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    'अमेरिका में तैयारी, करोड़ों की नौकरी छोड़ UPSC जॉइन करेंगे':लखनऊ के मेधावियों की कहानी, वनज पढ़ाई के दौरान ही यूथ आइकॉन बने

    2 hours ago

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    करीब 10 साल अमेरिका में रहकर गूगल में जॉब की, करोड़ों के पैकेज पर काम करने के बावजूद अपने देश की माटी की महक पीयूष कपूर को वापस खींच लाई। UPSC रिजल्ट्स में उन्हें 402वीं रैंक हासिल हुई। उनके पिता यश कपूर कहते हैं कि बेटे ने देश के साथ मेरा भी मान रखा। मुझे पूरा भरोसा हैं कि वह ईमानदारी से देश सेवा करेगा। UPSC रिजल्ट्स में क्वालीफाई करने वाले ऐसे ही कई मेधावियों से दैनिक भास्कर ने बातकर उनकी कहानी जानी। पढ़िए उनका सफरनामा... रायबरेली के विमल कुमार को ऑल इंडिया 107वीं रैंक मिली है। इन्होंने लखनऊ में रहकर तैयारी की। किसान पिता रामदेव और मां सियावती देवी के इस बेटे ने प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय से हासिल की। इसके बाद IIT दिल्ली से बीटेक किया। इससे पहले वर्ष 2024 में भी UPSC इंटरव्यू तक पहुंचे थे। उन्होंने UPSC की तैयारी में मेहनत और धैर्य को सबसे जरूरी बताया। उनका मंत्र है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानें और खुद पर भरोसा बनाए रखें। पहले यूथ आइकॉन बने और अब UPSC क्वालीफाई किया लखनऊ की RML नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट रहे वनज विद्यान ने 278 रैंक हासिल की है। 2023 बैच के पास आउट स्टूडेंट के पिता डॉ. पंकज कुमार भारत सरकार के कृषि मंत्रालय में तैनात हैं। मां वंदना रानी जापानी लैंग्वेज एक्सपर्ट हैं। इस साल 26 जनवरी को नेशनल यूथ आइकॉन के तौर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में बुलाया था। इससे पहले पिछले साल के विकसित भारत यंग लीडर कॉन्क्लेव के वे विनर रहे हैं। इसमें कुल 40 लाख युवा शामिल हुए थे। 2025 जनवरी में भारत मंडपम में आयोजित इस कॉन्क्लेव के दौरान पीएम से भी उनकी मुलाकात हुई, और 10 मिनट तक उन्हें पीएम के सामने प्रेजेंटेशन दिया था। मौजूदा समय वो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से LLM भी किया। उसमें भी गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। डाक विभाग में ट्रेनिंग के दौरान भी करते रहे तैयारी लखनऊ के अलीगंज निवासी आदर्श पांडेय को 347वीं रैंक हासिल हुई है। आदर्श ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई लखनऊ पब्लिक स्कूल की जानकीपुरम ब्रांच से की। उसके बाद सिटी लॉ कॉलेज चिनहट से एलएलबी ऑनर्स किया। वह इससे पहले UPSC CSE-2024 भी पास कर चुके हैं। उसके बाद से भारतीय डाक सेवा में ट्रेनिंग ले रहे हैं। आदर्श का कहना है कि सेल्फ स्टडी और मजबूत योजना बनाकर कामयाबी हासिल की है। वह मूलरूप से अमेठी जिले के रहने वाले हैं। गूगल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 402वीं रैंक लखनऊ के पीयूष कपूर ने 402वीं रैंक हासिल की है। पीयूष 10 साल से अमेरिका (USA) में गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। पीयूष ने बताया- गूगल में सीनियर लीडरशिप रोल निभाते हुए तैयारी के लिए समय निकालना बड़ी चुनौती थी। मैंने टाइम जोन के अंतर को अपनी ताकत बनाया। मैंने अपनी पूरी तैयारी को एक 'डेटा-ड्रिवन' प्रोजेक्ट की तरह मैनेज किया। सिलिकॉन वैली से प्रशासन की ओर एक सफल ग्लोबल करियर के बाद भी मेरे मन में हमेशा देश के लिए कुछ करने की इच्छा थी। इस सफर में मेरे पिता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी (से.नि.) अरुण कपूर और मां रुचि कपूर के साथ बड़े भाई आयुष कपूर मेरी ताकत और प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्हीं के प्रोत्साहन की वजह से मैं आज इस मुकाम पर पहुंच पाया हूं। अभ्युदय कोचिंग से तैयारी करके पूरा किया सपना गाजियाबाद के प्रताप विहार सेक्टर-12 की मानसी का सपना पांचवें प्रयास में पूरा हुआ। तीसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंची थीं। इस बार उनको ऑल इंडिया 444वीं रैंक मिली है। वह लखनऊ में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित अभ्युदय कोचिंग जॉइन कर तैयारी कर रही थीं। पिता अशोक कुमार प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहे हैं। मां शिवानी देवी गृहणी हैं। मानसी ने गाजियाबाद के ब्लूम पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से 2020 में कंप्यूटर साइंस में बीएससी ऑनर्स पास किया। उसके बाद से ही UPSC की तैयारी करनी शुरू की। कठिन हालातों में पाई सफलता मैनपुरी के छोटे से कस्बे से निकले सूरज तिवारी की कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं। एक भयानक ट्रेन हादसे ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपनों को ही अपना सहारा बना लिया। गाजियाबाद के दादरी में हुए हादसे में सूरज ने दोनों पैर, एक हाथ और बाएं हाथ की तीन उंगलियां खो दीं। कई महीनों तक अस्पताल में इलाज चला और घर लौटने के बाद भी तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। इसी बीच उन्होंने अपने भाई को भी खो दिया, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने उनके हौसले को कमजोर करने के बजाय और मजबूत कर दिया। सूरज ने तय कर लिया कि वह सिविल सेवा में जाकर अपनी पहचान बनाएंगे। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर सिर्फ तीन उंगलियों के सहारे यूपीएससी की तैयारी शुरू की। बिना कोचिंग के रोज 15 से 17 घंटे पढ़ाई कर उन्होंने कठिन परीक्षा का सामना किया। उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2022 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने 917वीं रैंक हासिल की। इसके आधार पर उनका चयन भारतीय सूचना सेवा में हुआ। आज सूरज तिवारी भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी के रूप में आकाशवाणी लखनऊ में तैनात हैं। मैनपुरी की कुरावली तहसील के मोहल्ला घरनाजपुर के रहने वाले सूरज एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता दर्जी का काम करते थे और छोटी सी दुकान से परिवार का गुजारा चलता था।
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