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    4 बच्चों के शव पहुंचे, फूटा परिजनों का गुस्सा:पुलिस से नोकझोंक, बुलडोजर से आरोपी का घर गिराया; पटाखा फैक्ट्री हादसे में 13 की मौत

    4 hours ago

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    प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर के मोहम्मदपुर गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद मातम के साथ लोगों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। पोस्टमार्टम के बाद जैसे-जैसे शव गांवों में पहुंचे, परिजनों का दर्द गुस्से में बदलता गया। कई जगह लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और पुलिस से तीखी बहस हुई। मीरपुर गांव में एक ही परिवार के चार बच्चों के शव पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। परिजनों ने शवों को घर के बाहर रखकर विरोध जताया। हादसे में गया प्रसाद साहू का मकान पूरी तरह ढह गया था। मलबे में दबने से उनके 15 वर्षीय जान्ह्वी, 10 वर्षीय आदित्य, 7 वर्षीय रवि और 2 वर्षीय अमित की मौत हो गई। गया प्रसाद की पत्नी स्वरूपरानी अभी नेहरू अस्पताल में भर्ती हैं। 4 बच्चों के शव एक साथ पहुंचे, परिवार ने घर के बाहर रखा मीरपुर गांव में चारों बच्चों के शव एक साथ पहुंचे तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। गम और गुस्से में डूबे परिजनों ने शवों को घर के पास रखकर विरोध शुरू कर दिया। परिवार के लोगों का कहना था कि जिस हादसे ने उनका पूरा घर उजाड़ दिया, उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें समझाकर शांत कराने की कोशिश करते रहे, लेकिन अपनों के शव सामने देखकर परिजनों का गुस्सा कम नहीं हुआ। बारिश में भीगते हुए पुलिस से हुई नोकझोंक हादसे में गया प्रसाद साहू का मकान पूरी तरह ढह गया था। धमाके और मलबे में दबने से उनके चारों बच्चों की मौत हो गई। उनकी पत्नी स्वरूपरानी अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही हैं। जब बच्चों के शव उनके दरवाजे पर पहुंचे तो रिश्तेदार और पड़ोसी भी बड़ी संख्या में जुट गए। बारिश के बीच लोगों ने पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान पुलिसकर्मियों और गुस्साए लोगों के बीच कहासुनी भी हुई। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने की कोशिश की। गम में डूबे लोगों के सवालों का अधिकारियों के पास तत्काल कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। वे लगातार लोगों को शांत कराने में जुटे रहे। बुलडोजर एक्शन के बाद भी नहीं थमा आक्रोश हादसे के बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई का मकसद लोगों का गुस्सा शांत करना था, लेकिन हादसे में जान गंवाने वाले सभी परिवार इससे संतुष्ट नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि सिर्फ कार्रवाई से उनके अपनों की जान वापस नहीं आ सकती। वे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हादसे की पूरी जांच चाहते हैं। फैक्ट्री मालिक नौशाद एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार अवैध पटाखा फैक्ट्री के मालिक नौशाद (50) को पुलिस ने मंगलवार तड़के एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार वह शहर छोड़कर भागने की फिराक में था। इस दौरान उसके पैर में गोली लगी। मामले में लापरवाही बरतने पर एक इंस्पेक्टर, छह दरोगा समेत 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। एक पैर मिला था, पोस्टमार्टम हाउस में पिता ने बेटे को पहचाना हादसे में मरने वालों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 13 हो गई। मेडिकल कॉलेज में एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं पोस्टमार्टम हाउस में रखे एक शव की पहचान उसके पिता ने अपने बेटे सुनील के रूप में की। सुनील के पिता सरजू दास सोमवार को मलबे में बेटे की तलाश करते रहे थे। उस दौरान उन्हें सिर्फ एक पैर मिला था, लेकिन शव नहीं मिल पाया था। मंगलवार सुबह भी वह मलबे के पास बेटे को खोजते दिखे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम हाउस भेजा, जहां उन्होंने शव की पहचान की। मलबे से जिंदा निकली बच्ची सदमे में हादसे के दौरान मलबे से एक बच्ची को जिंदा निकाला गया था। इलाज के बाद मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी मिली और वह घर पहुंची। हादसे के सदमे का असर बच्ची पर साफ दिखाई दिया। बातचीत की कोशिश करने पर वह इतनी डरी हुई थी कि कुछ बोल नहीं सकी। परिवार उसे संभालने में जुटा है। 8 बच्चों समेत 13 शवों का पोस्टमार्टम पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले 8 बच्चों समेत सभी 13 शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। शवों के गांव पहुंचने के साथ ही अलग-अलग परिवारों में मातम का माहौल है। हादसे की भयावहता और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सामने आए मंजर को लेकर ड्रोन शॉट्स भी तैयार किए गए हैं। इनमें तबाह हुए मकानों और घटनास्थल की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवैध पटाखा फैक्ट्री इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही और जिम्मेदारों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। ग्राफिक्स से समझिए कहां हुआ था विस्फोट…
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