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    आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट ने कटोरा लेकर प्रदर्शन किया:भर्ती की मांग को लेकर विधानसभा घेरने पहुंचे , अभ्यर्थी बोले- बेरोजगारी से परेशान होकर आत्महत्या करने पर मजबूर

    3 hours ago

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    लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट का कटोरा लेकर भीख मांग कर प्रदर्शन। जोरदार हंगामा के साथ हजरतगंज चौराहे से विधानसभा घेराव करने पहुंचे। विधानसभा से पहले ही प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जीपीओ के पास रोक लिया। वर्ष 2024 की आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती में हो रही देरी को लेकर नाराज अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। शीघ्र सुनवाई और भर्ती प्रक्रिया के निस्तारण की मांग को लेकर नारेबाजी की। सरकार से ठोस पहल करने की अपील की। 53 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान बाराबंकी से आए संदीप ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया कोर्ट केस के कारण अटकी हुई है और अब तक 53 तारीखें लग चुकी हैं। लगातार बढ़ती तारीखों से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला लंबित चल रहा है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। रोजगार की आस में घर परिवार वाले भी बैठे हैं। हम लोग बेहद गरीब परिवार से आते हैं अगर नौकरी नहीं मिली तो स्थिति खराब हो जाएगी। ‘आत्महत्या करने पर मजबूर’ सूरज सिंह ने कहा कि 2 साल से घर पर बैठे हैं सरकारी वकील अपने कमरों में बैठे हैं। हम लोग इतना परेशान हो चुके की बयान नहीं कर सकते। हमारे कई साथियों ने आत्महत्या कर लिया हमारे पास भी अब आत्महत्या करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। इस बेरोजगारी के दौर में नौकरी ना मिलना सबसे बड़ा दुख है। लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। कई कैंडिडेट्स के सामने ओवर ऐज की भी समस्या आ गई है। प्रदेश में 60 प्रतिशत पद रिक्त अभ्यर्थियों के मुताबिक, प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। सरकार की ओर से 1002 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जबकि कुल स्वीकृत पद करीब 2100 हैं। इनमें से लगभग 1200 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पद खाली होने से आयुष और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं के वितरण और फार्मेसी संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बेंच-वाइज फैसला या लिखित परीक्षा कराने की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मांग की कि कोर्ट में बेंच-वाइज निर्णय कराकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यक हो तो सरकार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से लिखित परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराए। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले में प्राथमिकता से हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लंबित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
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