Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    पीरियड्स में पेड लीव की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज:CJI बोले– कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा

    4 hours ago

    1

    0

    सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। यह कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा। CJI ने कहा- ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान मेंस्ट्रुअल लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणामों के बारे में चिंता जाहिर की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मामले को लेकर खुद कोई महिला कोर्ट में नहीं आई है। पेड मेंस्ट्रुअल लीव पर CJI के कमेंट्स मेंस्ट्रुअल लीव का मुद्दा तीसरी बार कोर्ट लेकर पहुंचा याचिकाकर्ता पेड मेंस्ट्रुअल लीव की याचिका लेकर शैलेंद्र मणि तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। पहली याचिका का निपटारा फरवरी 2023 में किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता को केंद्रीय महिला एवं बाल मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई थी। 2024 में याचिकाकर्ता ने फिर कोर्ट में याचिका लगाई और कहा कि मंत्रालय ने उनके पक्ष में दिए गए जवाब पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उस याचिका का निपटारा जुलाई 2024 में किया गया था, जिसमें केंद्र सरकार से नीतिगत निर्णय लेने को कहा गया था। नई याचिका की मांगें… देश के 4 राज्यों में मेंस्ट्रुअल लीव पर बने नियम ------------------------ सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… SC बोला- पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या PSU कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    Vishwakhabram: Mojtaba Khamenei कोमा में, टांग काटनी पड़ी! Trump बोले- शायद वो जिंदा है, Netanyahu का तंज- आतंकियों के लिए कोई जीवन बीमा नहीं है
    Next Article
    भास्कर अपडेट्स:आंध्र में सिंथेटिक ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा, ₹47 करोड़ की अल्प्राजोलम बरामद; 2 गिरफ्तार

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment