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    Vishwakhabram: Mojtaba Khamenei कोमा में, टांग काटनी पड़ी! Trump बोले- शायद वो जिंदा है, Netanyahu का तंज- आतंकियों के लिए कोई जीवन बीमा नहीं है

    3 hours from now

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    पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां सत्ता, बदला और रणनीति तीनों एक साथ टकरा रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चले गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले में उन्हें भयंकर चोटें आईं, जिनमें उनका एक पैर काटना पड़ा है और पेट या यकृत को भी भारी नुकसान पहुंचा है। तेहरान के सिना विश्वविद्यालय अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।अपने पिता और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद जैसे ही सत्ता की विरासत मोजतबा खामेनेई के कंधों पर आई, उसके कुछ ही घंटों में उन पर घातक हमला हो गया। सत्ता संभालते ही उनके इस तरह गंभीर रूप से घायल हो जाने की घटना ने पूरे ईरान की सत्ता व्यवस्था और नेतृत्व की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना ने ईरान के भीतर विश्वास और नियंत्रण की छवि को झकझोर दिया है और देश के राजनीतिक तथा सैन्य ढांचे में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है।इसे भी पढ़ें: Kuwait में Iranian हमले का बड़ा खुलासा, 150 US सैनिक घायल, Pentagon पर उठे गंभीर सवालअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि मोजतबा खामेनेई शायद अभी किसी रूप में जिंदा हैं, लेकिन उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप के इस बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी रहस्यमय बना दिया है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं।हालांकि घायल होने और कोमा की खबरों के बीच मोजतबा खामेनेई की ओर से जारी एक संदेश ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और भड़का दिया है। अपने पहले बयान में उन्होंने साफ कहा है कि ईरान हर उस व्यक्ति की मौत का बदला लेगा जो इस युद्ध में मारा गया है। उन्होंने कहा कि हर शहीद ईरानी एक अलग प्रतिशोध का मामला है और बदला पूरा होने तक ईरान की कार्रवाई जारी रहेगी। खामेनेई ने खास तौर पर नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने मिनाब स्थित शजरा तय्यिबा स्कूल पर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों की मौत ने ईरान की प्रतिशोध नीति को और कठोर बना दिया है। ईरानी नेतृत्व इस घटना को युद्ध का सबसे प्रतीकात्मक अपराध बताकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।साथ ही खामेनेई ने ईरान की प्रतिरोध धुरी की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोहियों और इराक के प्रतिरोध समूहों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ये सभी संगठन मिलकर इजराइली साजिश के खिलाफ क्षेत्रीय मोर्चा मजबूत कर रहे हैं। यह बयान इस बात का संकेत है कि युद्ध अब केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में फैल सकता है।खामेनेई ने उन देशों को भी कड़ी चेतावनी दी है जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों में किया गया है। उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों से विदेशी सैन्य अड्डे बंद करने की अपील करते हुए साफ कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो इन ठिकानों को निशाना बनाया जाता रहेगा।इसके साथ ही, ईरान की रणनीति का एक और बेहद खतरनाक पहलू भी सामने आया है। खामेनेई ने कहा है कि होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने का विकल्प लगातार इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हम आपको बता दें कि यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान इस मार्ग को बाधित करता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल आ सकता है।दूसरी ओर इजराइल ने भी बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि आतंकी संगठनों के नेताओं के लिए कोई जीवन बीमा नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो मोजतबा खामेनेई और हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम भी निशाने पर हो सकते हैं। नेतन्याहू का दावा है कि इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई बेहद सफल चल रही है। उन्होंने कहा कि इजराइली सेना ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसिज बलों को सड़क से लेकर चौकियों तक हर जगह करारी चोट पहुंचा रही है। उन्होंने ईरान की जनता से भी सीधे संवाद करते हुए कहा कि बदलाव का क्षण करीब है और ईरानी लोग यदि चाहें तो अपने देश के भविष्य की दिशा बदल सकते हैं।नेतन्याहू ने यह भी बताया कि उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की लगातार बातचीत हो रही है और दोनों नेता लगभग हर दिन रणनीतिक फैसले ले रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि अमेरिका और इजराइल के गठबंधन की सुनियोजित सैन्य मुहिम बन चुका है।साथ ही इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व अत्यंत गंभीर है। यदि मोजतबा खामेनेई वास्तव में कोमा में हैं तो ईरान के नेतृत्व में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है। युद्ध के बीच नेतृत्व संकट किसी भी देश की सैन्य क्षमता को कमजोर कर देता है। लेकिन ईरान की व्यवस्था में प्रतिरोध नेटवर्क और सैन्य ढांचे की गहराई इतनी है कि नेतृत्व बदलने पर भी संघर्ष जारी रह सकता है।दूसरा महत्वपूर्ण पहलू होरमुज जलडमरूमध्य है। यदि ईरान इसे अवरुद्ध करने की कोशिश करता है तो दुनिया के तेल बाजार में जबरदस्त उथल पुथल मच सकती है। यह कदम पश्चिमी देशों पर आर्थिक दबाव बनाने का सबसे शक्तिशाली हथियार हो सकता है। तीसरा सामरिक आयाम प्रतिरोध धुरी का विस्तार है। हिजबुल्लाह, हूती और इराकी समूहों की सक्रियता का मतलब है कि यह युद्ध कई मोर्चों पर फैल सकता है। इससे इजराइल को उत्तरी सीमा से लेकर लाल सागर तक एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा पड़ेगा। यही कारण है कि पश्चिम एशिया की यह जंग अब केवल दो या तीन देशों का संघर्ष नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक विस्फोटक रणनीतिक संकट बन चुकी है।
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