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    भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का मकान तोड़ने पहुंचे बिल्डर:वाराणसी में 10 वर्षों से विवाद, परिजनों ने विरोध किया, कहा-धरोहर नहीं मिटने देंगे

    4 hours ago

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    वाराणसी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के सराय हड़हा स्थित पैतृक मकान को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। रविवार की सुबह उस्ताद के मकान के सामने के हिस्से को तोड़ने के लिए बिल्डर पहुंचे तो विवाद हो गया। एक पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया और कागज दिखाने की मांग शुरू कर दी। दूसरे पक्ष ने पुलिस बुला ली। मौके पर पियरी चौकी इंचार्ज पहुंचे और दोनों पक्षों को चौकी ले गए। दोनों पक्ष को समझा कर शांत कराया। पिछले दस सालों से यह विवाद चल रहा है। नगर आयुक्त की मानें तो मकान के जिस हिस्से में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां रहते थे, उस हिस्से को जल्द ही संग्रहालय बनाया जाएगा। उसका डीपीआर भी तैयार है। मकान तोड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि बिल्डर के पास मकान गिराने के लिए कोई वैध दस्तावेज या प्रशासनिक अनुमति नहीं है। इस कार्रवाई के संबंध में किसी भी न्यायालय का कोई आदेश भी सामने नहीं आया है। बिना किसी कानूनी आधार के मकान तोड़ने की कोशिश किए जाने के कारण वहां विवाद बढ़ने की आशंका जताई गई है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की इस धरोहर को बचाने के लिए परिजन लामबंद हो गए हैं। मकान में परिवार के 35 सदस्य रहते हैं उस्ताद के परपोते गाजी अब्बास ने बताया - यह ऐतिहासिक मकान उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बड़े बेटे मेहताब हुसैन के नाम पर दर्ज है। वर्तमान में यहां उनके दूसरे बेटे नैयर हुसैन खां का संयुक्त परिवार रहता है। जिसमें कुल 35 सदस्य शामिल हैं। एक तरफ जहां पूरा परिवार इस धरोहर को बचाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दोनों भाइयों ने परिवार के ही अन्य दो सदस्यों पर बिल्डर पक्ष के साथ सांठगांठ करने और उनका साथ देने का गंभीर आरोप लगाया है। मौके पर पुलिस बल तैनात, जांच शुरू घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए चौक इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला ने बताया कि मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर तुरंत पुलिस फोर्स भेजी गई थी। पुलिस ने दखल देकर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों को समझाकर फिलहाल शांत कराया। पुलिस इस मामले के सभी कानूनी और मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है ताकि आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। आजादी के बाद लालकिले की प्राचीर पर बजाई थी शहनाई भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने देश की आजादी के बाद जब पहली बार लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री जवाहा लाल नेहरू ने तिरंगा झंडा फहराया था। उस दिन 15 अगस्त 1947 को बिस्मिल्लाह खां ने लाल किले की प्राचीर से ही अपनी शहनाई की धुन से देश को आजादी का संदेश दिया था। बिस्मिल्लाह खां को देश के सर्वोच्च भारत रत्न सम्मान के साथ ही साथ पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण भी मिला था। इसके अलावा देश के हर कोने से अवार्ड दिया गया। लेकिन उन्होंने कभी भी काशी नहीं छोड़ी। नगर निगम बनवाने वाला है संग्रहालय… नगर निगम ने संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया था कि यह काशी का सौभाग्य है कि काशी में भारत रत्न, कई पद्मश्री, कई पद्म भूषण और पद्म विभूषण हुए हैं और हैं। नगर निगम ने एक योजना बनाई है कि ये महान लोग जहां से पढ़े हैं, जहां रहते हैं और जहां उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया है। उस पूरे एरिया को हम डेवलेप करेंगे। इसमें सड़क, फुटपाथ, लाइट और फसाड (घर का मुख्य हिस्सा) हम बेहतर करेंगे और उसे सुन्दर बनाएंगे। इसके लिए हमने 30 करोड़ के फंड की व्यवस्था की है। इससे उनके घर जाने वाली गलियों को रेनोवेट किया जाएगा और घर को संग्रहालय का रूप दिया जाएगा। भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां के घर का डीपीआर तैयार नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जानकारी देते हुए बताया था कि - भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बेनिया के हड़हासराय स्थित मकान को नगर निगम सुंदरीकरण कराने जा रहा है। इसके लिए डीपीआर शासन को भेजने के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी ली गई है। जल्द ही हम यहां कार्य शुरू करने वाले हैं। इसमें उनके मकान के मुख्य भवन का सुंदरीकरण और गलियों का सुंदरीकरण कर चौड़ीकरण मुख्य है। कमरा बनेगा म्यूजियम नगर आयुक्त ने बताया था कि - भारत रत्न का जो कमरा उनके मकान के सबसे अंतिम तल पर मौजूद है। उसे हम म्यूजियम का रूप देने जा रहे हैं। इसके लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस म्यूजियम में उस्ताद से जुडी हर चीज को संजोया जाएगा। जिसमें उस्ताद की टोपी, छाता, लालटेन, शहनाई, हाथ का पंखा, बक्सा, चप्पल, कलम सभी अन्य चीजें भी शामिल रहेंगी। जिसे वहां संजोकर रखा जाएगा।
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