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    यूपी में साल में 2 बार TET परीक्षा होगी:सुप्रीम कोर्ट ने एक साल मोहलत बढ़ाई; 1.86 लाख शिक्षकों के लिए बड़ी राहत

    3 hours ago

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    यूपी के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ा रहे 1.86 लाख शिक्षक अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं कर सके हैं। ये शिक्षक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। 50 हजार ऐसे हैं, जो न्यूनतम योग्यता के अभाव में परीक्षा नहीं दे सकते थे। अब यूपी सरकार ने ऐसे शिक्षकों को राहत दी है। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में कुछ ढील दी है। साथ ही ऐसे शिक्षकों के लिए एक और टीईटी परीक्षा कराने की तैयारी में है। इसके लिए एक सप्ताह के अंदर जिलेवार टीईटी पास और टीईटी ना पास करने वाले शिक्षकों की जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की मोहलत के बाद लिया गया निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने यूपी राज्य बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट रिव्यू पिटिशन पर 29 मई 2026 को अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी किया। इस आदेश में परिषदीय विद्यालयों में बिना टीईटी पास पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए में टीईटी पास करने की आखिरी समय सीमा 31 अगस्त 2028 कर दी है। पहले ये मोहलत 31 अगस्त 2027 था। विशेष सचिव ने तीन बिंदुओं पर जिलेवार जानकारी मंगाई सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी ने बेसिक शिक्षा निदेशक को 16 जून को एक पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने 3 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जिलेवार कुल नियमित कार्यरत शिक्षकों की संख्या देनी होगी। इसके बाद ऐसे शिक्षकों की संख्या देनी होगी, जो टीईटीसीटीईटी पास कर चुके हैं। फिर ऐसे शिक्षकों की जानकारी देनी है, जिसने अभी तक टीईटी पास नहीं की है। ये जानकारी एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसमें परिषदीय, मान्यता प्राप्त और राजकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की जानकारी देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश क्या है UPTET 2026 नोटिफिकेशन में UPESSC कर चुका है बड़ा बदलाव उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने मार्च 2026 में UPTET नोटिफिकेशन जारी किया और 3 बड़े बदलाव किए- जुलाई में होने वाली परीक्षा में बड़ी संख्या में बैठेंगे ऐसे शिक्षक मार्च में टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए थे। सामान्य अभ्यर्थियों के अलावा बिना टीईटी पास किए प्रदेश में पढ़ा रहे 1.86 लाख शिक्षकों ने भी आवेदन किया है। ये परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। हालांकि इन शिक्षकों को जनगणना की जिम्मेदारी के चलते तैयारी करने का मौका नहीं मिल पाया है। जानिए कैसे टीईटी के पेंच में फंसे यूपी के 1.86 लाख शिक्षक निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE-2009) संसद ने 4 अगस्त 2009 को पारित किया और इसे 1 अप्रैल 2010 से देशभर में लागू किया गया। इस कानून का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को कक्षा 1 से 8 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है। साथ ही शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में टीईटी (TET) अनिवार्य किया गया। 27 जुलाई 2011 को आदेश जारी कर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भर्ती के लिए टीईटी अनिवार्य सेवा शर्त बनाई गई। हालांकि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने फैसला दिया कि जिनकी सेवा 5 साल से ज्यादा बची है ऐसे सभी शिक्षकों को 2 साल (31 अगस्त 2027 तक) में टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इससे कम सेवा वालों को छूट तो दी गई, लेकिन प्रमोशन के लिए उन्हें भी TET पास करना जरूरी कर दिया गया। यूपी के शिक्षकों ने तीन टीईटी कराने की मांग रखी शिक्षक संगठनों का तर्क है कि RTE-2009 के तहत TET की अनिवार्यता जुलाई 2011 से लागू हुई थी। ऐसे में इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे कैसे लागू करना संवैधानिक नहीं है। कई शिक्षक तो 20 से 25 सालों से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है। अब एक साल मोहलत बढ़ाने के बाद शिक्षक संघों ने राज्य सरकार से तीन टीईटी कराने की मांग रखी है। सवाल शिक्षा मित्रों और इंटर कॉलेजों के शिक्षकों का क्या होगा उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा कहते हैं कि आरटीई–2009 एक्ट इंटर कॉलेजों में भी कक्षा 6 से 8वीं तक प्रभावी है। ऐसे में वहां 6वीं से 8वीं तक बढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना होगा। प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या भी 20 हजार से अधिक है। आखिर ये भी तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जद में आएंगे, फिर उनका क्या होगा? प्रदेश में बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त और निजी कॉलेज भी हैं। उन शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य होगी। फिर शिक्षा मित्रों के मामले में सरकार क्या कदम उठाएगी? क्योंकि वे भी तो कक्षा 1 से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। दिनेश शर्मा कहते हैं कि प्रदेश में 1993 से शिक्षकों की भर्ती एनसीईटी (नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) की तय गाइडलाइन के अनुसार हो रही है। वहीं, प्रदेश में शिक्षकों का प्रमोशन अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के तहत वरिष्ठता के आधार पर तय है। एसआईआर और राष्ट्रीय जनगणना के बीच कैसे करेंगे परीक्षा की तैयारी राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री शिवशंकर सिंह कहते हैं कि पहले शिक्षकों से शैक्षणिक कार्य के साथ–साथ एसआईआर का काम लिया गया। अब राष्ट्रीय जनगणना अभियान में लगा दिया है। ऐसे में वे जुलाई में होने वाली यूपीटीईटी की तैयारी का मौका ही नहीं मिला? उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे शिक्षकों को राहत देना चाहिए। साथ ही यूपी सरकार को भी तमिलनाडु की तरह शिक्षकों के लिए टीईटी में छूट देनी चाहिए। तमिलनाडु सरकार अपने यहां लगभग 4 लाख सरकारी और निजी शिक्षक लिए टीईटी की अनिवार्यता को देखते हुए क्वालीफाई मार्क्स कम रखते हुए एक अध्यादेश ले आई है। साथ ही सरकार ने दो साल में 6 TNTET (तमिलनाडु शिक्षक पात्रता परीक्षा) आयोजित कराने का निर्णय लिया है। -------------------------- ये पढ़ें - 'हंसी का पात्र बनने वाला कोई काम न करें':ड्यूटी में रील बनाने वालों को CM योगी की चेतावनी, बोले- यह अनुशासनहीनता, सिस्टम पर अनावश्यक अंगुली न उठने दें सीएम योगी आदित्यनाथ ने रीलबाज सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को सख्त संदेश दिए हैं। उन्होंने ड्यूटी के दौरान रील बनाने को अनुशासनहीनता करार दिया है। सीएम ने कहा- अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग ड्यूटी के समय रील बनाने में व्यस्त रहते हैं, यह अनुशासनहीनता का एक पार्ट है। उस समय उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए। ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए, जिससे व्यक्ति या विभाग उपहास का पात्र बने। पढ़िए पूरी खबर…
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