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    23 साल पुराने केस में अस्पताल चिकित्सीय लापरवाही का दोषी:फर्रुखाबाद में आयोग ने 1.10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का दिया आदेश

    20 hours ago

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    फर्रुखाबाद में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 23 साल पुराने चिकित्सीय लापरवाही के मामले में फतेहगढ़ स्थित एक अस्पताल को सेवा में कमी और मेडिकल नेग्लिजेंस का दोषी ठहराया है। आयोग ने अस्पताल को पीड़ित पक्ष को 1.10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह फैसला मैनपुरी जिले के नगला धुरा निवासी किताब सिंह के पक्ष में आया है। उन्होंने वर्ष 2003 में आयोग में परिवाद दाखिल किया था। आयोग ने आदेश दिया कि अस्पताल 13 मार्च 2003 से भुगतान की तिथि तक 8% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 1.10 लाख रुपये का भुगतान करेगा। इसके अलावा अस्पताल को मानसिक क्षति और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अलग से अदा करने होंगे। यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो पूरी देय राशि पर 10% वार्षिक ब्याज देना होगा। ऑपरेशन के बाद बिगड़ी थी महिला की हालत परिवादी किताब सिंह के अनुसार, नवंबर 2002 में उनकी पत्नी मौरश्री को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने गर्भाशय में ट्यूमर बताकर ऑपरेशन की सलाह दी। 20 दिसंबर 2002 को ऑपरेशन किया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें कानपुर रेफर किया गया, जहां 23 दिसंबर 2002 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आयोग ने बताई लापरवाही की वजह सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि ऑपरेशन जटिल प्रकृति का था, जबकि सर्जरी करने वाले चिकित्सक के पास एमएस (सर्जरी) की विशेषज्ञ योग्यता नहीं थी। आयोग ने यह भी माना कि मरीज को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ने की संभावना थी, लेकिन अस्पताल में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद ऑपरेशन किया गया, जिसे आयोग ने गंभीर चिकित्सीय लापरवाही माना। पत्नी और बच्चों को हुआ अपूरणीय नुकसान आयोग ने अपने आदेश में कहा कि चिकित्सकीय सेवा में बरती गई लापरवाही के कारण परिवादी ने अपनी पत्नी को खो दिया, जबकि बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। इस आधार पर अस्पताल को सेवा में कमी और चिकित्सीय लापरवाही का दोषी मानते हुए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार तथा सदस्य नाजरीन बेगम और विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने सुनाया।
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