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    Vehicle Scrappage Policy: उत्तर प्रदेश बना देश में अव्वल, 48.5 फीसदी पुराने वाहन स्क्रैप हुए

    3 hours from now

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    स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में वाहन स्क्रैपिंग नीति के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। देशभर में कबाड़ में तब्दील किए गए वाहनों में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 48.5 प्रतिशत है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि पुराने, अनफिट और प्रदूषणकारी वाहनों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का उद्देश्य केवल पुराने वाहनों को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से कबाड़ के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना और ऐसी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना है, जिसमें संसाधनों का बार-बार उपयोग किया जा सके। परिवहन विभाग के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देशभर में 4.07 लाख से अधिक वाहनों को स्क्रैप किया गया। इनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 1.97 लाख से अधिक वाहन स्क्रैप किए गए।इसे भी पढ़ें: Tata Motors ने पेश की नई ब्रांड पहचान TATA.cars, सभी यात्री वाहन एक मंच परइस तरह देश में स्क्रैप किए गए कुल वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 48.5 प्रतिशत रही। प्रदेश में 92 लाइसेंस प्राप्त पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र हैं, जिनमें से 51 वर्तमान में संचालित हैं। इससे वाहन मालिकों को अपने पुराने और जीवन-चक्र पूरा कर चुके वाहनों को अनधिकृत कबाड़ बाजार में देने के बजाय पंजीकृत एवं विनियमित केंद्रों पर स्क्रैप कराने का सुरक्षित विकल्प मिल रहा है।इसे भी पढ़ें: UPSRTC ने Raksha Bandhan पर चलाईं अतिरिक्त बसें, कर्मचारियों को मिलेगा प्रोत्साहनविभाग के मुताबिक, सरकार की नीति में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वाहन मालिकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। जमा प्रमाणपत्र के आधार पर नया वाहन खरीदने वाले पात्र वाहन मालिकों को सड़क कर में छूट दी जाती है। गैर-परिवहन वाहनों पर 15 प्रतिशत तक, जबकि परिवहन वाहनों पर 10 प्रतिशत तक रोड टैक्स में छूट का प्रावधान है।एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रक या बस को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदने पर निर्धारित शर्तों के तहत 10 वर्ष के लिए 100 प्रतिशत तक रोड टैक्स में छूट का प्रावधान भी किया गया है। परिवहन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में पुराने बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 मालवाहक वाहनों एवं बसों को बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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