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    अलीगढ़ में फुटपाथ पर करोड़पति परिवार:बेटे के इलाज में आर्थिक रूप से टूटे, भाइयों ने 1800 वर्ग गज की कोठी पर लगाया ताला

    2 hours ago

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    ​अलीगढ़ की पॉश कॉलोनी रत्नेशपुरम में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पर पर एक करोड़पति परिवार पिछले पांच दिनों से चिलचिलाती धूप और खुले आसमान के नीचे सड़क पर रहने के लिए मजबूर है। शहर के नामचीन एक्सपोर्टर रहे रवींद्र सचदेवा का परिवार पिछले 5 दिनों से सड़क पर गद्दे डालकर रह रहा है। जिस 1800 वर्ग गज की आलीशान कोठी के बाहर यह परिवार दाने-दाने को मोहताज है, उसमें इनका भी बराबर का मालिकाना हक है। सांसद आवासे 200 मीटर दूर ​यह मामला थाना क्वार्सी इलाके का है। जहां 'बेबसी' का यह मंजर अलीगढ़ सांसद के आवास से महज 200 मीटर की दूरी पर दिख रहा है। रवींद्र सचदेवा, उनकी पत्नी नीलम, बेटा और एक जवान बेटी अपने ही घर के बाहर फुटपाथ पर दिन गुजार रहे हैं। कभी दूसरों की मदद करने वाला यह रईस परिवार आज पड़ोसियों द्वारा दिए जा रहे खाने पर टिका है। ​सूटकेस पर बैठी बुजुर्ग मां का दर्द बुजुर्ग महिला नीलम एक सूटकेस पर बैठी अपनी किस्मत को कोस रही हैं। परेशान हाल नीलम ने बताया कि उनके देवरों ने मकान और हिस्सा देने का वादा किया था, लेकिन अब वे बात तक नहीं कर रहे। उन्होंने देवरों ने बुलाया था पर आज तक आए नहीं। दो साल से बातचीत चल रही है, वे कहते हैं कागज भेज दो, देख लेंगे, पर कुछ नहीं दिया। अब हमारे पास सब कुछ खत्म हो चुका है। हम कब तक किराये पर रहें और कितना खर्च करें। ​बेटे की बीमारी में सब कुछ गया नीलम ने बताया कि उनका परिवार पहले अलीगढ़ में ही अपने घर में रहता था। साल 2012 में बेटा बीमार हुआ तो उसे इलाज के लिए दिल्ली के एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया। दो साल तक चले इलाज, दिल्ली के महंगे किराये और दवाओं के खर्च ने परिवार की कमर तोड़ दी। दूसरे बेटे ने भी अपनी पूरी जमापूंजी लगा दी। जब उनके पति ने भाइयों से हिस्सा देने की बात कही तो उन्होंने दिल्ली में मकान दिलवाने का भरोसा दिया। डीडीए का मकान भी देख लिया गया, लेकिन भाइयों ने हाथ खींच लिए। इसके बाद न तो पैसे दिए और न मकान। ​करोड़पति से फुटपाथ तक का सफर सचदेवा परिवार के चार भाई हैं और रवींद्र सबसे बड़े हैं। 2012 में पैतृक संपत्ति बेचने के बाद आरोप है कि रवींद्र को उनके हिस्से के 40 लाख रुपए नहीं दिए गए। 2022 से भाइयों ने बिजनेस से मिलने वाला खर्च भी बंद कर दिया। आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण जब यह परिवार दिल्ली से अलीगढ़ लौटा, तो भाइयों ने अपनी आलीशान कोठी पर ताला जड़ दिया और खुद मुरादाबाद चले गए। ​प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मामला हाईप्रोफाइल होने और सांसद आवास के नजदीक होने के कारण अब प्रशासन हरकत में आया है। सूचना मिलते ही इंटेलिजेंस की टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस अब अन्य भाइयों, अनिल और प्रदीप से संपर्क करने की कोशिश कर रही है ताकि इस मानवीय संकट का समाधान निकाला जा सके और परिवार को उनका हक मिल सके।
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