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    यूपी में पेपर लीक कानून केंद्र से ज्यादा सख्त:यहां उम्रकैद, केंद्र में सिर्फ 10 साल जेल; क्या अब प्रदेश का कानून बेकार हो जाएगा

    5 hours ago

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    पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार का नया बिल 31 जुलाई को राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद कानून बन गया। केंद्र सरकार से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद देशभर में लागू हो जाएगा। इसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, यूपी में 2024 से लागू पेपर लीक कानून में उम्रकैद तक का प्रावधान है। इसलिए यह ज्यादा सख्त दिख रहा है। अगर पहले से मौजूद कानून इतना सख्त है, तो पेपर लीक की घटनाएं रुकती क्यों नहीं? जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: यूपी में पेपर लीक कानून कब और कैसे बना? जवाब: यूपी सरकार ने 2024 में ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम’ बनाया था। इसकी भूमिका फरवरी, 2024 में RO/ARO और सिपाही भर्ती पेपर लीक से बनी थी। सवाल-2: यूपी के कानून में पेपर लीक पर सजा का क्या प्रावधान है? जवाब: पेपर लीक या नकल में शामिल अपराधियों और उनके स्तर के हिसाब से अलग-अलग सजा का प्रावधान है। सवाल-3: केंद्र सरकार का नया कानून यूपी के कानून से कितना अलग है? जवाब: पेपर लीक में शामिल व्यक्ति सॉल्वर गैंग और संगठित अपराध परीक्षा एजेंसी की जवाबदेही जांच-मुकदमे की समयसीमा ओवरऑल स्थिति यूपी का कानून शुरुआती स्तर पर (न्यूनतम सजा, सॉल्वर गिरोह के लिए उम्रकैद तक) अब भी ज्यादा सख्त है। वहीं, केंद्र का संशोधित कानून जुर्माने की रकम और समयबद्ध जांच-मुकदमे के मामले में आगे निकल रहा है। यानी दोनों कानून एक-दूसरे के करीब पहुंच रहे हैं। बस सख्ती के अलग-अलग हिस्सों में आगे-पीछे हैं। सवाल-4: क्या केंद्र का नया कानून यूपी में भी लागू होगा? जवाब: सीधे तौर पर नहीं, नया कानून सिर्फ केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होगा। राज्य परीक्षाओं के पेपर लीक पर यूपी का कानून ही लागू होगा। हालांकि, यूपी सरकार चाहे, तो राज्य की परीक्षाओं में भी केंद्रीय कानून लागू करा सकती है। इसके दो रास्ते हैं… 1. पहला: केंद्र सरकार से अनुरोध शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। इसके तहत बनी किसी भी केंद्रीय व्यवस्था को राज्य में लागू करने की अनिवार्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। 2. दूसरा: राज्य के कानून में बदलाव सवाल-5: अगर केंद्रीय कानून यूपी में लागू हुआ, तो क्या यूपी का पुराना कानून खत्म हो जाएगा? जवाब: नहीं, इसे इन तकनीकी बिंदुओं से समझ सकते हैं… 1. विरोधाभासी प्रावधान खत्म होंगे 2. ज्यादा सख्त धाराएं बची रहेंगी 3. व्यावहारिक रूप से क्या बदलेगा सवाल-6: सख्त कानूनों के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं क्यों नहीं रुक रहीं? जवाब: विशेषज्ञों, जांच एजेंसियों और प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार… 1. अरबों का हाई-रिटर्न ब्लैक मार्केट 2. आउटसोर्सिंग और प्राइवेट वेंडर्स 3. भयंकर प्रतियोगिता 4. मुकदमों में देरी सवाल-7: तो क्या है इसका स्थायी समाधान नहीं है? जवाब: ऐसा नहीं है, विशेषज्ञ सख्त कानून के साथ ही कुछ अन्य सुझाव देते हैं… हाइब्रिड मॉडल परीक्षा: पेपर कंप्यूटर स्क्रीन पर आए, लेकिन छात्र ओएमआर शीट पर पेन से उत्तर भरें। इससे प्रिंटिंग प्रेस और कंप्यूटर हैकिंग दोनों के रास्ते बंद हो जाएंगे। सरकारी प्रेस का उपयोग: पेपर की छपाई प्राइवेट वेंडर्स के बजाय बेहद सुरक्षित सरकारी प्रिंटिंग प्रेस (जैसे करेंसी नोट प्रेस या आरबीआई की प्रेस) में ही हो। परीक्षा केंद्र सरकारी हों: प्राइवेट कॉलेजों और कंप्यूटर लैब्स के बजाय केवल सरकारी स्कूलों, यूनिवर्सिटी और टीसीएस जैसे अत्यधिक प्रमाणित केंद्रों पर ही परीक्षाएं कराई जाएं। -------------------------------------- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… क्या राम मंदिर CEO सिर्फ डमी बनकर रह जाएगा, नियुक्ति के बाद भी महासचिव सबसे ज्यादा ताकतवर राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है, रक्षाबंधन तक कोई रिटायर्ड नौकरशाह यह जिम्मेदारी संभाल लेगा। इसके विज्ञापन में कहा गया था कि CEO ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेगा। तो क्या CEO की नियुक्ति के बाद भी महासचिव के पास ही सारी ताकत रहेगी? कहीं CEO सिर्फ डमी बनकर तो नहीं रह जाएगा? जानिए यूपी एक्सप्लेनर में…
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