Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Allahabad High Court ने वाराणसी भूमि अधिग्रहण याचिकाएं खारिज कीं, पुराना मुआवजा सही ठहराया

    34 minutes ago

    1

    0

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण के एवज में दिए गए मुआवजे से संबंधित कई याचिकाएं खारिज करते हुए कहा है कि अदालत के निर्देश पर दिए गए मुआवजे को महज इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसकी गणना 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाजार मूल्य के आधार पर नहीं की गई। ये याचिकाएं वाराणसी जिले के राजातालाब स्थित ग्राम बैरवां में याचिकाकर्ताओं की भूमि के अधिग्रहण के संबंध में वाराणसी के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी की ओर से 10 जनवरी 2024 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत पारित आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थीं। इस भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने वर्ष 2000 में शुरू की थी।अदालत ने पाया कि अधिग्रहण अधिकारी ने मुआवजे का निर्धारण उच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुरूप किया था इसलिए इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वाराणसी निवासी विजय कुमार और 153 अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने कहा कि मुआवजे का निर्धारण न्यायिक निर्देश के अनुपालन में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत किया गया था, इसलिए इसे इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि मुआवजे की गणना एक जनवरी 2014 से प्रभावी नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार बाजार मूल्य के आधार पर की जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित सार्वजनिक प्रयोजन को बदल दिया है, जिसकी अनुमति नहीं है।इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह आधार याचिकाकर्ताओं के लिए पूर्व में दायर मुकदमे में भी उपलब्ध था, लेकिन उन्होंने उस समय इसे नहीं उठाया। अदालत ने कहा कि मौजूदा मुकदमे की सुनवाई केवल उच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुसार दिए गए मुआवजे को चुनौती देने तक सीमित है। सात अगस्त 2026 को दिए गए अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मुआवजा उसके पूर्व निर्देशों के अनुरूप दिया गया है, इसलिए किसी अन्य आधार पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Rahul Gandhi ने PM Modi पर लगाया देश के हित बेचने का आरोप, Adani केस का दिया हवाला
    Next Article
    Bab al-Mandeb में Houthi Rebels का बड़ा हमला: 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत, Global Shipping पर गहरा संकट

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment