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    बारिश न होने से सूखने लगे धान के खेत:तेज धूप-उमस ने बढ़ाई किसानों की चिंता, नदियां भी खतरे के निशान से काफी नीचे

    1 hour ago

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    सिद्धार्थनगर में मानसून की रफ्तार अचानक थम गई है। सावन का महीना होने के बावजूद पिछले चार-पांच दिनों से बारिश नहीं हुई है। इससे धान के खेतों में जमा पानी तेजी से सूख रहा है और किसानों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार दोपहर 12 बजे तक अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले कई दिनों से तापमान 34 से 36 डिग्री के बीच बना हुआ है। तेज धूप और हवा में नमी के कारण उमस भी बढ़ी हुई है। शुरुआत में अच्छी बारिश से समय पर हुई थी धान की रोपाई मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश होने से किसानों ने समय पर धान की रोपाई पूरी कर ली थी। शुरुआती बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी जमा हो गया था। इससे धान की फसल को अच्छी शुरुआत मिली और किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी थी। हालांकि, पिछले चार-पांच दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। निचले इलाकों को छोड़कर अधिकांश खेतों में पानी लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है। बारिश नहीं हुई तो पीली पड़ सकती है धान की फसल किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान के पौधे पीले पड़ने लगेंगे और उनकी बढ़वार प्रभावित होगी। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। किसानों को फसल बचाने के लिए डीजल पंप और ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी। नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बारिश की कमी का असर जिले की नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर की 12 अगस्त की दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। बानगंगा बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे है और नदी स्थिर है। राप्ती नदी बांसी पुल पर 3.37 मीटर, परसोहन घाट पर 5.72 मीटर, बूढ़ी राप्ती मुंहचोरवा घाट पर 4.23 मीटर और ककरही पुल पर 5.31 मीटर नीचे बह रही है। कूड़ा नदी आलमनगर पर 3.50 मीटर और उसका रेलवे पुल पर 4.83 मीटर, घोघी नदी लोटन पुल पर 3.70 मीटर, तेलार नाला 5 मीटर तथा जमुआर नाला नौगढ़ पुल पर 3.66 मीटर खतरे के निशान से नीचे है। अधिकांश गेज स्टेशनों पर जलस्तर स्थिर है या धीरे-धीरे घट रहा है। फिलहाल जिले में बाढ़ का खतरा नहीं है, लेकिन खेती के लिए पानी की कमी किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पिछले साल से 160 मिमी कम बारिश हुई जिले में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 308 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक करीब 468 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी। यानी इस बार अब तक करीब 160 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। धान की फसल के लिए पानी की जरूरत बढ़ने के समय बारिश का सिलसिला टूटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो धान की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसका असर आगे चलकर पैदावार पर भी पड़ सकता है। छोटे किसानों के सामने सिंचाई की बड़ी चुनौती गांवों में किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई की व्यवस्था है, वे किसी तरह खेतों में पानी पहुंचा रहे हैं। वहीं छोटे और सीमांत किसानों के सामने डीजल और सिंचाई की बढ़ती लागत बड़ी समस्या है। लगातार सिंचाई करने से खेती की लागत बढ़ेगी और मुनाफा कम होने की आशंका है। किसान सुमेर चौधरी ने बताया कि कई दिनों से बारिश नहीं हुई है। तेज धूप और उमस के कारण खेतों का पानी सूख गया है। धान की फसल को इस समय पानी की सख्त जरूरत है। सभी किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसान सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि इस समय धान की फसल संवेदनशील दौर में है। बारिश नहीं होने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की बालियां कमजोर हो सकती हैं और उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। मौसम विभाग को बारिश की उम्मीद मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और उमस का दौर बना रह सकता है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी से नमी मिलने और मानसूनी गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने से आने वाले दिनों में बादल छाने, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर अच्छी बारिश भी हो सकती है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो धान की फसल को राहत मिलेगी और खेतों में नमी लौट आएगी। लेकिन बारिश का इंतजार लंबा खिंचा तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। फिलहाल जिले में बाढ़ का खतरा नहीं है, लेकिन धान की फसल के लिए पानी की कमी चुनौती बन गई है। आने वाले कुछ दिन खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं
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