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    अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज में एक और परिवाद दाखिल:आशुतोष महाराज ने लगाया धार्मिक यात्रा पर हमले का आरोप

    9 hours ago

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    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्य वादी व पक्षकार आशुतोष महाराज के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के खिलाफ प्रयागराज जिला अदालत में एक और परिवाद दाखिल किया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कक्ष संख्या–5 के न्यायाधीश संदीप पारचा ने परिवाद स्वीकार करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी करने और वादी का बयान दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की गई है। इससे पहले आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पाक्सो विशेष न्यायालय) में वाद दायर कर यौन शोषण समेत अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में 21 फरवरी को आदेश जारी होना है। वहीं, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने भी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मानहानिकारक बयान और डिजिटल दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए कैराना की अदालत में परिवाद दायर किया था। आशुतोष महाराज के परिवाद में क्या है जानिए….. 18 जनवरी को श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा निकाली गई आशुतोष महाराज ने अपने परिवाद में धारा 173(4) बीएनएसएस का हवाला देते हुए कहा- श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति शिविर, सेक्टर-6, संगम लोवर मार्ग, हरीशचंद्र चौराहा, प्रयागराज (माघ मेला-2026) में माता शाकुंभरी देवी का अनुष्ठान एवं महायज्ञ 3 जनवरी से चल रहा था मौनी अमावस्या पर 18 जनवरी को माघ मेला क्षेत्र प्रयागराज में श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा का आयोजन किया गया। इसमें श्री कृष्ण जन्मभूमि वाद के वादी संख्या-6 भगवान केशवदेव महाराज (लड्डू गोपाल जी) की पटरानी माता यमुना देवी के मिलन हेतु यात्रा श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति शिविर से प्रारंभ हुई। अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास यात्रा पर हमला हुआ आरोप है कि जैसे ही यात्रा त्रिवेणी मार्ग स्थित अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास पहुंची, विपक्षियों ने सार्वजनिक मार्ग पर कथित रूप से अवैध जाम लगा दिया। इससे धार्मिक यात्रा और आम आवागमन बाधित हुआ। वादी के अनुसार, उस समय उनके साथ श्रीकृष्ण सेना के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिंह, प्रदेश महामंत्री अमरेंद्र कुमार, जिला अध्यक्ष प्रशांत कुमार सहित अन्य सेवादार मौजूद थे। आरोप है कि विपक्षी पक्ष आक्रामक हो गया और सामूहिक रूप से हमला कर दिया। परिवाद में कहा गया है कि मुकुंदानंद ब्रह्मचारी (अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य) ने जान से मारने की नीयत से वादी का गला दबाया। वहीं, आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद ने मंच से कठोर वस्तुएं/हथियार फेंके, जिनमें से एक वादी के सिर पर लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट और धक्का-मुक्की की गई घटना के दौरान अन्य सेवादारों के साथ भी मारपीट और धक्का-मुक्की की बात कही गई है। साथ ही, ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज की प्रतिमा के गिरने का भी उल्लेख किया गया है, जिसे न्यायिक व्यक्ति पर आपराधिक बल प्रयोग की श्रेणी में बताया गया है। वादी पक्ष का कहना है कि वे किसी तरह जान बचाकर वहां से निकले, अन्यथा गंभीर परिणाम हो सकते थे। 18 जनवरी को थाना झूसी, प्रयागराज में तहरीर दी गई और चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मेडिको-लीगल रिपोर्ट में शरीर के विभिन्न हिस्सों पर हार्ड एवं ब्लंट ऑब्जेक्ट से लगी चोटों का उल्लेख होने का दावा किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। कोर्ट का आदेश आवेदक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र अन्तर्गत धारा 173 (4) बी०एन०एस०एस० परिवाद के रूप में दर्ज हो। विपक्षीगण को नोटिस जारी हो। पत्रावली वास्ते बयान धारा 223 बी०एन०एस०एस० दिनॉक 17-03-2026 को पेश हो। आशुतोष महाराज की रील खास चर्चा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्यवादी व पक्षकार आशुतोष महाराज ने 13 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट में नाबालिगों के बयान दर्ज कराए। इस दौरान उन्होंने रील भी बनाई। इस रील में आशुतोष महाराज फाइल लेकर प्रयागराज की जिला अदालत में पहुंच रहे हैं। इसमें बैकग्राउंड में डायलाग है- एक सलाह देता हूं, आप उसके खिलाफ जाने की जुर्रत मत करना। एक और रील है। इसमें गाना बजता है- हमें साथ चाहिए, हम चैन से नहीं रहेंगे हमें इंसाफ चाहिए। भगवा वस्त्र में आशुतोष महाराज समर्थकों और वकीलों के बीच में चल रहे हैं। इसके अलावा कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद आशुतोष महाराज का रोते हुए वीडियो सामने आया है। आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध किया। फिर उनके खिलाफ प्रयागराज कमिश्नर थाने में तहरीर दे डाली। इसके बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पाक्सो विशेष न्यायालय) में वाद दाखिल कर यौन शोषण समेत अन्य गंभीर आरोप लगा दिए। पॉक्सो कोर्ट ने आशुतोष महाराज के वाद पर फैसला सुरक्षित कर लिया। 21 फरवरी को आदेश जारी होगा। देशभर की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं। तय होगा कि शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस हो जाएगा। बता दें कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर करके कहा- गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं। आशुतोष महाराज ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। उनके पास आय से अधिक संपत्ति है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने 10 फरवरी को दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था। अब 20 फरवरी को दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे। बता दें, चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे। पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं। पहली शिकायत में आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए। दूसरी शिकायत में आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे। ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए। पढ़िए आशुतोष महाराज ने कोर्ट में जो वाद दायर किया जब प्रशासन ने आशुतोष महाराज की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 8 फरवरी को कोर्ट में वाद दायर किया। इसमें उन्होंने लिखा- मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेला में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा है। मेरे शिविर में 2 शिष्य आए, जो नाबालिग हैं। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए। उन्होंने मुझसे शिष्य बनने की इच्छा चाही। कहा कि हम असुरक्षित हैं। मुझसे पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता मांगी। बच्चों ने मुझे बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया। महाकुंभ- 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला- 2026 के दौरान दोनों बच्चों से फिर से कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भी सोने को कहा जाता है। दोनों बच्चे मौका पाकर हमारे शिविर में आए। इसके बाद 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी गई। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी। लेकिन, कोई FIR नहीं दर्ज हुई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं। जानिए आशुतोष महाराज कौन है? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली जनपद के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टर की करते थे। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज कांधला के प्राचीन शाकंभरी सिद्धप्पीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी, इसके बाद से वह सन्यासी जीवन जी रहे है। मौनी अमावस्या पर प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोकी थी 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य बिना गंगा स्नान किए माघ मेले से विदा हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का स्वामी रामभद्राचार्य ने किया था विरोध मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर तुलसी पीठ स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा था- अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। संगम तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। उनको बिल्कुल सही नोटिस दिया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- स्वामी रामभद्राचार्य की बात मत करिए, वो दोस्ती निभा रहे हैं। उनको लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वो कुछ भी बोलते हैं। वो हमारे कुल का है ही नहीं। अगर हमारे कुल का होता तो उसको हमारा दर्द होता। जहां तक पालकी की बात है, पेशवा भी हमारी पालकी उठवाकर लाते थे। अब अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए ज्योतिष्पीठ का पूरा विवाद जानिए ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य बोले- मेरी हत्या चाहने वालों से सुरक्षा कैसे मांगें:कुकर्म का आरोप लगाने वाला अपराधी, वो गो-हत्यारों के संपर्क में जो मेरी हत्या करना चाहते हैं, उनसे हम कैसे कहें कि हमारी सुरक्षा करो। हमने अपनी बात कोर्ट के सामने रख दी है। जो लोग खुद अपराधी हैं, बताइए…वो हमारी शिकायत कर रहे हैं। आशुतोष खुद गो हत्यारों के संपर्क में है। ये बातें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कही। पढ़िए पूरी खबर
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