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    22 साल नौकरी करने वाले ITI के तीन लिपिक बर्खास्त:प्रयागराज, लखनऊ और मिर्जापुर में तैनाती, फर्जीवाड़े से ली थी नौकरी

    1 day ago

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    उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता विभाग से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फर्जीवाड़े और नियमों के विपरीत हासिल की गई सरकारी नौकरी आखिरकार 22 साल बाद चली गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद प्रशिक्षण निदेशालय के निर्देश पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में तैनात तीन वरिष्ठ सहायकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में आईटीआई नैनी प्रयागराज में तैनात वरिष्ठ सहायक अजय कुमार सिंह, आईटीआई मिर्जापुर के वरिष्ठ सहायक अमर कुमार और आईटीआई अलीगंज लखनऊ में तैनात वरिष्ठ सहायक अनिल कुमार शामिल हैं। इन तीनों की विवादित नियुक्तियां साल 2004 में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में कनिष्ठ सहायक पद पर हुई थीं। 2004 की भर्ती से शुरू हुआ पूरा विवाद पूरा मामला वर्ष 2004 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान प्रयागराज में कनिष्ठ सहायक (सामान्य वर्ग) के दो पदों पर भर्ती के लिए 21 और 23 अगस्त 2004 को अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किए गए थे। इस भर्ती प्रक्रिया में प्रयागराज निवासी विनय कुमार पांडेय समेत कई अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। विनय कुमार पांडेय का आरोप था कि चयन सूची में नाम होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता और बैकडोर एंट्री का आरोप लगाया था। ओवरएज होने के बावजूद मिली नौकरी विज्ञापित पदों पर आईटीआई प्रयागराज के तत्कालीन प्रधानाचार्य एसबी सिंह ने सबसे पहले अनिल कुमार की नियुक्ति की थी। आरोप था कि अनिल कुमार निर्धारित आयु सीमा से अधिक यानी ओवरएज थे, इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर उन्हें नौकरी दे दी गई। नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद रणनीति के तहत उनका तबादला देवरिया कर दिया गया। फर्जी खेल प्रमाणपत्र से हासिल की नौकरी अनिल कुमार के तबादले के बाद प्रयागराज में पद को फिर खाली दिखाया गया और अमर Kumar की नियुक्ति कर दी गई। अमर कुमार ने चयन के दौरान खुद को ‘राज्य स्तरीय खिलाड़ी’ बताते हुए खेल प्रमाणपत्र लगाया था। बाद में जांच में यह प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी और जाली पाया गया। इसके बाद बिना किसी वेटिंग लिस्ट के अजय कुमार सिंह को भी कनिष्ठ सहायक पद पर समायोजित कर लिया गया। आरोप है कि दो पदों की भर्ती की आड़ में पूरी चयन प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए तीनों की अवैध तरीके से नियुक्ति कर दी गई। 2008 में प्रधानाचार्य हुए थे निलंबित भर्ती में भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ने पर विभागीय जांच शुरू हुई। जांच में तत्कालीन प्रधानाचार्य एसबी सिंह दोषी पाए गए और वर्ष 2008 में शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। हालांकि उस समय फर्जी नियुक्ति के लाभार्थी तीनों कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तीनों विभाग में बने रहे और बाद में पदोन्नति पाकर वरिष्ठ सहायक बन गए। न्याय न मिलने पर अभ्यर्थी विनय कुमार पांडेय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब 22 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने 5 मई 2026 को सख्त फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि उक्त विज्ञापन के तहत किए गए सभी चयन निरस्त किए जाते हैं और प्रतिवादी संख्या 4, 5 और 6 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएं। निदेशालय के आदेश पर हुई कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशिक्षण निदेशालय के निदेशक अभिषेक सिंह ने 23 मई 2026 को संबंधित आईटीआई संस्थानों के प्रधानाचार्यों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। निदेशक ने तीन दिनों के भीतर अनुपालन आख्या भेजने को भी कहा। आईटीआई मिर्जापुर के प्रधानाचार्य एमएम शुक्ला ने 26 मई 2026 को वरिष्ठ सहायक अमर कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। आईटीआई नैनी प्रयागराज के प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने 25 मई 2026 को अजय कुमार सिंह की सेवाएं समाप्त कर दीं। वहीं आईटीआई अलीगंज लखनऊ में तैनात अनिल कुमार की सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है।
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