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    यूपी पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे आशुतोष महाराज:बरी होने के बाद भी पुलिस रिकॉर्ड में इनामी अपराधी बताने पर याचिका दाखिल

    4 hours ago

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    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज ने एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस बार पुलिस महकमे के खिलाफ ही हाईकोर्ट में रिट दाखिल की है। उनका कहना है कि बरी हो जाने के बाद भी यूपी पुलिस उन्हें “इनामी अपराधी” बोल रही है। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर “इनामी अपराधी” के रूप में दर्शाने के मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत याचिका दाखिल की है। आशुतोष महाराज की तरफ से यह याचिका श्रीकृष्ण सेना के प्रदेश महामंत्री एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सीताराम यादव और मंत्री विनोद सिंह एडवोकेट के जरिए दाखिल की गई है। जानिए याचिका में क्या कहा याचिका में कहा गया है कि थाना कांधला, जनपद शामली में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर पुलिस द्वारा जल्दबाजी में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज को इनामी घोषित कर दिया गया था। बाद में इस मामले की न्यायिक सुनवाई के उपरांत 30 जुलाई 2024 को एसीजेएम न्यायालय कैराना, जिला शामली द्वारा उन्हें उक्त मुकदमे में सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया। पुलिस की “इनामी अपराधी” वाली पोस्ट मौजूद इसके बावजूद संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज भी उन्हें “इनामी अपराधी” के रूप में दर्शाने वाली पोस्ट उपलब्ध है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक छवि को गंभीर क्षति पहुंच रही है। याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति के न्यायालय से बरी हो जाने के बाद भी उसका झूठा आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राप्त गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है। पोस्ट हटाएं, अभिलेख सुधारें याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और सम्मान उसकी मौलिक स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है और राज्य की एजेंसियों द्वारा गलत अथवा अपुष्ट जानकारी को सार्वजनिक मंच पर प्रसारित करना कानून और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इस संबंध में उच्च न्यायालय से प्रार्थना की गई है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे तत्काल उक्त पोस्ट को हटाएं, अभिलेखों में आवश्यक सुधार करें तथा बिना सत्यापन किसी भी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर प्रकाशित न करें। साथ ही न्यायालय से यह भी अनुरोध किया गया है कि इस प्रकार की कार्रवाई से हुई प्रतिष्ठा हानि के संदर्भ में न्यायालय उचित आदेश पारित करे।
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