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    '22 जुलाई से पहले CEO का नाम फाइनल':राममंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बोले- चढ़ावा चोरी की भनक मुझे नहीं लगी; दोबारा चूक नहीं होगी

    17 hours ago

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    राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट अब बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि का कहना है कि जो चूक हुई, उसे दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए मंदिर की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। एक अनुभवी CEO की नियुक्ति होगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में स्वामी गोविंद देव ने मंदिर की 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक, SIT जांच और नई व्यवस्थाओं को लेकर बड़ी जानकारी दी। पढ़िए, स्वामी गोविंद देव का पूरा इंटरव्यू… प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए नया CEO नियुक्त होगा सवाल- मंदिर की व्यवस्था में क्या बदलाव किए जा रहे? गोविंद देव- मंदिर की व्यवस्था में बदलाव और उसे बेहतर बनाना अब बहुत जरूरी हो गया है। हमें भी यह बात पूरी तरह समझ में आ गई है। जो चूक एक बार हुई, वह दोबारा न हो, इसके लिए सभी विभागों में सुधार किए जा रहे हैं। पूरी व्यवस्था पर नजर रखने और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए एक CEO बनाया जाएगा। सवाल- CEO की जरूरत क्यों? क्या ट्रस्ट के सदस्य यह जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते? गोविंद देव- हमारे जितने भी न्यासी और कार्यकर्ता हैं, वे इतनी बड़ी व्यवस्था को प्रशासनिक कुशलता और सख्ती के साथ संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए एक प्रोफेशनल CEO की जरूरत महसूस हुई है। सवाल- CEO की नियुक्ति कैसे और कब तक हो जाएगी? गोविंद देव- इसके लिए 3 सदस्यों की एक समिति बनाई गई है। समिति कई लोगों का इंटरव्यू लेकर 3 नाम ट्रस्ट को देगी। इसके बाद हम उनमें से एक व्यक्ति का चयन करेंगे। CEO हर समय मंदिर की व्यवस्था, निगरानी और सुधार का काम देखेगा। 22 जुलाई को होने वाली बैठक से पहले CEO के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यह काम पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होगा। सवाल- क्या ट्रस्ट को काशी विश्वनाथ धाम की तरह प्रशासनिक मॉडल पर चलाया जाएगा? गोविंद देव- नहीं, ट्रस्ट पहले की तरह ही काम करेगा। हालांकि, व्यवस्था में सुधार की काफी गुंजाइश है और उस दिशा में काम किया जाएगा। सवाल- क्या चंदे के लिए अब बैंक बदलने की प्लानिंग है? गोविंद देव- इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। ट्रस्ट की बैठक में यह विषय आने पर विचार किया जाएगा। 22 जुलाई की बैठक में हो सकते हैं बड़े फैसले सवाल- ट्रस्ट में 2 सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं, 1 पद खाली है। इनको कब भरा जाएगा? गोविंद देव- इस तरह के सभी फैसले ट्रस्ट की बैठक में होते हैं। अगली बैठक 22 जुलाई को है, उसी में इस पर फैसला लिया जाएगा। सवाल- आप कोषाध्यक्ष हैं, लेकिन हमेशा अयोध्या में नहीं रहते। निगरानी कैसे करेंगे? गोविंद देव- जैसा मैंने पहले भी कहा, इसी वजह से एक फुल-टाइम CEO की जरूरत है। वह हर समय अयोध्या में रहकर काम करेगा। हमारे निर्देशों और तय अनुशासन के मुताबिक पूरी व्यवस्था संभालेगा। चोरी की रकम का पता SIT रिपोर्ट आने के बाद चलेगा सवाल- क्या ट्रस्ट के सदस्यों को कभी इस चोरी की भनक नहीं लगी? गोविंद देव- मुझे व्यक्तिगत तौर पर कभी ऐसी कोई भनक नहीं लगी। अगर किसी और को कुछ जानकारी रही भी होगी, तो वह बात मेरे पास नहीं पहुंची। सवाल- चढ़ावा चोरी में गोपाल राव की क्या भूमिका रही है? गोविंद देव- चोरी में उनकी क्या भूमिका रही, यह SIT की जांच का विषय है। उनकी जिम्मेदारी मंदिर की पूजा, दर्शन व्यवस्था और अन्य कार्यों का कोऑर्डिनेशन करना था। चोरी में उनकी भूमिका पर मैं कुछ नहीं कह सकता। सवाल- क्या 8 आरोपियों के अलावा भी कुछ लोगों के शामिल होने की आशंका है? गोविंद देव- इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जब ये 8 लोग यह सब कर रहे थे, तो देखने वाले या सहयोग करने वाले अन्य लोग भी रहे होंगे। उनकी पहचान करना SIT का काम है। सवाल- चढ़ावे का कोई हिसाब-किताब नहीं था। कैसे पता चलेगा कि कितने करोड़ की चोरी हुई? गोविंद देव- चढ़ावे का हिसाब-किताब था, लेकिन रकम रिकॉर्ड में आने से पहले ही निकाल ली जाती थी। इसलिए चोरी की सही रकम का पता लगाना बहुत कठिन है। टिन्नू यादव पर साजिश के आरोप सवाल- आपने टिन्नू यादव पर साजिश का आरोप लगाया है, इशारा किसकी तरफ है? गोविंद देव- मीडिया में आई खबरों के आधार पर मैंने यह बात कही थी कि उसके मोबाइल में बाहरी लोगों के कई कॉल मिले हैं। यह सही भी हो सकता है और गलत भी। इतने वर्षों से काम करने वाले व्यक्ति का ऐसा करना बेहद गंभीर मामला है। सवाल- निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि अखिलेश और टिन्नू के बीच बातचीत होती थी? गोविंद देव- इसकी सच्चाई मैं नहीं बता सकता। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। सवाल- आरोपी इतने ताकतवर कैसे हो गए कि CCTV फुटेज तक डिलीट कर दिए? गोविंद देव- उन्हें इतनी छूट कैसे मिली, यह बड़ा सवाल है। उन पर पर्याप्त निगरानी नहीं थी, इसलिए ऐसा संभव हो पाया। CCTV फुटेज रिकवर हुए या नहीं? इसकी जानकारी मुझे नहीं है। पढ़िए अब तक गोविंद देव गिरि क्या-क्या बयान दे चुके हैं अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि लगातार चर्चा में हैं। इस पूरे मामले पर उन्होंने अब तक कई बयान दिए हैं। इस्तीफा देने से इनकार किया : पत्रकारों ने जब उनसे इस्तीफे और जवाबदेही को लेकर सवाल पूछे, तो वे नाराज हो गए। यहां तक कि मीडियाकर्मियों के माइक खींचते भी नजर आए। साफ कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा, क्योंकि मेरी कोई गलती नहीं है। अपनी भूमिका पर सफाई दी : कोषाध्यक्ष होने के नाते उठ रहे सवालों पर गोविंद गिरि ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के ऑडिट किए गए रिकॉर्ड को संभालने की है। उन्होंने कहा कि वे रोजाना होने वाली नकदी की गिनती या लेन-देन की प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं रहते। चंपत राय का बचाव किया : SIT की शुरुआती रिपोर्ट आने से पहले ही गोविंद गिरि ने चढ़ावे की चोरी को "जघन्य महापाप" बताया। हालांकि, उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनसे सिर्फ गलत व्यक्ति पर भरोसा करने की चूक हुई। चढ़ावे की चीजों को सुरक्षित बताया: गोविंद गिरि का कहना है कि ट्रस्ट को दान में मिली 2,929 कीमती वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी दानदाता चाहे, तो आकर इन्हें देख सकता है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें- राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चंपत राय की पहली चिट्ठी, कहा- SIT की रिपोर्ट के बाद सब बताऊंगा, तब तक मौन अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपों से घिरे पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को श्रीरामचरितमानस की चौपाई लिखकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा- ‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी’। मतलब- धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी इन चारों की वास्तविक परीक्षा संकट के समय ही होती है। पढ़िए पूरी खबर…
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    'धीरज धर्म मित्र' चौपाई से टूटी चंपत राय की चुप्पी:सहयोगियों को संदेश- संकट में कौन साथ देगा; परम गोपनीय SIT रिपोर्ट लीक होने से दुखी
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