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    यूपी में पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा आयोग बनेगा:रैपिड सर्वे रिपोर्ट के बाद आरक्षण तय होगा; सरकार ने HC में हलफनामा दिया

    4 hours ago

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    यूपी में पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश में एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC कमीशन) बनाया जाएगा। योगी सरकार ने लखनऊ हाईकोर्ट को इस बाबत हलफनामा दिया है। दरअसल, हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सरकार ने बताया, समर्पित पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में सीटों का आरक्षण तय होगा। प्रदेश सरकारने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों से पहले समर्पित आयोग का होना अनिवार्य बताया था। पिछले पंचायत चुनाव से पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग बना था। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण निर्धारण कर निकाय चुनाव कराए गए थे। अप्रैल से जुलाई के बीच पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। क्यों मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों पर सवाल उठे? प्रदेश में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल अक्टूबर, 2025 में खत्म हो गया था। लेकिन सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया। याचिकाकर्ता के वकील मोती लाल यादव ने बताया, कानूनी रूप से पिछड़ा आयोग के पास सर्वे कराने का अधिकार नहीं है। यदि आयोग का तीन साल का मूल कार्यकाल खत्म नहीं हुआ होता, तो वही आरक्षण का सर्वे कर सकता था। अब नया समर्पित आयोग पिछड़ों का 'रैपिड सर्वे' करेगा। इस सर्वे के जरिए ही पिछड़ों की वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के अनुसार सीटों का आरक्षण लागू होगा। अब रिपोर्ट मिलने के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है। किसी भी स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव से पहले तीन साल के कार्यकाल वाला पिछड़ा वर्ग आयोग या समर्पित कमीशन होना जरूरी है। इसी क्रम में सरकारी वकील ने लखनऊ हाईकोर्ट में बताया कि उत्तर प्रदेश में अब एक समर्पित आयोग का गठन किया जा रहा है, जो पूरे प्रदेश में गहन सर्वे करेगा। इसका उद्देश्य पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान समर्पित आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आयोग की रिपोर्ट से पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी और चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा। इससे पहले आरक्षण को लेकर बार-बार कानूनी अड़चनें सामने आती रही हैं, लेकिन अब समर्पित आयोग के गठन के बाद ऐसे विवादों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। चुनाव आयोग और सरकार दोनों के लिए यह कदम पंचायत चुनावों को सुचारु रूप से कराने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। खबर अपडेट की जा रही है…
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