Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'यूट्रस में लगा 'कॉपर-टी' यूरिनरी ब्लैडर में पहुंचा':दर्द से कराह रही थी युवती, KGMU के डॉक्टरों ने इलाज कर दी राहत

    2 hours ago

    1

    0

    लखनऊ में KGMU के डॉक्टरों ने बेहद गंभीर समस्या से जूझ रही 25 साल की युवती को बड़ी राहत दी है। वह कई महीनो से पेट दर्द और यूरिन पास करने में कठिनाई की समस्या से जूझ रही थी। इस बीच जब उसकी कंडीशन बेहद क्रिटिकल हो गई, तब स्थानीय डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफेर कर दिया। युवती यूरिन लगने के बाद भी पास करने में सक्षम नहीं थी। उसके किडनी और लिवर तक पर असर दिखने लगा था। राहत न मिलने पर परिजन उसे KGMU लेकर पहुंचे। जहां जांच के बाद डॉक्टरों को बेहद हैरान करने वाली सिचुएशन देखने को मिली। गर्भनिरोध के तौर पर युवती द्वारा लगवाई गई कॉन्ट्रासेप्टिव, 'कॉपर-टी' यूरिनरी ब्लैडर यानी पेशाब की थैली में पहुंच गई। 8 महीने से दर्द सह रही थी महिला KGMU यूरोलॉजी विभाग के सीनियर फैकल्टी डॉ.विश्वजीत सिंह ने बताया- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की 25 साल की युवती गंभीर हालत में KGMU के यूरोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंची। युवती को यूरिन पास करने में गंभीर समस्या थी। ये परेशानी उसे करीब सात-आठ महीने पहले से थी। समय के साथ उसका उठना-बैठना और चलना फिरना भी मुश्किल हो गया था। पेट दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट सहित उसके शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ गई थी। लीवर पर पड़ रहा था दबाव जांच रिपोर्ट में युवती की किडनी और लिवर सहित कई ऑर्गन पर असर दिख रहा था। इसके अलावा उसके यूरिनरी ब्लैडर में एक अजीब से 'फॉरेन पार्टिकल' भी दिखा। हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन में ये पता चला कि ये एक कॉन्ट्रासेप्टिव कॉपर टी है। जो करीब डेढ़ साल उसने गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए लगवाया था। जो इंफेक्शन का गंभीर रूप ले चुका है। इसे निकालने के लिए विशेष तरह की सर्जरी करनी पड़ी। राहत की बात ये रही कि प्रोसिजर के बाद युवती को बड़ी राहत मिली। कुछ दिन के भीतर ही युवती को छुट्टी भी दे दी गई। यूपी का पहला मामला डॉ.विश्वजीत ने बताया- मेडिकल साइंस के लिहाज से ये बेहद रेयर केस है। आमतौर पर ऐसे मामले देश दुनिया में बहुत कम सामने आए हैं। मरीज को राहत देने के बाद जब हमने विश्व भर में ऐसे कितने मामले सामने आए, ये खोजना शुरू किया तो यूरोप में भी ऐसे महज एक या दो केस मिले। जबकि भारत में ऐसा कोई मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश का कम से कम ये पहला ऐसा मामला है। इसकी केस स्टडी हमने बनाकर इंटरनेशनल जर्नल में पब्लिश करने के लिए दी है। रिसर्च पेपर एक्सेप्ट हो गया है। बहुत जल्द पब्लिश भी होने की उम्मीद है। एक्सपर्ट डॉक्टरों से ही लगवाएं कॉपर टी डॉ.विश्वजीत ने कहा- यूट्रस में होने वाले कॉपर-टी कैसे यूरिनरी ब्लैडर में पहुंच गया ये सवाल हम डॉक्टरों के सामने था। इसके लिए जब हमने युवती की फैमिली की डिटेल हासिल की। पता चला कि एक बेटा होने के बाद उसने करीब डेढ़ साल पहले महिला चिकित्सक की सलाह पर कॉपर टी लगवाई थी। इसे लगवाने के दौरान ही गलती हुई या फिर लगने के बाद ये रिलोकेट होकर यूरिनरी ब्लैडर में पहुंची। ये जानकारी नहीं हो सकी, पर इतना जरूर हैं कि एक्सपर्ट डॉक्टर की निगरानी में ही इसे लगवाया जाना चाहिए। कॉपर-टी 5 से 10 साल काम करती है आम तौर पर गर्भनिरोधक उपाय स्थायी और अस्थायी होते हैं। स्थायी में नसबंदी है, जिसे एक उम्र, बच्चों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है। वहीं, अस्थायी उपायों में खाने की गोली, इंजेक्शन, कंडोम और कॉपर-टी का विकल्प है। चूंकि कॉपर-टी 5 से 10 साल के लिए काम करता है, इसलिए इसे ज्यादा सुरक्षित मानकर इसकी सलाह दी जा रही है। ऐसा देखा गया है कि कई बार महिलाएं गोली खाना भूल जाती हैं या इंजेक्शन को समय पर लगवाने में लापरवाही हो जाती है। नतीजा अनचाहा गर्भ ठहरना। ऐसा एक नहीं बल्कि दो-तीन बार होता है, यही कारण है कि एक्सपर्ट डॉक्टर भी कॉपर टी लगवाने का सजेशन देते हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    सांसद प्रिया सरोज ने सुपरफास्ट शटलएक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई:जौनपुर के जलालगंज स्टेशन पर किया शुभारंभ, चेयरमैन ने पगड़ी पहनाई
    Next Article
    यौन शोषण मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई आज:गोंडा में आज दो नामी पहलवानों के बयान पर होगी जिरह, बृजभूषण भी रहेंगे मौजूद

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment