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    युद्ध में मिठास फैलाएगी काशी की किमामी सेवईं:वाराणसी से महाराष्ट्र, फिर वहां से जाएगी सऊदी और UAE; ईद में होता है 15 करोड़ का व्यापार

    2 hours ago

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    पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध से माहौल गर्म और तल्ख है। इन सब के बीच वाराणसी में ईद के मौके पर प्रसिद्ध किमामी सेवईंयां तैयार की जा रही हैं। ये सेवइयां मुंबई के व्यापारियों के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट में अपनी धमक रखती हैं। ऐसे में ये सेवईंयां युद्ध क्षेत्र में काशी से अमन-चैन के पैगाम के साथ मिठास भी फैलाएंगी। काशी के भदऊचुंगी सेवईं मंडी में बनने वाली खास किमामी सेवईं की सऊदी अरब और UAE में काफी डिमांड है। वाराणसी के व्यापारी इस सेवईं को बनने के लिए पिछले तीन महीने से लगे हुए हैं और रोजाना एक व्यापारी दो से ढाई क्विंटल सेवईंयां बना रहा है और सप्लाई कर रहा है। वाराणसी की सेवईं मंडी में 45 से 50 कारखाने हैं। जहां साल भर सेवईंयां बनाई जाती है। अकेले ईद पर तीन महीने में 15 करोड़ का व्यापार पूरे मार्केट से होता है। इसके अलावा यहां कई प्रकार की सेवईंयां बनायी जाती है। जो अलग-अलग इलाकों में मशहूर है। इसके अलावा दूध फेनी का भी व्यापार हो रहा है। दैनिक भास्कर ने वाराणसी की सेवईं मंडी, भदऊ चुंगी में व्यापारियों से बात की और काशी की सेवईं, सप्लाई, बनाने का तरीका और व्यापार के बारे में जानकारी ली। पढ़िए खास रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए काशी की सेवईं मंडी और उसके इतिहास के बारे में... वाराणसी के राजघाट पुल से 300 मीटर की दूरी पर काशी ही नहीं बल्कि पूरे देश और मुस्लिम कांट्रियों में फेमस काशी की सेवईं मंडी स्थित है। इस मंडी के इतिहास के बारे में यहां के व्यापारी बताते हैं कि यह मंडी 150 साल पुरानी है। पहले और कारखाने थे लेकिन महंगाई ने कमर तोड़ दी और धीरे-धीरे कारखाने खत्म हो गए। लेकिन अभी भी कारखाने हैं जिन्होंने यहां की कारीगरी और मिठास को जिंदा रखा हुआ है। काशी की इस मंडी में किमामी सेवईं, लच्छा सेवईं मशहूर हैं। इतिहास में नाम है दर्ज वाराणसी सेवईं गृहउद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चेलाल अग्रहरि ने बताया - ये मंडी सैकड़ों साल पुरानी है। यहां पहले कई कारखाने होते थे। लेकिन महंगाई ने कमर तोड़ी तो कई कम पूंजी वाले उद्योगपतियों ने इस काम को छोड़ दिया है। लेकिन आज भी भदऊ चुंगी की फेमस सेवईं मंडी मशहूर है। तीन पीढ़ियों से सेवई का कारोबार उन्होंने बताया- 3 पीढ़ियों से हमारा परिवार सेवई, दूधफेनी और भुनी सेवई का व्यापार कर रहा है। साल भर हमारे यहां सेवई बनती है। लेकिन ईद की तैयारी इस्लामिक कैलेन्डर रजब के महीने से शुरू हो जाती है। तीन महीने पहले से हम लोग सेवईं बनाने लगते हैं और ऑर्डर भेजने लगते हैं। अब जानिए किमामी सेवईं के बारे में और कहां तक है उसकी सप्लाई… 5 प्रकार की सेवई, किमामी सबसे मशहूर सचिन अग्रहरि ने बताया- पांच प्रकार की सेवईयां बनाई जाती है। जिसमें सबसे मशहूर ट्रिपल जीरो किमामी सेवई है। जो 55 रुपए थोक में और 75 रुपए फुटकर में बिक रही है। इसके अलावा 1 नंबर, जीरो नंबर, डबल जीरो और रॉड वाली सेवईयां भी बनती हैं। इन्हे बनाकर पहले धूप में और कमरे में पंखे के नीचे सुखाया जाता है। उसके बाद इनकी तह लगाईं जाती है। धूप न आने से हो रही दिक्कत सचिन ने बताया - सेवईं को लेकर रमजान में काफी अच्छा बाजार मिलता है। आज कल मौसम में नमी है जिससे उत्पादन पर असर पड़ा है। हम लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था बना रखी है लेकिन फिर भी डिमांड के हिसाब से काम नहीं हो पा रहा है। रोजाना ढाई क्विंटल सेवईं हम लोग तैयार कर ले रहे हैं। मैदा और पानी से बनती है सेवई सचिन बताते हैं - सेवई बनाने में कोई राकेट साइंस नहीं है। इसमें मायदे और पानी का ही इस्तेमाल होता है। उसे सानकर तय समय तक रखा जाता है। फिर डाई में डाला जाता है जो मकान के सबसे आखरी तल पर लगी होती है। वहां से यह सेवई दूसरे तल पर आती है। जिसे लोहे की प्लेट पर इकट्ठा कर सुखाया जाता है। फिर उसे इकठ्ठा कर कार्टूनों में भर दिया जाता है। सेवई बनाने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है। एक लोहे की प्लेट पर 100 से 160 ग्राम सेवईं इकठ्ठा की जाती है। अब जानिए ईद में कितने का होता है कारोबार? दस साल में कितना बदला व्यापार ? 10 साल में मैदा और घी का दाम बढ़ा, असर सेवई पर आया सच्चे लाल ने बताया- 10 साल पहले से आज की डेट में तीन गुना दाम बढ़ गया है। जो सेवई 25 रुपए किलो थी वो आज 75 रुपए किलो हो गई है। इसके अलावा जो पिछले साल 50 में थी वो इस साल 60 में बिक रही है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि मैदा, घी का जो दाम बढ़ा उसका असर सेवई पर देखने को मिल रहा है। सालाना 20 करोड़ से अधिक का कारोबार सच्चे लाल अग्रहरि ने बताया - सेवईं मंडी में सालाना सेवईं का कारोबार 20 करोड़ से अधिक का है। यहां मौजूद कारखानों में रोजाना 4 से 5 क्विंटल आम दिनों में सेवईं बनती है। ईद के मौके पर यह आंकड़ा बढ़ जाता है और 7 से कभी-कभी 9 तक जाता है। लेकिन आजकल मौसम खराब होने की वजह से सिर्फ 2 से ढाई क्विंटल माल ही तैयार किया जा रहा है। केरल से लेकर जम्मू तक धाक सेवई कारोबारी ने बताया- यहां से सेवई पूर्वांचल के गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज के अलावा लखनऊ, बरेली, सहरानपुर, देवबंद, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, आदि शहरों में जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसग़ढ, झारखंड, आदि प्रदेशों में भी सप्लाई होती है।
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