुरु बालकदेवाचार्य ने कहा अविमुक्तेश्वरानंद जिस तरह से रामानंदी संप्रदाय पर विवादित बयान दे रहे हैं। वह गलत है। उन्होंने कहा कि रामानंदी संप्रदाय 700 साल पुराना और उनका संप्रदाय ढाई हजार साल पुराना है ऐसे में रामानंदाचार्य को हमारे ऊपर बोलना नहीं चाहिए। यह एक तरह से संतों और सम्प्रदाय को बांटने का काम है। साथ ही उन्होंने शंकराचार्य को कालनेमि वाले बयान भी घेरा और कहा वो स्वयं कालनेमी हैं । रामानंदाचार्य जी स्वयं राम के स्वरूप उनका अपमान ठीक नहीं जगद्गुरु बालक दास ने कहा - रामानंदाचार्य स्वयं राम के स्वरूप हैं । उनके बारे में इस तरह कहना गलत है। शंकराचार्य शिव के अवतार हैं और रामानंदाचार्य राम के अवतार हैं। ऐसे में देखा जाए तो वो उनसे महान हैं। जजिया कर को हटाने का काम मेरे गुरु रामानंदाचार्य ने किया और समाज को बांधने का काम उन्होंने किया । उनके लिए ऐसा कहना गलत। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद कालनेमी जगदगुरु बालकचार्य ने कहा - दूसरा बयान शंकराचार्य ने दिया कि जो हमारे साथ नहीं खड़ा वह कालनेमी है तो क्या जो उनके साथ नहीं खड़ा वो सनातनी नहीं, धाम को नहीं मानता और कालनेमी हो गया। हमको पता है कि तुम खुद राजनीति कर रहे हो कालनेमी हो तो हम तुम्हारा साथ क्यों दें। कोई भी संत और साधू उनके साथ नहीं है। अगर कोई रामानंदी संप्रदाय का उनके साथ है उसे शायद उनके इस बयान के बारे में नहीं पता तभी वो उनके साथ है। शंकराचार्य भ्रम फैलाकर सेक रहे राजनीतिक रोटी जगदगुरु बालकचार्य ने कहा पूरे देश में वैष्णव और रामानंदी समुदाय गाय की रक्षा के लिए तत्पर है। ये भ्रम फैलाकर राजनितिक रोटी सेक रहे हैं। वो राजनितिक रोटी सकें हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। वो कुछ भी करें लेकिन सम्प्रदाय को बांटें नहीं और न ही किसी के बारे में गलत बयानबाजी करें। उनके बयान से आहात संत समाज आज यहां जुटा है। उनके बयान का विरोध कर रहा है संत समाज और हमेशा करेगा। बालकाचार्य ने कहा - वो गाय को राज्यमाता की बात करते हैं। सिर्फ राज्यमाता क्यों राष्ट्र माता की बात करें। वो उस प्रदेश में गाय को माता का दर्जा देने की बात कर रहे हैं। जहां सबसे अधिक गाय के संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है। गौशालाएं बनाई जा रही है। ऐसे में यह गलत है और हम इसका विरोध जारी रखेंगे। खुलकर करेंगे विरोध हम लोग एक बैठक कर रहे हैं और उसमे जो निर्णय होगा उसपर आगे कार्य करेंगे। हम लोग आगे भी यदि ये बयानबाजी करेंगे तो हम लोग खुलकर विरोध करेंगे। उन्हें जो भी किया बयान दिया हम लोगों ने कोई भी बात नहीं की लेकिन वो अगर सम्प्रदाय को लड़ाने का काम करेंगे तो हम उनका खुलकर विरोध करेंगे। ऐसे शंकराचार्य को कान पकड़कर भारत से निकाल देना चाहिए अयोध्या से आये संत रामवतारदास मानस अगस्त ने बताया - शंकराचार्य के बयानों की विचरधारा की परंपरा ही कांग्रेस की रही है। उनके गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती विश्व हिंदू परिषद् के विरोधी। रामजन्म भूमि और उसके नक़्शे के विरोधी और हिन्दुओं का विघटन करने वाले स्वरूपानंद के ये शिष्य हैं। ये उसी परंपरा से चल रहे हैं। केवल हिंदुओं को तोड़ने और बांटने का षड्यंत्र है। कांग्रेस की निति को चमकाने और अखिलेश को फायदा पहुंचाने के लिए हिन्दू विचारधारा के घोर विरोधी हैं शंकराचार्य। योगी ऐसे महात्मा जो प्रदेश का विकास और गौरक्षा भी कर रहे हैं। उनको हिंदू नहीं है।अकबर हैं कहना कितना बड़ा पाप है। ऐसे शंकराचार्य को कान पकड़कर बाहर निकाल देना चाहिए। हम इसकी घोर निंदा करते हैं।
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