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    आजमगढ़ में ED की छापेमारी:मुबारकपुर में ब्रिटेन की नागरिकता मामले में मदरसे पर कार्रवाई

    8 hours ago

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    आजमगढ़ के मुबारकपुर में मदरसे के टीचर शमशुलहुदा के अस्थाई निवास पर ED की छापेमारी चल रही है। समसूल हुदा ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद भी अवैध तरीके से वेतन और सेवानिवृत्ति का लाभ लिया था। वर्ष 2013 में समसूल हुदा ने ब्रिटेन की नागरिकता ले ली थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने मदरसे की मान्यता को रद्द करते हुए कई अधिकारियों पर निलंबन की भी कार्रवाई की थी। इस मामले में शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकट सिंह बरेली के लालमन अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित भी पूर्व में कर दिया है इन सभी पर आजमगढ़ में पोस्टिंग के दौरान मौलाना को लाभ देने का आरोप लगा था। ATS जांच में आया था कनेक्शन मौलाना का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है। आरोप है कि उसने विदेशी फंडिंग से मदरसा का संचालन किया और भारत में कट्टरपंथी नेटवर्क को ऑपरेट करने का मॉड्यूल तैयार किया। संतकबीरनगर का रहने वाला मौलाना, विदेश में बस चुका है। उसके विदेश में रहने की जानकारी के बाद भी अधिकारियों ने वेतन, अवकाश और पेंशन का लाभ दिलाया। ब्रिटेन में रहता था, लेकिन भारत में वेतन ले रहा था संतकबीरनगर का शमसुल हुदा खान 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के मदरसा 'दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम' में सहायक अध्यापक नियुक्त हुआ था। वर्ष 2007 में वह ब्रिटेन चला गया। वहां की नागरिकता भी 2013 में हासिल कर ली। ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी वह भारत के मदरसे से वेतन लेता रहा। उसने मदरसे से 31 जुलाई 2017 तक वेतन लिया। विभागीय मिलीभगत से उसे अनियमित चिकित्सा अवकाश स्वीकृत होते रहे। लगभग 16 लाख रुपये वेतन उसने अवैध रूप से प्राप्त किए। 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दे दी गई। हद तो यह कि उसके जीपीएफ व पेंशन का लाभ भी विभाग ने दिया।मौलाना के खिलाफ एटीएस ने भी जांच की। जांच में सामने आया कि मौलाना शमसुल हुदा खान 2007 से ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। इस्लामी प्रचार के नाम पर वह पाकिस्तान के कई शहरों में जाता था। वहां के मौलवियों और धार्मिक संगठनों के संपर्क में था।
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